जरुरी जानकारी | कचरे के ढेर को आधा करने में मदद कर सकता है बायोगैस उद्योगः आईबीए

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. इंडियन बायोगैस एसोसिएशन (आईबीए) ने बृहस्पतिवार को कहा कि कचरा जमा होने वाली जगहों पर आने वाले कचरे को अगले तीन वर्षों में करीब 50 प्रतिशत करने में बायोगैस उद्योग मदद कर सकता है।

नयी दिल्ली, दो दिसंबर इंडियन बायोगैस एसोसिएशन (आईबीए) ने बृहस्पतिवार को कहा कि कचरा जमा होने वाली जगहों पर आने वाले कचरे को अगले तीन वर्षों में करीब 50 प्रतिशत करने में बायोगैस उद्योग मदद कर सकता है।

बायोगैस परिचालकों, विनिर्माताओं एवं योजनाकारों के राष्ट्रीय संगठन आईबीए ने अपने एक बयान में कहा कि भारत में प्रति व्यक्ति कचरा उत्पादन 0.4 किलोग्राम है। इस कचरे का करीब आधा हिस्सा ऑर्गेनिक होता है जिसे बायोगैस संयंत्रों में भेजा जा सकता है।

आईबीए के मुताबिक भारत में प्रति दिन करीब 2.5 लख टन कचरा पैदा होता है और कुल ऑर्गेनिक कचरे का 85 फीसदी हिस्सा कचरे के ढेर तक पहुंचता है। ऑर्गेनिक कचरा अधिक होने से मीथेन, कार्बन डाई ऑक्साइड और अमोनिया जैसी खतरनाक गैसें पैदा होती हैं जो मानव स्वास्थ्य एवं पर्यावरण के लिए बड़ी चिंता का विषय है।

आईबीए के मुताबिक, कई शोधों से पता चलता है कि कचरे के इन ठिकानों के आसपास रहने वाले लोगों को अस्थमा, डायरिया, पेट-दर्द, फ्लू, हैजा, मलेरिया, कफ और त्वचा संबंधी समस्याएं अधिक होती हैं। आईबीए ने कहा कि विभिन्न राज्यों में कंपोस्ट लायक कचरे को कम करने में बायोगैस उद्योग मददगार हो सकता है।

उसने कहा कि अभी बायोगैस संयंत्रों में ऑर्गेनिक कचरे की कम मात्रा का ही इस्तेमाल हो रहा है। अगर देश भर में बायोगैस संयंत्रों की मंजूरी समय पर दी जाती है तो बायोगैस उद्योग इस कचरे को कम करने में अहम योगदान दे सकता है।

फिलहाल देश भर में करीब 200 बायोगैस संयंत्रों की ऑर्गेनिक कचरे की कुल निपटान क्षमता 20,000 टन प्रतिदिन है।

आईबीए के अध्यक्ष ए आर शुक्ला ने कहा, "अगर कचरे के ढेर तक पहुंचने वाले इस कचरे का सही ढंग से इस्तेमाल हो तो यह भारत को ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में कमी की प्रतिबद्धताएं पूरी करने में मदद कर सकता है।"

डॉ शुक्ला ने कहा कि महानगरों में कचरे के निपटान में बायोगैस उद्योग बहुत मददगार हो सकता है। उन्होंने कहा, "महानगरों का करीब आधा कचरा कंपोस्ट हो सकता है और इसका इस्तेमाल बायोगैस उद्योग में किया जा सकता है। सरकार भी उद्योग को सब्सिडी देकर जरूरी समर्थन दे सकती है।"

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