ताजा खबरें | तेलंगाना में केंद्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय स्थापित करने वाले विधेयक को संसद से मिली मंजूरी
Get latest articles and stories on Latest News at LatestLY. संसद ने तेलंगाना में समक्का सरक्का केंद्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय स्थापित करने संबंधी विधेयक को बुधवार को मंजूरी प्रदान कर दी।
नयी दिल्ली, 13 दिसंबर संसद ने तेलंगाना में समक्का सरक्का केंद्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय स्थापित करने संबंधी विधेयक को बुधवार को मंजूरी प्रदान कर दी।
राज्यसभा ने केंद्रीय विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक, 2023 को विपक्षी सदस्यों की अनुपस्थिति में चर्चा के बाद ध्वनिमत से पारित कर दिया। केंद्रीय विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक, 2023 को पिछले सप्ताह लोकसभा ने मंजूरी दी थी।
विपक्षी सदस्य लोकसभा की कार्यवाही के दौरान हुए सुरक्षा उल्लंघन के मुद्दे पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से बयान देने की मांग कर रहे थे। विपक्षी सदस्यों ने अपनी मांग नहीं माने जाने पर सदन से बहिर्गमन किया।
लोकसभा में शून्यकाल के दौरान दो लोग दर्शक दीर्घा से सदन में कूद गए और उन्होंने कनस्तरों से पीली गैस छोड़ी। सांसदों द्वारा काबू में किए जाने से पहले उन्होंने नारेबाजी भी की। लगभग उसी समय, एक महिला सहित दो लोगों ने संसद भवन परिसर के बाहर ‘तानाशाही नहीं चलेगी’ जैसे नारे लगाते हुए कनस्तरों से रंगीन गैस का छिड़काव किया।
उच्च सदन में विधेयक पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2014 के तहत तेलंगाना में एक केंद्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय की स्थापना अनिवार्य है।
उन्होंने कहा कि आंध्र प्रदेश में एक जनजातीय विश्वविद्यालय पहले ही स्थापित किया जा चुका है और परिसर ने काम करना शुरू कर दिया है।
उन्होंने कहा, ‘‘अगर तेलंगाना सरकार ने सही समय पर सहयोग किया होता तो यह विश्वविद्यालय अब तक बन गया होता। उन्होंने जमीन उपलब्ध कराने में लंबा समय लिया, इसलिए कार्यान्वयन में देरी हुई।’’
केंद्रीय विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक, 2023 के बयान और उद्देश्यों के अनुसार, समक्का सरक्का केंद्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय की स्थापना आने वाले वर्षों के लिए क्षेत्रीय आकांक्षाओं को पूरा करेगी।
इसमें कहा गया है कि प्रस्तावित संस्थान उच्च शिक्षा की पहुंच और गुणवत्ता को बढ़ाएगा और तेलंगाना के लोगों के लिए उच्च शिक्षा और अनुसंधान सुविधाओं को सुविधाजनक और बढ़ावा देगा।
इसके मुताबिक यह भारत की जनजातीय आबादी को जनजातीय कला, संस्कृति और रीति-रिवाजों और प्रौद्योगिकी में उन्नति में अनुदेशात्मक और अनुसंधान सुविधाएं प्रदान करके उन्नत ज्ञान को भी बढ़ावा देगा।
इसमें कहा गया है, ‘‘जनजातीय शिक्षा पर ध्यान केंद्रित करने के अलावा, केंद्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय किसी भी अन्य केंद्रीय विश्वविद्यालय की तरह सभी शैक्षणिक और अन्य गतिविधियों को पूरा करेगा।’’
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