ताजा खबरें | मुख्य निर्वाचन आयुक्त की नियुक्ति से संबंधित विधेयक लोकसभा में चर्चा और पारित करने के लिए पेश

Get latest articles and stories on Latest News at LatestLY. मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) और निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्तियों व उनकी सेवा शर्तों को विनियमित करने से संबंधित विधेयक बृहस्पतिवार को लोकसभा में चर्चा और पारित करने के लिए रखा गया।

नयी दिल्ली, 21 दिसंबर मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) और निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्तियों व उनकी सेवा शर्तों को विनियमित करने से संबंधित विधेयक बृहस्पतिवार को लोकसभा में चर्चा और पारित करने के लिए रखा गया।

मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्त (नियुक्ति, सेवा शर्तें और पदावधि) विधेयक, 2023 को सदन में चर्चा एवं पारित करने के लिए रखते हुए कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने उच्चतम न्यायालय के निर्णय का हवाला देते हुए कहा कि संविधान निर्माताओं ने निर्वाचन आयुक्त की नियुक्ति के संबंध में कानून बनाने की बात कही थी, लेकिन इसे कई साल बीत गए।

उन्होंने कहा कि 1991 में एक कानून बना, लेकिन उसमें मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति का उल्लेख नहीं था।

मेघवाल के अनुसार, उच्चतम न्यायालय ने कहा था कि जब तक संसद इस संबंध में कानून नहीं बनाएगी, तब तक उसके फैसले के अनुरूप नियुक्ति की व्यवस्था जारी रहेगी।

उन्होंने कहा कि इसी संदर्भ में सरकार यह कानून बनाने जा रही है। उन्होंने कहा कि राज्यसभा इस विधेयक को पारित कर चुकी है।

मेघवाल ने कहा कि विधेयक में एक सरकारी संशोधन के तहत ‘सर्च कमेटी’ की अध्यक्षता अब कैबिनेट सचिव की जगह कानून मंत्री करेंगे जिसमें दो सचिव सदस्य होंगे।

उन्होंने कहा कि एक सरकारी संशोधन के तहत मुख्य निर्वाचन आयुक्त और निर्वाचन आयुक्तों का वेतन उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश के समान होगा।

मेघवाल ने कहा कि विधेयक में एक नया उपबंध जोड़ा गया है जिसके तहत सीईसी और निर्वाचन आयुक्तों को ड्यूटी करते समय कोई आदेश पारित करने पर अदालत में किसी तरह की कार्रवाई से संरक्षण प्राप्त होगा।

भाजपा के संजय जायसवाल ने विधेयक पर चर्चा में भाग लेते हुए कहा कि देश के संविधान की खूबसूरती है कि सभी अंगों के अधिकारों की अच्छी तरह व्याख्या की गई है।

उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त की नियुक्ति का विपक्षी दल ने अपनी सरकारों के समय दुरुपयोग किया है।

जायसवाल ने आरोप लगाया कि कांग्रेस कभी संवैधानिक संस्थाओं को आजादी के साथ नहीं रहने दे सकती।

उन्होंने कहा कि इस कानून के पारित होने से निर्वाचन आयोग को स्वतंत्रता से काम करने का वातावरण मिलेगा।

चर्चा में वाईएसआरसीपी की चिंता अनुराधा ने भी भाग लिया। उन्होंने विधेयक का समर्थन किया।

राज्यसभा ने गत 12 दिसंबर को विधेयक को पारित किया था।

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