देश की खबरें | कर्नाटक के सात जिलों में नये विश्वविद्यालय की स्थापना को राज्य विधानसभा में विधेयक पारित

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बेंगलुरु, 21 सितंबर कर्नाटक विधानसभा ने सात जिलों में नये विश्वविद्यालयों के गठन और मांड्या में एकात्मक विश्वविद्यालय के उन्नयन के लिए बुधवार को एक विधेयक पारित किया।

कर्नाटक के उच्च शिक्षा मंत्री सी एन अश्वथ नारायण ने राज्य में ऐसे संस्थानों के कामकाज में सुधार सुनिश्चित करने के लिए नया कानून लाने का वादा किया था।

कर्नाटक राज्य विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक, 2022 को सदन में चर्चा के बाद पारित किया गया। चर्चा के दौरान अध्यक्ष सहित विभिन्न दलों के सदस्यों ने राज्य में विश्वविद्यालयों की गुणवत्ता और कामकाज और कई में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं के बारे में चिंता व्यक्त की थी।

विधेयक के वित्तीय लेखाजोखा में कहा गया है कि नये विश्वविद्यालयों की स्थापना के संबंध में प्रत्येक विश्वविद्यालय के लिए 2 करोड़ रुपये के वार्षिक आवर्ती व्यय पर प्रति वर्ष लगभग 14 करोड़ रुपये खर्च होंगे।

नारायण ने कहा, ‘‘यह मांग और आकांक्षा है कि सभी जिलों में एक विश्वविद्यालय होना चाहिए और इस दिशा में एक कदम के रूप में सरकार सात जिलों - कोडागु, चामराजनगर, हासन, हावेरी, बीदर, कोप्पल और बागलकोट जिले में नये विश्वविद्यालय खोल रही है और मांड्या में हम मौजूदा विश्वविद्यालय का विस्तार करेंगे।’’

उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुसार हर जिले में कम से कम एक विश्वविद्यालय होना चाहिए जो वहां के युवाओं की शैक्षिक और कौशल संबंधी जरूरतों को पूरा कर सके। मंत्री ने कहा कि यह लंबे समय की मांग है और इसलिए मुख्यमंत्री ने कुछ जिलों के लिए बजट में घोषणा की थी और आने वाले दिनों में अन्य जिलों के लिए भी इस पर विचार किया जाएगा।

हस्तक्षेप करते हुए, अध्यक्ष विश्वेश्वर हेगड़े कागेरी ने मौजूदा विश्वविद्यालयों की गुणवत्ता और स्थिति के बारे में चिंता व्यक्त की और कहा कि सरकार को उनकी गुणवत्ता और बुनियादी ढांचे में सुधार पर भी ध्यान देना चाहिए।

विश्वविद्यालयों में गुणवत्ता और अन्य मुद्दों के बारे में अध्यक्ष और कई विधायकों द्वारा चिंता जताये जाने के बाद मंत्री ने कहा कि विश्वविद्यालयों को अद्यतन करने के लिए आवंटन में काफी वृद्धि की गई है।

उन्होंने कहा कि इसको देखते हुए कि कर्नाटक राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम को अस्तित्व में आए लगभग 22 साल हो चुके हैं, मौजूदा चुनौतियों से निपटने तथा जवाबदेही और सुधार लाने के लिए नए कानूनों को लागू करना होगा।

उन्होंने कहा, ‘‘हम नया कानून लाने के लिए कदम उठा रहे हैं, समिति का गठन किया गया है, जिसने रिपोर्ट जमा कर दी है और जनता की राय मांगी गई है, जिसका उद्देश्य भर्ती, प्रशासन, पारदर्शिता सुनिश्चित करना, जवाबदेही, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, कौशल विकास और एकीकरण से संबंधित सभी मुद्दों को संबोधित करना है। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक और निजी विश्वविद्यालयों के लिए कानून अलग-अलग होंगे।

इससे पहले, विधानसभा में कांग्रेस के उप नेता यू टी खादर ने सलाह दी थी कि सरकार को विश्वविद्यालयों में गुणवत्ता और मानकों को बनाए रखने के लिए नियम बनाने चाहिए।

जद (एस) के ए टी रामास्वामी जैसे कई विधायकों ने कहा कि जो लोग वास्तव में उच्च शिक्षा और छात्र समुदाय के भविष्य के बारे में चिंतित हैं, उन्हें कुलपति के रूप में नियुक्त किया जाना चाहिए।

कांग्रेस विधायक ईश्वर खांदरे और पी टी परमेश्वर नाइक ने विभिन्न मौजूदा विश्वविद्यालयों में बुनियादी ढांचे, सुविधाओं और संकाय की कमी की ओर इशारा करते हुए कहा, ‘‘जब राज्य ऐसा है, तो नये विश्वविद्यालयों की घोषणा करना केवल होठों पर घी लगाने जैसा होगा।’’

भाजपा विधायक अरविंद बेलाड ने सुझाव दिया कि विश्वविद्यालयों से भवन निर्माण और भर्ती की शक्तियां वापस ली जानी चाहिए, ताकि वे केवल शैक्षणिक गतिविधियों पर ध्यान केंद्रित कर सकें। उन्होंने कहा कि

साथ ही, प्रत्येक निजी विश्वविद्यालय की अपनी परीक्षा के बजाय एक सामान्य परीक्षा प्रणाली होनी चाहिए।

कांग्रेस विधायक कृष्णा बायरे गौड़ा ने कहा कि राज्य में वर्तमान में 27 विश्वविद्यालय हैं और उनमें से अधिकांश में सुविधाओं और गुणों की कमी है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए 100-150 करोड़ रुपये खर्च होंगे और इसके ऊपर वार्षिक लागत होगी, इसलिए नये विश्वविद्यालय पर सैकड़ों करोड़ रुपये खर्च होंगे।

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