बिलकीस बानो मामला: दोषियों को रिहा करने के लिए सिद्धरमैया ने अमित शाह से मांगा इस्तीफा

कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफे की मांग करते हुए कहा कि उनके कार्यालय ने बिलकीस बानो मामले के दोषियों को रिहा करने का आदेश दिया है.

अमित शाह (Photo Credits ANI)

बेंगलुरु, 18 अक्टूबर: कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफे की मांग करते हुए कहा कि उनके कार्यालय ने बिलकीस बानो मामले के दोषियों को रिहा करने का आदेश दिया है. कांग्रेस के दिग्गज नेता ने बिलकीस बानो मामले को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और विशेष रूप से अमित शाह की आलोचना करते हुए मंगलवार को कई ट्वीट किए.

सिद्धरमैया ने ट्वीट किया, “ केंद्रीय गृह मंत्रालय ने बिलकीस बानो मामले के दोषियों को रिहा करने का आदेश दिया है, इससे भाजपा के नेताओं की क्रूर मानसिकता उजागर होती है. उन्होंने इन अमानवीय गिद्धों को क्षमादान देकर पूरे देश को शर्मसार किया है. इसके लिए अमित शाह को अपने पद से इस्तीफा देकर पूरे देश से माफी मांगनी चाहिए.”

उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि भाजपा अपने राजनीतिक एजेंडे के लिए एक संवेदनशील मुद्दे का इस्तेमाल करना चाहती है. सिद्धरमैया ने कहा, “उन अमानवीय बलात्कारियों और हत्यारों की रिहाई गुजरात चुनाव से पहले मतदाताओं का ध्रुवीकरण करने की एक कोशिश है. भाजपा के लिए चुनाव इस देश की महिलाओं की सुरक्षा की चिंताओं से ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाते हैं.”

कांग्रेस नेता ने आश्चर्य जताया कि जब यह निर्णय लिया गया तो वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे सहित महिला सांसद कहां थीं. उन्होंने कहा, “अगर वे महिलाओं के लिए भी खड़ी नहीं हो सकती हैं, तो वे अपने पदों पर बने रहने के लिए अयोग्य हैं. क्या वे यह जानकर चैन की नींद सो सकती हैं कि बलात्कारियों को उनकी पार्टी ने राजनीतिक कारणों से रिहा किया है.”

सिद्धरमैया ने ट्वीट किया, “पूरे देश ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी मां के खूबसूरत बंधन को देखा है. लेकिन, नरेंद्र मोदी उस मां का दर्द क्यों नहीं देख पाए जिसने अपने नवजात और अजन्मे बच्चे को खो दिया. भाजपा सरकार के क्षमादान के इस अमानवीय निर्णय को भारत माफ नहीं करेगा.”

गोधरा में ट्रेन जलाए जाने की घटना के बाद गुजरात में भड़के सांप्रदायिक दंगों के समय बिलकीस बानो 21 साल की थीं और पांच महीने की गर्भवती थीं. इस दौरान उनके साथ सामूहिक बलात्कार किया गया था और तीन साल की बेटी सहित उनके परिवार के सात लोग मारे गए थे.

इस मामले में दोषी ठहराए गए 11 लोगों को 16 अगस्त को गोधरा उप-जेल से तब रिहा कर दिया गया था, जब गुजरात सरकार ने अपनी छूट नीति के तहत उनकी रिहाई की अनुमति दी थी. मुंबई स्थित सीबीआई की एक विशेष अदालत ने 21 जनवरी, 2008 को बिलकीस बानो से सामूहिक बलात्कार और उनके परिवार के सात सदस्यों की हत्या के मामले में 11 लोगों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी. बाद में, बंबई उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय ने उनकी सजा को बरकरार रखा था.

उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को कहा कि बिलकीस बानो सामूहिक बलात्कार मामले में 11 दोषियों को रिहा किए जाने को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर गुजरात सरकार का जवाब बहुत बोझिल है जिसमें कई फैसलों का हवाला दिया गया है लेकिन तथ्यात्मक बयान गुम हैं.

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