देश की खबरें | बिहार सरकार ने सुशांत मामले में सीबीआई जांच की सिफारिश की, रिया के वकील बोले- अधिकार क्षेत्र से परे
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पटना/मुंबई, चार अगस्त बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि राज्य सरकार ने सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले में मंगलवार को सीबीआई जांच की सिफारिश की है, जिसे अभिनेत्री रिया चक्रवर्ती के वकील ने चुनौती देते हुए कहा कि राज्य को इस तरह की सिफारिश करने का अधिकार नहीं है।
महाराष्ट्र सरकार के मंत्री आदित्य ठाकरे ने मंगलवार को कहा कि अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत मामले में उन्हें और उनके परिवार को बेवजह निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इस मामले से उनका कोई लेना-देना नहीं है।
नीतीश ने ट्वीट किया, ‘‘राज्य सरकार ने दिवंगत सुशांत सिंह राजपूत के पिता के के सिंह द्वारा दर्ज मामले में सीबीआई जांच के लिए अपनी सिफारिश भेजी है।’’
राजपूत की सनसनीखेज मौत के मामले में कानून के तहत जांच करने के अधिकार को लेकर पटना और मुंबई पुलिस के बीच खींचतान चल रही है। इस बीच नीतीश कुमार ने कहा था कि उनकी सरकार ने सुशांत के पिता की सहमति के बाद मामला केंद्रीय जांच एजेंसी को सौंपने का फैसला किया है।
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राजपूत के पिता ने पटना में 25 जुलाई को रिया चक्रवर्ती और उनके परिवार के अन्य सदस्यों के खिलाफ अभिनेता को खुदकुशी के लिए उकसाने के आरोप में शिकायत दर्ज कराई है।
नीतीश कुमार ने संवाददाताओं से कहा, “आज सुबह ही हमारे डीजीपी (गुप्तेश्वर पांडेय) से उनकी (के के सिंह) बातचीत हुई है और उन्होंने अपनी सहमति दे दी है, जिसकी सूचना डीजीपी ने दी तथा तुरंत सीबीआई जांच के लिए अनुशंसा यहां से जा रही है। सुशांत के पिता जी ने यहां प्राथमिकी दर्ज करायी थी, जिसके आधार पर बिहार पुलिस ने जांच का काम शुरू किया।’’
उन्होंने कहा, ‘‘अब उन्होंने स्वीकृति दे दी है तो मैंने डीजीपी से आज ही सारी औपचारिकताएं पूरी करने को कहा है और सरकार आज ही सिफारिशें भेज देगी।’’
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के पुत्र और शिवसेना नेता आदित्य ठाकरे ने कहा कि बॉलीवुड अभिनेता की मौत के बाद गंदी राजनीति हो रही है। उन्होंने किसी का नाम लिए बगैर कहा कि हताशा के कारण हो रहे राजनीतिक पेटदर्द के चलते आरोप लगाए जा रहे हैं।
उन्होंने ट्विटर पर मराठी में डाले गये एक बयान में कहा, ‘‘शिवसेना के संस्थापक हिंदू हृदय सम्राट दिवंगत बालासाहेब ठाकरे का पौत्र होने के नाते मैं कहना चाहता हूं कि मैं ऐसा कोई काम नहीं करुंगा जिससे महाराष्ट्र, शिवसेना और ठाकरे परिवार की छवि पर आंच आए।’’
आदित्य ठाकरे ने ट्विटर पर जारी बयान में कहा कि महाराष्ट्र सरकार कोविड-19 से निपटने के लिए हरसंभव प्रयास कर रही है और जो लोग संभवत: एमवीए (महाराष्ट्र विकास अघाडी) की लोकप्रियता से जल रहे हैं उन्होंने मौत के मामले में गंदी राजनीति शुरू कर दी है।
उन्होंने कहा कि किसी की मौत से फायदा उठाना मानवता पर धब्बा है। वास्तव में इस प्रकरण से उनका कोई लेना-देना नहीं है।
आदित्य ने कहा कि बॉलीवुड मुंबई का महत्पूर्ण हिस्सा है और रोजगार के लिए हजारों लोग फिल्म उद्योग पर निर्भर हैं।
वह जाहिर तौर पर सोशल मीडिया पर जारी उन पोस्ट से नाराज दिखे जिनमें एक कार में उनके रिया चक्रवर्ती के साथ बैठे होने की बात कही जा रही है। साथ ही वह भाजपा नेता और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री नारायण राणे की इस मांग से भी नाराज दिखे कि राजपूत मामले में जांच हत्या का मामला मानकर की जाए।
रिया चक्रवर्ती के वकील सतीश मानशिंदे ने एक बयान में कहा कि इस मामले का स्थानांतरण नहीं किया जा सकता है और इसमें बिहार पुलिस को शामिल करने का कोई कानूनी आधार नहीं है। ज्यादा से ज्यादा ‘‘जीरो एफआईआर’’ दर्ज होगी जो मुंबई पुलिस को स्थानांतरित की जाएगी।
उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों को सीबीआई को स्थानांतरित करने का कोई कानूनी आधार नहीं है, जिसमें उनका (बिहार पुलिस का) कोई अधिकार क्षेत्र नहीं हो।
उन्होंने कहा कि बिहार सरकार को एहसास हो रहा है कि उसके पास मामले की जांच करने का अधिकार नहीं है तो वह अब मामले को सीबीआई को सौंपने की सिफारिश करने का ‘‘अवैध तरीका’’ अपना रही है।
चक्रवर्ती ने उच्चतम न्यायालय में एक याचिका दायर करके दावा किया था कि बिहार पुलिस के पास मामले की जांच करने का अधिकार नहीं है, क्योंकि मुंबई पुलिस पहले ही दुर्घटनावश मौत की रिपोर्ट (एडीआर) दर्ज कर चुकी है।
राजपूत (34) 14 जून को बांद्रा स्थित अपने फ्लैट में फंदे से लटके मिले थे।
सीबीआई जांच की सिफारिश की नीतीश कुमार की घोषणा महाराष्ट्र में सत्तारूढ़ गठबंधन को भी रास नहीं आई जिसने दावा किया कि यह राज्य सरकार के अधिकार का अतिक्रमण करता है।
महाराष्ट्र के मंत्री एवं राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता नवाब मलिक ने कहा कि नीतीश कुमार की सरकार शायद सीबीआई जांच की सिफारिश करके कोविड-19 से निपटने में अपनी "नाकामी" से ध्यान हटाने की कोशिश कर रही है।
मलिक ने कहा कि बिहार सरकार का फैसला संघीय ढांचे को कमजोर कर रहा है।
मलिक ने कहा, ‘‘क्या महाराष्ट्र में हुए अपराध को लेकर उनका (बिहार सरकार का) कोई अधिकार-क्षेत्र है?’’
शिवसेना के नेतृत्व वाली महा विकास आघाडी सरकार में राकांपा दूसरा सबसे बड़ा घटक है। इसमें कांग्रेस भी साझेदार है।
महाराष्ट्र के गृह मंत्री एवं राकांपा के नेता अनिल देशमुख ने कहा था कि मामले में सीबीआई जांच की कोई जरूरत नहीं है, क्योंकि मुंबई पुलिस मामले से निपटने में सक्षम है।
मलिक ने कहा, ‘‘मिसाल के तौर पर, कल को मुंबई में रहने वाले किसी व्यक्ति के खिलाफ उत्तर प्रदेश में हुए अपराध के लिए मामला दर्ज किया जाता है तो क्या महाराष्ट्र सरकार भी मुंबई में मामला दर्ज करेगी और पुलिस उत्तर प्रदेश जांच के लिए जाएगी? यह सवाल अधिकार क्षेत्र का है।’’
उन्होंने कहा कि जिस तरह से बिहार सरकार व्यवहार कर रही है, उससे वह संकट पैदा कर रही है।
महाराष्ट्र कांग्रेस प्रवक्ता सचिन सावंत ने ट्वीट किया, ‘‘मोदी सरकार और भाजपा भारत में लोकतांत्रिक ढांचे को नष्ट कर रही है। यह देखकर दुख होता है कि भाजपा के गठबंधन साझेदार संविधान को नष्ट करने में उनकी मदद कर रहे हैं, जो राजनीतिक फायदे के लिए संघीय ढांचे को स्थायी रूप से चोट पहुंचाएगा। उम्मीद है कि अदालतें देश के लिए हमारी चिंता को साझा करेंगी।’’
बिहार के पुलिस महानिदेशक गुप्तेश्वर पांडेय ने राज्य सरकार के फैसले का बचाव करते हुए कहा, ‘‘मुंबई पुलिस 50 दिन से क्या कर रही थी। वे हमारी पुलिस के साथ सहयोग नहीं कर रहे। जब बिहार के गृह सचिव ने महाराष्ट्र के गृह सचिव को फोन किया तो उन्होंने जवाब नहीं दिया। संवाद के सभी माध्यम बंद कर दिये गये। हमें आपकी मंशा पर संदेह है।’’
उच्चतम न्यायालय मामले को मुंबई स्थानांतरित करने की रिया की याचिका पर कल सुनवाई कर सकता है।
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