देश की खबरें | भोपाल गैस त्रासदी:धार जिले के संयंत्र में यूनियन कार्बाइड फैक्टरी के कचरे को उतारा जा रहा है

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. भोपाल में बंद पड़ी यूनियन कार्बाइड फैक्टरी से कंटेनर ट्रकों में भरकर लाए गए 337 टन खतरनाक कचरे को मध्यप्रदेश के धार जिले के पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र में स्थित एक भस्मीकरण इकाई में उतारने की प्रक्रिया बृहस्पतिवार को शुरू हो गई। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी।

धार, 13 फरवरी भोपाल में बंद पड़ी यूनियन कार्बाइड फैक्टरी से कंटेनर ट्रकों में भरकर लाए गए 337 टन खतरनाक कचरे को मध्यप्रदेश के धार जिले के पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र में स्थित एक भस्मीकरण इकाई में उतारने की प्रक्रिया बृहस्पतिवार को शुरू हो गई। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि सभी सुरक्षा मानदंडों का पालन करते हुए दोपहर करीब तीन बजे यह प्रक्रिया स्थानीय प्रतिनिधियों और प्रशासन की मौजूदगी में शुरू की गई।

चालीस साल पहले भोपाल में हुई दुनिया की सबसे खराब औद्योगिक आपदा में यूनियन कार्बाइड के कीटनाशक संयंत्र से अत्यधिक जहरीली गैस लीक हुई थी।

अधिकारी ने बताया कि अभी यहां केवल रासायनिक कचरे से भरे कंटेनरों को खाली ही किया जा रहा है और तत्काल कोई जलाने की प्रक्रिया नहीं की जा रही है।

जनवरी में धार जिला मुख्यालय से करीब 50 किलोमीटर दूर पीथमपुर में विरोध प्रदर्शन हुए थे, जब कचरे को भस्मीकरण के लिए एक निजी संयंत्र में लाया गया था। इस कदम का विरोध करने वालों ने दावा किया कि इससे स्थानीय निवासियों के स्वास्थ्य और पर्यावरण को नुकसान पहुंचेगा।

पीथमपुर के एसडीएम प्रमोद सिंह गूजर ने एक ‘ऑडियो और विजुअल क्लिप’ में कहा, ‘‘हम स्थानीय प्रतिनिधियों को रामकी संयंत्र में लेकर आए हैं, जहां कंटेनर खड़े हैं। सभी सुरक्षा नियमों का पालन करते हुए ट्रकों से कचरा उतारा जा रहा है।’’

गूजर ने कहा,‘‘जलाने की प्रक्रिया शुरू होने के दावे गलत हैं। कोई गलत सूचना या झूठी अफवाह नहीं फैलाई जानी चाहिए। सभी प्रतिनिधियों की मौजूदगी में ट्रकों से कचरा उतारा जा रहा है और यूनिट में आगे कोई गतिविधि नहीं हो रही है।’’

बुधवार को धार जिले में कचरे के निपटान के विरोध में लोगों के एक समूह ने शवासन किया था।

राज्य सरकार के अनुसार, धार से लगभग 250 किलोमीटर दूर भोपाल में यूनियन कार्बाइड कारखाने से ले जाए जाने वाले कचरे में मिट्टी, रिएक्टर अवशेष, सेविन (कीटनाशक) अवशेष, नेफ्थॉल और अर्ध-प्रसंस्कृत अवशेष शामिल हैं।

मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने कहा है कि वैज्ञानिक साक्ष्यों से पता चलता है कि कचरे में सेविन और नेफ्थॉल के रासायनिक प्रभाव अब "शून्य" हो गए हैं।

विरोध प्रदर्शन के बाद, स्थानीय प्रशासन ने कचरे के निपटान के बारे में आशंकाओं को दूर करने के लिए एक गहन जन जागरूकता अभियान चलाया है।

कचरे को औद्योगिक शहर में ले जाने के बाद से ही पीथमपुर में रुक-रुक कर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं।

पीथमपुर बचाओ समिति, पीथमपुर रक्षा समिति के सदस्यों और योग विशेषज्ञ प्रदीप दुबे समेत एक दर्जन लोगों ने बुधवार को अपने विरोध प्रदर्शन के तहत दोपहर करीब 12 बजे पीथमपुर बस स्टैंड पर "शवासन" किया।

सन् 1984 में दो और तीन दिसंबर की मध्यरात्रि में भोपाल स्थित यूनियन कार्बाइड कारखाने से अत्यधिक जहरीली मिथाइल आइसोसाइनेट गैस (एमआईसी) लीक हुई थी, जिससे कम से कम 5,479 लोगों की मौत हो गई थी तथा हजारों लोग गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं और दीर्घकालिक विकलांगताओं से ग्रस्त हो गए।

दिमो

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