गोलाघाट (असम), 14 जनवरी काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान में लागू निषेधाज्ञा और वहां स्थित ‘बील्स’ (प्राकृतिक जलाशयों) से मछली पकड़ने पर विशेष तौर पर लगी रोक का उल्लंघन कर लोगों ने शनिवार को भोगाली बिहू उत्सव के तहत मछली पकड़ने की कोशिश की। पुलिस ने यह जानकारी दी।
पुलिस अधिकारी ने बताया कि जानकारी मिलने पर पुलिस और वन अधिकारी मौके पर पहुंचे और भीड़ को तितर-बितर किया। उन्होंने बताया कि लोगों ने राष्ट्रीय उद्यान जाने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 715 को बाधित करने की कोशिश की।
उल्लेखनीय है कि गोलाघाट जिले के जिलाधिकारी पी उदय ने मंगलवार को भारतीय दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा- 144 के तहत निषेधाज्ञा लागू की थी जिसके तहत जिले के अंतर्गत पड़ने वाले काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान में ‘गैर कानूनी तरीके से प्रवेश, बील्स, नदियों और दलदली इलाकों में मछली पकड़ने पर तत्काल प्रभाव से रोक लग गई थी।
उद्यान के आसपास रहने वाले लोगों ने मांग की थी कि उन्हें काजीरंगा के बील्स से माघ बिहू के ‘उरुका’ भोज के लिए मछली पकड़ने की अनुमति दी जाए क्योंकि यह उनकी पंरपरा है।
अधिकारी ने बताया, ‘‘सैकड़ों की संख्या में लोग भूरापहाड़ रेंज के तहत दिउसर जंगल शिविर के नजदीक सुबह से ही सामुदायिक रूप से मछली पकड़ने के लिए जमा हो गए थे। उन्हें उद्यान के बाहर मौजूद बील्स से मछली पकड़ने की अनुमति दी गई लेकिन जल्द उन्होंने उद्यान के भीतर प्रवेश करने की कोशिश की।’’
उन्होंने बताया कि वन कर्मियों ने लोगों को उद्यान में दाखिल होने से रोकने की कोशिश की जिसे लेकर दोनों पक्षों के बीच धक्का मुक्की हुई और लोगों ने राजमार्ग बाधित करने की कोशिश की, लेकिन वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रण में किया और लोगों को शांतिपूर्ण तरीके से तितर-बितर कर दिया।
गौरतलब है कि 430 वर्ग किलोमीटर फैला काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान यूनेस्को की विश्व विरासत सूची में शामिल है और एक सींग वाले गैंडे के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है।
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