जरुरी जानकारी | भारतमाला परियोजना में छह साल की देगी, लागत भी बढ़कर दोगुना हुई : रिपोर्ट

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मुंबई, 18 जुलाई भूमि अधिग्रहण में समस्याओं के बीच महत्वाकांक्षी भारतमाला परियोजना छह साल की देरी के बाद वित्त वर्ष 2027-28 तक पूरी होने की उम्मीद है। हालांकि, इसके लिये जरूरी है कि काम की मौजूदा गति बरकरार रहे।

रेटिंग एजेंसी इक्रा ने एक रिपोर्ट में कहा कि परियोजना को 2021-22 तक पूरा करने का लक्ष्य था, जिसमें पहले ही विलंब हो चुका है। इसके कारण लागत 99 प्रतिशत बढ़कर 10.63 लाख करोड़ रुपये पहुंच गयी है। इतना ही नहीं कच्चे माल की लागत और जमीन के मूल्य में वृद्धि को देखते हुए इसमें 15-20 प्रतिशत का और इजाफा हो सकता है।

रिपोर्ट के अनुसार, पिछले सात साल के दौरान कुल 34,800 किलोमीटर राजमार्ग में से केवल 60 प्रतिशत यानी 20,632 किलोमीटर का आवंटन दिसंबर, 2021 तक किया जा सका। जबकि परियोजना का 23 प्रतिशत हिस्सा मार्च, 2022 तक पूरा हो गया।

परियोजना में देरी का कारण जमीन अधिग्रहण को लेकर समस्या, जमीन अधिग्रहण लागत में उल्लेखनीय वृद्धि तथा महामारी है। साथ ही भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण को अतिरिक्त कर्ज के जरिये कोष जुटाने पर भी ध्यान देना होगा।

केंद्रीय सड़क, परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने पिछले सप्ताह संकेत दिया था कि वह राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण को कोष के लिये बाजार का रास्ता अपनाने की अनुमति देने को तैयार हैं।

क्रिसिल ने कहा कि परियोजना का आवंटन वित्त वर्ष 2023-24 तक पूरा होने की उम्मीद है। इसमें यह माना गया है कि एनएचएआई चालू वित्त वर्ष 2022-23 में 6,000 से 6,500 किलोमीटर परियोजनाओं का आवंटन करेगा। हालांकि, वित्त वर्ष 2023-24 में परियोजनाओं के आवंटन में कमी से यह कार्य 2024-25 तक पूरा होगा। चुनावी वर्ष 2018-19 में परियोजनाओं के आवंटन में विलंब देखा गया था।

रिपोर्ट के अनुसार, अगर यह मान लिया जाए कि वित्त वर्ष 2022-23 से सालाना 4,500 से 5,000 किलोमीटर का क्रियान्वयन होगा, ऐसे में परियोजना 2027-28 तक पूरी होने की उम्मीद है। यानी इसमें शुरुआती लक्ष्य 2021-22 के मुकाबले छह साल की देरी होगी।

भारतमाला परियोजना की घोषणा जुलाई 2015 में की गयी थी। इसमें 24,800 किलोमीटर का राष्ट्रीय राजमार्ग तथा पूर्ववर्ती राष्ट्रीय राजमार्ग विकास कार्यक्रम के तहत लंबित 10,000 किलोमीटर राजमार्गों का विकास शामिल है। इसपर 5.35 लाख करोड़ रुपये की लागत आने का अनुमान रखा गया था। इससे खर्च 15.52 करोड़ रुपये प्रति किलोमीटर बैठता है।

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