देश की खबरें | उत्तर प्रदेश में सरकारी स्कूलों के 'विलय' के फैसले से बेहतर की 'उम्मीद' और 'चुनौतियों का पहाड़' भी
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लखनऊ, 13 जुलाई उत्तर प्रदेश में सरकारी स्कूलों के विलय के फैसले से बेहतर की ‘‘उम्मीद’’ के साथ ही कई तरह की ‘‘चुनौतियों का पहाड़’’ भी है।
प्रदेश राजधानी लखनऊ के बाहरी इलाके काकोरी ब्लॉक के एक सरकारी प्राथमिक विद्यालय में कक्षा दो में पढ़ने वाले आठ वर्षीय छात्र अमित को अब तक स्कूल जाने के लिए सिर्फ 200 मीटर की दूरी तय करनी पड़ती थी लेकिन सरकार द्वारा स्कूलों के विलय करने के फैसले से अब उसकी दिनचर्या में ‘‘चुनौतियों का पहाड़’’ खड़ा होने का अंदेशा दिखने लगा है।
वहीं, सरकारी तंत्र को शिक्षा में बदलाव और बेहतरी की उम्मीद दिख रही है।
एक अधिकारी के अनुसार, यह बदलाव उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा कम नामांकन वाले स्कूलों को दूसरे स्कूलों में विलय करने की एक व्यापक पहल का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य संसाधनों का बेहतर उपयोग करना, बुनियादी ढांचे में सुधार करना और राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के लक्ष्यों के साथ तालमेल बिठाना है।
स्कूलों के विलय की इस प्रक्रिया का उद्देश्य 50 से कम छात्रों वाले स्कूलों को आस-पास के संस्थानों में विलय करके एक अधिक सुदृढ़ शिक्षण वातावरण तैयार करना है।
दूसरी कक्षा में पढ़ने वाले अमित के स्कूल का कई अन्य विद्यालयों की तरह विलय होना तय है, इसलिए अब उसे दो किलोमीटर की दूरी तय करनी होगी क्योंकि उसके स्कूल का विलय पड़ोसी गांव के दूसरे स्कूल के साथ किया जाएगा।
छोटे बालक अमित के लिए उसके नये स्कूल की दो किलोमीटर की यात्रा एक नयी चुनौती होगी।
हल्की मुस्कान के साथ अमित ने कहा, ‘‘अब मुझे स्कूल जाने के लिए अपने पिता पर निर्भर रहना होगा ताकि वह मुझे साइकिल पर स्कूल ले जाएं। अब दिक्कत यह होगी कि यह जरूरी नहीं है कि स्कूल जाने और आने के समय पिता उपलब्ध हों जबकि अब तक मैं बस्ता उठाकर खुद ही पास के स्कूल चला जाता था।’’
अधिकारियों के मुताबिक, उच्च न्यायालय द्वारा कम नामांकन वाले स्कूलों के दूसरे स्कूलों में विलय करने के सरकारी फैसले को बहाल रखने से राज्य भर के 1.3 लाख सरकारी प्राथमिक विद्यालयों में से 10,000 के लिए यह प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने हाल ही में एक फैसले में 16 जून और 24 जून, 2025 के सरकारी आदेशों को चुनौती देने वाली कई याचिकाओं को खारिज कर दिया।
याचिकाकर्ताओं ने दावा किया था कि स्कूलों के विलय की प्रक्रिया के कारण बच्चों को एक किलोमीटर से ज्यादा पैदल चलकर स्कूल जाना पड़ेगा, जो कथित तौर पर संविधान के अनुच्छेद 21 ए और बच्चों के मुफ्त एवं अनिवार्य शिक्षा के अधिकार अधिनियम (आरटीई), 2009 का उल्लंघन है।
बेसिक शिक्षा के अपर मुख्य सचिव (एसीएस) दीपक कुमार ने ‘पीटीआई-’ को बताया, ‘‘इसका मुख्य उद्देश्य शिक्षण कर्मचारियों, बुनियादी ढांचे और अन्य शैक्षिक संसाधनों को एकीकृत करना है।’’
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(The above story first appeared on LatestLY on Jul 13, 2025 03:26 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

