देश की खबरें | बंगाल : बेरोजगार हुए ‘बेदाग’ शिक्षक न्यायालय के आदेश से असंतुष्ट

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. बड़े पैमाने पर भर्ती प्रक्रिया में अनियमितता की वजह से उच्चतम न्यायालय द्वारा बर्खास्त किये गए पश्चिम बंगाल के सरकार-संचालित एवं उसके वित्त-पोषित विद्यालयों के शिक्षकों ने शीर्ष अदालत की ओर से उनकी सेवा को अस्थायी रूप से विस्तारित किये जाने को बृहस्पतिवार को ‘अल्पकालिक राहत’ करार देते हुए असंतोष जताया।

कोलकाता, 17 अप्रैल बड़े पैमाने पर भर्ती प्रक्रिया में अनियमितता की वजह से उच्चतम न्यायालय द्वारा बर्खास्त किये गए पश्चिम बंगाल के सरकार-संचालित एवं उसके वित्त-पोषित विद्यालयों के शिक्षकों ने शीर्ष अदालत की ओर से उनकी सेवा को अस्थायी रूप से विस्तारित किये जाने को बृहस्पतिवार को ‘अल्पकालिक राहत’ करार देते हुए असंतोष जताया।

हालांकि, पश्चिम बंगाल के शिक्षा मंत्री ब्रत्य बसु ने उनसे चिंता न करने का आग्रह किया तथा चल रही कानूनी लड़ाई में राज्य सरकार की ओर से पूरा समर्थन करने के वादे को दोहराया।

न्यायालय ने बृहस्पतिवार को सीबीआई द्वारा बेदाग पाए गए बर्खास्त शिक्षकों की सेवाएं 31 दिसंबर तक बढ़ा दीं।

प्रधान न्यायाधीश संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति संजय कुमार की पीठ ने राज्य सरकार की इस दलील पर विचार किया कि इन बर्खास्तगी से विभिन्न सरकारी और सहायता प्राप्त विद्यालयों में शिक्षण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है।

यह आदेश राज्य सरकार की याचिका पर आया, जिसने तीन अप्रैल के फैसले के बाद अदालत का रुख किया था। शीर्ष अदालत के फैसले में विभिन्न विद्यालयों में 25,753 शिक्षकों और कर्मचारियों की नियुक्ति को अमान्य करार दिया गया और पूरी चयन प्रक्रिया को ‘‘दूषित और दागदार’’ करार दिया गया।

शीर्ष अदालत ने बृहस्पतिवार को राज्य सरकार को 31 मई तक नयी भर्ती प्रक्रिया शुरू करने और 31 दिसंबर तक इसे पूरा करने का निर्देश दिया।

न्यायालय ने पश्चिम बंगाल स्कूल सेवा आयोग (डब्ल्यूबीएसएससी) और राज्य सरकार को तय समय सीमा तक भर्ती प्रक्रिया शुरू करने का विवरण देते हुए अनुपालन हलफनामा दायर करने का भी निर्देश दिया।

उच्चतम न्यायालय के आदेश पर खुशी जताते हुए शिक्षा मंत्री ब्रत्य बसु ने बेरोजगार ‘‘पात्र’’ शिक्षकों से चिंता न करने को कहा, क्योंकि न्यायालय ने पश्चिम बंगाल माध्यमिक शिक्षा बोर्ड द्वारा उठाए गए इस बिंदु को स्वीकार किया है कि हजारों ‘बेदाग’ शिक्षकों की नौकरियों को अमान्य घोषित करने से राज्य द्वारा संचालित और राज्य से सहायता प्राप्त स्कूलों का शैक्षणिक कामकाज बुरी तरह से बाधित होगा।

हालांकि, बेरोजगार हुए पात्र शिक्षकों ने जोर देकर कहा कि केवल स्थायी बहाली से ही उन्हें न्याय मिलेगा।

साल 2016 में जारी विज्ञापन में एसएससी के जरिये भर्ती हुए और अब अदालत के फैसले की वजह से बेरोजगार हुए करीब 26,000 शिक्षक और शिक्षणेतर कर्मचारियों में शामिल पंकज रॉय ने ‘पीटीआई-’ से बातचीत में कहा, ‘‘माननीय उच्चतम न्यायालय के प्रति पूरे सम्मान के साथ, आइए हम उस आदेश पर अपना असंतोष व्यक्त करें, जिसने हमें केवल 31 दिसंबर तक कक्षाओं में पढ़ाने की अनुमति दी है।’’

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