विदेश की खबरें | बेसिक देशों ने अमीर राष्ट्रों से जलवायु वित्त की अपनी प्रतिबद्धताओं का सम्मान करने को कहा

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श्रीलंका के प्रधानमंत्री दिनेश गुणवर्धने

बाकू, 14 नवंबर भारत सहित ‘बेसिक’ देशों ने विकसित राष्ट्रों से जलवायु वित्त प्रदान करने के लिए अपनी प्रतिबद्धताओं का सम्मान करने को कहा है और यहां जारी सीओपी29 में वार्ता के दौरान अमीर देशों द्वारा अपने वित्तीय दायित्वों को दूसरे पर डालने के प्रयासों को खारिज कर दिया।

वार्षिक जलवायु परिवर्तन सम्मेलन बृहस्पतिवार को चौथे दिन भी जारी रहा। इसमें ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका, भारत और चीन (बेसिक) ने पेरिस समझौता 2015 के पूर्ण व प्रभावी क्रियान्वयन की जरूरत को दोहराया। यह एक कानूनन बाध्यकारी अंतरराष्ट्रीय संधि है।

पेरिस समझौते का उद्देश्य वैश्विक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में पर्याप्त कमी लाना है, ताकि वैश्विक तापमान वृद्धि को 2 डिग्री सेल्सियस से नीचे रखा जा सके तथा इसे पूर्व-औद्योगिक स्तर (आधार वर्ष 1850-1900) से 1.5 डिग्री सेल्सियस अधिक तक सीमित रखने के प्रयासों को जारी रखा जा सके।

भारत, मिस्र और लैटिन अमेरिका तथा कैरिबियाई देशों के गठबंधन (एआईएलएसी) ने भी वित्तीय प्रतिबद्धताओं को बाध्यकारी समझौतों में परिवर्तित करने के लिए स्पष्ट राह बनाने का आह्वान किया।

संयुक्त राष्ट्र जलवायु सम्मेलन सीओपी29 में बुधवार और बृहस्पतिवार को हुई वार्ता के दौरान, जी-77/चीन समूह, जिसमें भारत भी शामिल है, ने जलवायु वित्त पर एक संतुलित नए सामूहिक लक्ष्य (एनसीक्यूजी) का आह्वान किया, जो विकासशील देशों की आवश्यकताओं के प्रति उत्तरदायी हो।

समूह ने वित्तीय तंत्र द्वारा समर्थित प्रौद्योगिकी कार्यान्वयन कार्यक्रम की भी मांग की।

विकसित देशों ने वैश्विक जलवायु लक्ष्य को बढ़ाने के महत्व पर जोर दिया है और उभरती अर्थव्यवस्थाओं सहित सभी देशों से अपने ‘नेट जीरो’ लक्ष्यों और कार्यान्वयन प्रयासों को बढ़ाने का आह्वान किया है।

‘नेट जीरो’ से तात्पर्य उत्सर्जित ग्रीनहाउस गैस की मात्रा और वायुमंडल से हटाई गई इसकी मात्रा के बीच संतुलन से है।

हालांकि, इन अमीर देशों को अपनी प्रतिबद्धताओं को पूर्ण रूप से पूरा न करने के लिए आलोचना का सामना करना पड़ रहा है, खासकर जलवायु वित्त और विकासशील देशों के लिए समर्थन के मामले में।

इसके जवाब में, भारत ने ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका और चीन के साथ मिलकर बेसिक समूह के हिस्से के रूप में पेरिस समझौते के पूर्ण और प्रभावी कार्यान्वयन की आवश्यकता दोहराई।

कई वार्ताकारों ने पीटीआई- से पुष्टि की, ‘‘बेसिक समूह ने विकसित देशों द्वारा अपनी वित्तीय जिम्मेदारियों को दूसरे पर डालने के प्रयासों को अस्वीकार कर दिया।’’

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