देश की खबरें | दिवाली के दौरान आतिशबाजी पर पाबंदी से वायु गुणवत्ता सुधरी: शोधकर्ता

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नयी दिल्ली, 29 जुलाई अनुसंधानकर्ताओं ने कहा है कि दिवाली के दौरान आतिशबाजी पर पाबंदी की नीति गंगा के मैदानी इलाकों के सभी राज्यों में वायु गुणवत्ता सुधारने में काफी असरदार साबित हुई।

चंडीगढ़ में पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (पीजीआईएमईआर) और पंजाब विश्वविद्यालय (पीयू) के शोधकर्ताओं ने एक बयान में कहा कि वर्ष 2020 के दिवाली त्योहार के दौरान गंगा के मैदानी इलाकों के राज्यों की वायु गुणवत्ता में सुधार के लिए लागू की गई नीति के रूप में आतिशबाजी पर प्रतिबंध बहुत प्रभावी साबित हुआ।

अध्ययन में पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल समेत अन्य प्रमुख राज्यों को शामिल किया गया। यह क्षेत्र अपनी खराब वायु गुणवत्ता के लिए जाना जाता है, खासकर अक्टूबर और नवंबर में पंजाब-हरियाणा में पराली जलाने से गंगा के मैदानी इलाकों की वायु गुणवत्ता बिगड़ती है।

शोधकर्ताओं में से एक सुमन मोर ने कहा कि उन्होंने वर्ष 2017 से 2020 तक दिवाली के दौरान इन सभी राज्यों की वायु गुणवत्ता का आकलन किया और पाया कि पटाखे फोड़ने से हवा की गुणवत्ता खराब होती है। सबसे खराब वायु गुणवत्ता दिल्ली, पंजाब और उत्तर प्रदेश में देखी गई।

मोर ने कहा, ‘‘पटाखे जलाने से दिवाली की रात और अगले कुछ दिनों में पीएम-2.5, सल्फर डाइऑक्साइड और प्रदूषण बढ़ाने वाले अन्य तत्वों की सांद्रता सुरक्षित मानक से ऊपर चली जाती है।’’

शोधकर्ताओं ने इस बात पर प्रकाश डाला कि वर्ष 2017-2019 की औसत वृद्धि दर की तुलना में 2020 में दिवाली की रात में पीएम-2.5 और सल्फर डाइऑक्साइड की वृद्धि दर लगभग 42 प्रतिशत और 67 प्रतिशत कम हो गई। शोधकर्ताओं ने कहा कि दिवाली की रात ओजोन में कोई उल्लेखनीय वृद्धि नहीं हुई, जो इस धारणा के खिलाफ है कि आतिशबाजी से ओजोन का उत्सर्जन होता है।

पंजाब विश्वविद्यालय में पर्यावरण अध्ययन विभाग के एक अनुसंधानकर्ता साहिल ने कहा कि विभिन्न राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा स्थापित निरंतर वायु गुणवत्ता निगरानी स्टेशन के डेटा का उपयोग दिवाली के दौरान आतिशबाजी पर लगे प्रतिबंध के प्रभाव के आकलन के लिए किया गया था।

पीजीआईएमईआर में पर्यावरणीय स्वास्थ्य के प्रोफेसर रवींद्र खैवाल ने कहा, ‘‘हमने दिवाली के दौरान सभी राज्यों में पराली जलाने की घटनाओं पर भी नजर रखी और पाया कि सबसे ज्यादा पराली जलाने की घटना पंजाब में हुई, इसके बाद हरियाणा, उत्तर प्रदेश और बिहार का स्थान आता है।’’ उन्होंने कहा कि जब पंजाब-हरियाणा में पराली जलाने की घटनाएं चरम पर होती हैं, तो सभी राज्यों में वायु गुणवत्ता की गंभीर स्थिति देखी जा सकती है।

खैवाल ने जोर देकर कहा कि वर्ष 2017 से दिल्ली में दिवाली पर आतिशबाजी पर प्रतिबंध लगाया गया, लेकिन इसका नगण्य सकारात्मक प्रभाव पड़ा, लेकिन वर्ष 2020 में जब गंगा के मैदानी इलाकों के सभी राज्यों ने दिवाली पर आतिशबाजी प्रतिबंध की नीति लागू की, तो इसका हवा की गुणवत्ता पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा।

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