नयी दिल्ली, चार अगस्त वित्त मंत्रालय ने मंगलवार को कहा कि बैंकों ने एमएसएमई क्षेत्र के लिए तीन लाख करोड़ रुपये की आपातकालीन ऋण सुविधा गारंटी योजना (ईसीएलजीएस) के तहत लगभग 1,37,586 करोड़ रुपये के कर्ज मंजूर किये हैं।
कोविड-19 महामारी के चलते आई आर्थिक मंदी के दौरान एमएसएमई क्षेत्र की मदद के लिए सरकार की तरफ से इस योजना की शुरुआत की गई है।
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योजना के तहत सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को तीन अगस्त तक 92,090.24 करोड़ रुपये का कर्ज वितरित भी किया जा चुका है।
यह योजना सरकार द्वारा कोविड-19 के प्रकोप से निपटने के लिए घोषित 20.97 लाख करोड़ रुपये के आर्थिक पैकेज का एक अहम हिस्सा है।
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वित्त मंत्री ने ट्वीट कर कहा, ‘‘तीन अगस्त 2020 तक, 100 प्रतिशत आपातकालीन ऋण गारंटी योजना के तहत सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और निजी बैंकों द्वारा कुल 1,37,586.54 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए है, जिसमें से 92,090.24 करोड़ रुपये वितरित भी किये जा चुके हैं।’’
उन्होंने कहा कि इस आपात रिण सुविधा गारंटी योजना के तहत तीन अगस्त तक सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों द्वारा स्वीकृत ऋण राशि 72,820.26 करोड़ रुपये थी, जिसमें से 52,013.73 करोड़ रुपये बांटे जा चुके हैं।
निजी क्षेत्र के बैंकों ने तीन अगस्त तक 64,766 करोड़ रुपये के कर्ज को मंजूरी दी गई जिसमें से 40,076 करोड़ रुपये की राशि वितरित कर दी गई।
इससे पहले सरकार ने बीते शनिवार को इस योजना के दायरे को बढ़ाते हुए इसके दायरे में व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए चिकित्सकों, वकीलों और चार्टर्ड एकाउंटेंट जैसे पेशेवरों को दिए व्यक्तिगत ऋणों को इसमें शामिल किया है।
योजना के तहत अब 250 करोड़ रुपये कारोबार करने वाली कंपनियां भी आयेंगी। पहले इसमें अधिकतम 100 करोड़ रुपये तक कारोबार करने वाली कंपनियों को ही यह सुविधा देने की घोषणा की गई थी। इसके साथ ही योजना के तहत वित्तपोषण की राशि को दुगुना कर 10 करोड़ रुपये तक कर दिया गया है।
आपातकालीन ऋण गारंटी योजना में (ईसीएलजीएस) में बदलाव श्रमिक संगठनों की मांगों और जून में केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा मंजूर की गई एमएसएमई की नई परि के आधार पर किया गया।
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