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जरुरी जानकारी | बैंक कर्मचारियों को ‘कोरोना योद्धा’ का दर्जा, 50 लाख रुपये की बीमा सुरक्षा मिलनी चाहिये: संगठन

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. बैंक कर्मचारियों के एक संगठन ने बैंक कर्मियों को भी ‘कोरोना योद्धा’ का दर्जा देने और 50 लाख रुपये की बीमा सुरक्षा देने की मांग की है। संगठन का कहना है कि बैंक कर्मचारी भी डॉक्टर, पुलिस और पैरा मेडिकल स्टाफ की तरह देशभर में अनिवार्य सेवाएं मुहैया करा रहे हैं।

जरुरी जानकारी | बैंक कर्मचारियों को ‘कोरोना योद्धा’ का दर्जा, 50 लाख रुपये की बीमा सुरक्षा मिलनी चाहिये: संगठन

नयी दिल्ली, 10 जुलाई बैंक कर्मचारियों के एक संगठन ने बैंक कर्मियों को भी ‘कोरोना योद्धा’ का दर्जा देने और 50 लाख रुपये की बीमा सुरक्षा देने की मांग की है। संगठन का कहना है कि बैंक कर्मचारी भी डॉक्टर, पुलिस और पैरा मेडिकल स्टाफ की तरह देशभर में अनिवार्य सेवाएं मुहैया करा रहे हैं।

भारतीय मजदूर संघ के समर्थन वाले ‘दिल्ली प्रदेश बैंक कर्मचारी संगठन’ (डीपीबीडब्ल्यूओ) ने बुधवार को एक बयान में कहा कि कोविड-19 संकट के दौरान बैंक कर्मचारियों ने देशभर में लोगों तक विभिन्न बैंकिंग सेवाएं पहुंचाने में अहम भूमिका अदा की है। इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री जन-धन योजना (पीएमजेडीवाई) में पंजीकृत महिलाओं के खाते, पेंशनभोगियों, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के लाभार्थियों और लघु एवं मध्यम उद्योगों (एमएसएमई) को ऋण सुविधा पहुंचाने में सरकार की मदद की है। फिर भी उन्हें ‘कोरोना योद्धा’ का दर्जा नहीं दिया गया जैसा कि डॉक्टरों, पुलिस और पैरा मेडिकल कर्मचारियों को दिया गया।

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डीपीबीडब्ल्यूओ के महासचिव ने बयान में कहा कि सरकार बैंक कर्मचारियों के साथ सौतेले बच्चों की तरह व्यवहार कर रही है। कोरोना योद्धाओं को कोविड-19 की वजह से दुर्भाग्यपूर्ण घटना की स्थिति में 50 लाख रुपये की बीमा सुरक्षा मुहैया करायी जा रही है।

डीपीबीडब्ल्यूओ ने बैंक कर्मचारियों को भी ‘कोरोना योद्धा’ का दर्जा देने और 50 लाख रुपये की बीमा सुरक्षा देने की मांग की है। इसके अलावा बैंक कर्मचारी के कोविड-19 से संक्रमित होने पर अस्पताल का पूरा खर्चा बैंक द्वारा उठाने, बैंकों में रोजाना सेनिटाईजेशन करवाने, संक्रमण से सुरक्षा के सभी उपकरण उपलब्ध कराने एवं उपाय करने, दिव्यांग, गर्भवती महिलाओं, बीमार और बड़ी उम्र के बैंक कर्मियों को बैंक शाखा आने के मामले में पूरी तरह से छूट होनी चाहिये और बैंकों में लोगों की भीड़भाड़ कम करने के लिए दिशानिर्देश जारी करने की भी मांग रखी है।

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डीपीबीडब्ल्यूओ ने कहा कि नोटबंदी के दौरान भी दिन-रात काम करने के बावजूद बैंक कर्मियों को कोई विशेष प्रोत्साहन नहीं दिया गया। साथ ही बैंक कर्मचारियों के साथ हुआ वेतन समझौता एक नवंबर 2017 से लंबित है। कोविड-19 संकट के दौरान बैंकिंग सेवाएं देते हुए 1,500 से अधिक कर्मचारी इससे संक्रमित हो चुके हैं जबकि 50 से अधिक कर्मियों की मौत हो चुकी है।

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(The above story first appeared on LatestLY on Jul 10, 2020 08:19 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).