देश की खबरें | बांग्लादेश ने ममता की ‘शरण’ संबंधी टिप्पणी पर आपत्ति जताते हुए भारत को पत्र भेजा
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. भारत ने बृहस्पतिवार को इस बात की पुष्टि की कि उसे बांग्लादेश से एक पत्र प्राप्त हुआ है जिसमें हिंसा प्रभावित लोगों को ‘शरण’ देने संबंधी पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की टिप्पणी पर आपत्ति जताई गई है।
नयी दिल्ली, 25 जुलाई भारत ने बृहस्पतिवार को इस बात की पुष्टि की कि उसे बांग्लादेश से एक पत्र प्राप्त हुआ है जिसमें हिंसा प्रभावित लोगों को ‘शरण’ देने संबंधी पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की टिप्पणी पर आपत्ति जताई गई है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बनर्जी की टिप्पणियों को अस्वीकार करते हुए कहा कि किसी विदेशी देश के साथ संबंधों का मामला केंद्र सरकार का एकमात्र विशेषाधिकार है।
बनर्जी ने कोलकाता में एक सार्वजनिक कार्यक्रम में अपने संबोधन में हिंसा प्रभावित बांग्लादेश का जिक्र करते हुए कहा था कि वह पड़ोसी देश से संकट में फंसे लोगों के लिए पश्चिम बंगाल के दरवाजे खुले रखेंगी और उन्हें शरण देंगी।
बांग्लादेशी मीडिया में ऐसी खबरें थीं कि ढाका ने राजनयिक माध्यमों से पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री की टिप्पणियों पर अपनी नाराजगी नयी दिल्ली को बता दी है।
जायसवाल ने अपनी साप्ताहिक प्रेस वार्ता के दौरान एक सवाल का जवाब देते हुए कहा, ‘‘मैं पुष्टि कर सकता हूं कि हमें बांग्लादेश की ओर से ऐसा संदेश प्राप्त हुआ है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘मैं इस बात पर जोर देना चाहूंगा कि हमारे संविधान की सातवीं अनुसूची - सूची एक - संघ सूची - मद 10 के तहत विदेशी संबंधों का मामला संघ सरकार का एकमात्र विशेषाधिकार है।’’
बनर्जी ने रविवार को दिए गए अपने बयान में संभावित मानवीय संकट पर अपने रुख को न्यायोचित ठहराने के लिए शरणार्थियों पर संयुक्त राष्ट्र के संकल्प का हवाला दिया था।
उन्होंने कहा था, ‘‘मुझे बांग्लादेश के मामलों पर नहीं बोलना चाहिए क्योंकि वह एक संप्रभु राष्ट्र है और इस मुद्दे पर जो कुछ भी कहा जाना चाहिए वह केंद्र का विषय है। लेकिन मैं आपको यह बता सकती हूं कि यदि संकट में फंसे लोग बंगाल के दरवाजे खटखटाएंगे तो हम उन्हें शरण जरूर देंगे।’’
बनर्जी ने कहा था, ‘‘ऐसा इसलिए है क्योंकि अशांत क्षेत्रों के आसपास के क्षेत्रों में शरणार्थियों को समायोजित करने के लिए संयुक्त राष्ट्र का एक संकल्प है।’’
बांग्लादेश में सरकारी नौकरियों में आरक्षण व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर छात्रों ने प्रदर्शन किया था। प्रदर्शनकारी बांग्लादेश के मुक्ति संग्राम में लड़ने वाले पूर्व सैनिकों के रिश्तेदारों को सरकारी नौकरियों में 30 प्रतिशत तक आरक्षण दिए जाने की प्रणाली को समाप्त करने की मांग कर रहे हैं। कुछ सप्ताह पहले शुरू हुई झड़पों में 100 से अधिक लोग मारे गए थे।
बांग्लादेश में कानून प्रवर्तन अधिकारियों ने देशव्यापी कर्फ्यू लगा दिया था।
ढाका से प्राप्त खबरों के अनुसार, बुधवार से देश में समग्र स्थिति में कुछ सुधार हुआ है।
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