बांस आधारित उद्यम अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण : मंत्री सिंह
वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से बांस पर एक सम्मेलन को संबोधित करते हुए, केन्द्रीय पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री (डोनर), जितेन्द्र सिंह ने कहा कि भारत का 60 प्रतिशत बांस पूर्वोत्तर में उत्पन्न होता है। उन्होंने कहा कि बांस आधारित उद्यम भारत की कोविड-19 प्रभावित अर्थव्यवस्था में तेजी लाने के उपायों की दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं।
नयी दिल्ली, दो मई केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने शनिवार को कहा कि कोविड-19 के बाद की अर्थव्यवस्था के लिए बांस आधारित काम धंधे महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।
वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से बांस पर एक सम्मेलन को संबोधित करते हुए, केन्द्रीय पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री (डोनर), जितेन्द्र सिंह ने कहा कि भारत का 60 प्रतिशत बांस पूर्वोत्तर में उत्पन्न होता है। उन्होंने कहा कि बांस आधारित उद्यम भारत की कोविड-19 प्रभावित अर्थव्यवस्था में तेजी लाने के उपायों की दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं।
सिंह ने कहा कि यह बहुत अहम है कि नरेंद्र मोदी सरकार ने पिछले छह वर्षों में पूर्वोत्तर क्षेत्र के विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है और साथ ही इसने बांस क्षेत्र को उस तरह का बढ़ावा दिया है जो आजादी के बाद से कभी नहीं मिला। ।
इस संबंध में, मंत्री ने 2017 में 100 साल पुराने भारतीय वन अधिनियम में संशोधन का उल्लेख किया, जिसके परिणामस्वरूप बांस के माध्यम से लोगों के लिए आजीविका के अवसरों को बढ़ाने के लिए घर के पास उगाये बांस को वन उत्पादों के रूप में छूट दी गई।
सिंह ने कहा कि जिस संवेदनशीलता के साथ मोदी सरकार बांस को प्रोत्साहन देने के महत्व को समझती है, वह इस तथ्य से स्पष्ट है कि लॉकडाऊन के दौरान भी बांस कारोबार से संबंधित गतिविधियों के संचालन की अनुमति दी गई।
उन्होंने कहा कि गृह मंत्रालय ने 16 अप्रैल को विभिन्न क्षेत्रों में सीमित गतिविधियों की अनुमति देते हुए, बांस की रोपाई, इसके प्रसंस्करण जैसी बांस कारोबार से संबंधित गतिविधियों के संचालन की अनुमति दी।
उन्होंने कहा, यह एक विडंबना है कि भारत में हर साल 5,000 करोड़ रुपये की लगभग 2,30,000 टन 'अगरबत्ती' की मांग है लेकिन अपने यहां बांस की पर्याप्त उपलब्धता के बावजूद भारत अगरबत्ती की मांग पूरा करने के लिए इसका बहुतायत भाग चीन और वियतनाम जैसे देशों से आयात कर रहा है।
उन्होंने कहा कि बांस को कई उत्पादों में संसाधित किया जा सकता है, जिसमें जैव-डीजल और हरित ईंधन, लकड़ी के पट्टे और प्लाईवुड शामिल हैं, जो अर्थव्यवस्था के पूरे चेहरे को बदल सकते हैं और कई क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा कर सकते हैं।
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, लेटेस्टली स्टाफ ने इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया है)
(The above story first appeared on LatestLY on May 02, 2020 11:17 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

