Andhra Civic Polls: सुप्रीम कोर्ट के सख्त रुख के बाद आंध्र प्रदेश में 100 स्थानीय निकायों की चुनाव प्रक्रिया पर रोक; SEC करेगा नामांकन हिंसा की समीक्षा
आंध्र प्रदेश में शहरी स्थानीय निकायों के चुनावों के दौरान नामांकन दाखिल करने में हिंसा और बाधा डालने के आरोपों पर उच्चतम न्यायालय ने कड़ा रुख अपनाया है. सुप्रीम कोर्ट की अवकाशकालीन पीठ के हस्तक्षेप के बाद राज्य चुनाव आयोग (SEC) ने सभी 100 स्थानीय निकायों—जिनमें 13 नगर निगम और 87 नगर पालिकाएं व नगर पंचायतें शामिल हैं—की चुनावी प्रक्रिया पर फिलहाल रोक लगा दी है.
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नई दिल्ली/अमरावती: आंध्र प्रदेश में नगर निगमों और नगर पालिकाओं के चुनावों में नामांकन प्रक्रिया के दौरान कथित हिंसा और हंगामे के मामले में सुप्रीम कोर्ट के सख्त निर्देशों के बाद राज्य चुनाव आयोग (SEC) ने पूरे राज्य में चुनावी गतिविधियों पर अस्थाई रोक लगा दी है. राज्य चुनाव आयुक्त अनिल चंद्र पुनीठा द्वारा जारी आदेश के अनुसार, राज्य के सभी 100 शहरी स्थानीय निकायों में प्रक्रिया को रोककर जिला कलेक्टरों और पुलिस अधिकारियों से रिपोर्ट तलब की गई है.
यह आदेश पूर्व मुख्यमंत्री वाई.एस. जगन मोहन रेड्डी के नेतृत्व वाली वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (YSRCP) द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी निर्देशों के बाद आया है. याचिका में आरोप लगाया गया था कि राज्य में कानून-व्यवस्था की आड़ में सत्तापक्ष के दबाव के चलते विपक्षी उम्मीदवारों को नामांकन पत्र तक दाखिल नहीं करने दिया गया.
सुप्रीम कोर्ट का निर्देश: शिकायतों की जांच कर नामांकन अवधि पर लें फैसला
जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की अवकाशकालीन पीठ ने 21 अक्टूबर को मामले की सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव संविधान के मूल ढांचे (Basic Structure) का हिस्सा हैं:
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नामांकन की समय-सीमा पर निर्णय: शीर्ष अदालत ने राज्य चुनाव आयोग को निर्देश दिया कि वह YSRCP और अन्य उम्मीदवारों द्वारा प्रस्तुत वीडियो फुटेज और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों का परीक्षण करे. आयोग को यह तय करने का आदेश दिया गया है कि क्या प्रभावित इलाकों में नामांकन की समय-सीमा बढ़ाई जानी चाहिए.
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अंतिम सूची के प्रकाशन पर रोक: कोर्ट ने आयोग को चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों की अंतिम सूची का प्रकाशन 25 अक्टूबर तक स्थगित रखने का आदेश दिया.
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कम से कम 48 घंटे का अतिरिक्त समय: यदि आयोग नामांकन अवधि बढ़ाने का निर्णय लेता है, तो उम्मीदवारों को अपने पर्चे दाखिल करने के लिए आदेश जारी होने के समय से कम से कम 48 घंटे का अतिरिक्त समय देना अनिवार्य होगा.
YSRCP के आरोप: पर्चे छीने गए और दफ्तरों में घुसने से रोका गया
हाईकोर्ट द्वारा राहत न मिलने के बाद सुप्रीम कोर्ट पहुंची YSRCP ने आरोप लगाया कि 16 से 18 अक्टूबर के बीच पुंगनूर, रायचोटी, कडप्पा और तिरुपति जैसे इलाकों में उनके प्रत्याशियों को धमकाया गया और शारीरिक हमले किए गए:
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कडप्पा और तिरुपति में घटनाएं: पार्टी ने दावा किया कि कडप्पा में प्रत्याशियों के नामांकन पत्र छीनकर फाड़ दिए गए, जबकि तिरुपति नगर निगम में 9 उम्मीदवारों को रिटर्निंग ऑफिसर के कार्यालय तक पहुंचने से रोक दिया गया.
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संवैधानिक अदालतों का दायित्व: सुप्रीम कोर्ट ने प्राथमिक साक्ष्यों को देखने के बाद कहा कि चुनावी प्रक्रिया की साख को बनाए रखने के लिए न्यायिक हस्तक्षेप आवश्यक था, क्योंकि बाधा रहित नामांकन दाखिल करना प्रत्येक नागरिक का लोकतांत्रिक अधिकार है.
उम्मीदवारों और केंद्रों को सुरक्षा देने का आदेश
अदालत ने आंध्र प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (DGP) को निर्देश दिया कि वे सभी नामांकन केंद्रों पर पर्याप्त पुलिस बल तैनात करें और उम्मीदवारों की पूर्ण सुरक्षा सुनिश्चित करें. साथ ही, पारदर्शिता बनाए रखने के लिए सभी केंद्रों पर अनिवार्य रूप से सीसीटीवी निगरानी और वीडियोग्राफी कराने का आदेश दिया गया है.
राज्य चुनाव आयोग जिला कलेक्टरों और पुलिस अधीक्षकों से विस्तृत रिपोर्ट मिलने के बाद आगे का अंतिम फैसला लेगा. शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया है कि यह रोक चुनाव रद्द करने जैसी नहीं है, बल्कि प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए है. सुप्रीम कोर्ट इस मामले में अगली सुनवाई 27 अक्टूबर को करेगा, जहां चुनाव आयोग और राज्य सरकार को अनुपालन रिपोर्ट (Compliance Report) पेश करनी होगी.
(The above story first appeared on LatestLY on Oct 22, 2026 10:48 AM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

