देश की खबरें | बालासोर हादसा : रिले कक्ष, मंडलीय नियंत्रण इकाइयों की सीसीटीवी निगरानी का सुझाव

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नयी दिल्ली, 23 जून सेवानिवृत्त ट्रेन नियंत्रकों के एक समूह ने सुझाव दिया है कि रेल यात्रा को सुरक्षित बनाने, कर्मचारियों के स्तर पर कर्तव्यों के निर्वहन में लापरवाही की आशंका घटाने और तोड़फोड़ सहित अन्य खतरों को टालने के लिए रिले कक्ष, स्टेशन नियंत्रण पैनल तथा मंडलीय नियंत्रण इकाइयों को सीसीटीवी निगरानी के दायरे में लाया जाना चाहिए।

समूह ने कहा कि रिले कक्ष, स्टेशन नियंत्रण पैनल और मंडलीय नियंत्रण इकाइयां रेल नेटवर्क के दिल और दिमाग के रूप में काम करने वाले सबसे महत्वपूर्ण हिस्से हैं, लेकिन ये कभी भी चौबीसों घंटे इलेक्ट्रॉनिक निगरानी के दायरे में नहीं रहे हैं। उन्होंने कहा कि रेलवे सुरक्षा के चाहे जितने भी इंतजाम कर लिए जाएं, इन प्रणालियों को निगरानी के दायरे में लाए बगैर उसकी सुरक्षा में चूक की गुंजाइश बनी रहेगी।

समूह का यह सुझाव ओडिशा के बालासोर जिले में हुए भीषण रेल हादसे के कुछ हफ्ते बाद आया है, जिसमें 280 से अधिक यात्रियों की जान गई थी। इस हादसे के पीछे रेलवे की स्वचालित सिग्नलिंग प्रणाली ‘इंटरलॉकिंग सिस्टम’ में हस्तक्षेप की आशंका जताई गई थी। अधिकारियों ने इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग सिस्टम में ‘तोड़फोड़’ और छेड़छाड़ के भी संकेत दिए थे।

मध्य रेलवे जोन के मुंबई मंडल के पूर्व प्रमुख ट्रेन नियंत्रक अनिल के भरदा कहते हैं, “रेलवे ने स्टेशन, क्रॉसिंग और अन्य सार्वजनिक जगहों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए हैं। हालांकि, उसने सबसे महत्वपूर्ण हिस्सों को निगरानी के दायरे से बाहर रखा है।”

भरदा के मुताबिक, “देश में 77 रेलवे मंडल हैं और हर मंडल की अपनी नियंत्रण इकाई है। इलाहाबाद (प्रयागराज) जैसे कुछ मंडलों के पास दो नियंत्रण इकाइयां हैं, जिससे देश में मौजूद कुल नियंत्रण इकाइयों की संख्या 80 हो जाती है। हर रेलवे स्टेशन पर एक रिले कक्ष और एक नियंत्रण पैनल भी होता है, जिसकी कमान स्टेशन मास्टर के हाथों में होती है। हालांकि, इनमें से कोई भी सीसीटीवी निगरानी के दायरे में नहीं है।”

भरदा 2001 से 2019 तक अखिल भारतीय ट्रेन नियंत्रक संघ के महासचिव रह चुके हैं। उनका कहना है कि अगर रिले कक्ष, स्टेशन नियंत्रण पैनल और मंडलीय नियंत्रण इकाइयों को पहले ही सीसीटीवी निगरानी के दायरे में ला दिया जाता, तो सिग्नलिंग प्रणाली में तोड़फोड़, छेड़छाड़ या रेल कर्मियों द्वारा ‘शॉर्ट-कट’ उपाय अपनाने की गुंजाइश ही नहीं रह जाती।

उत्तर-पूर्वी रेलवे के मुगलसराय मंडल के पूर्व प्रमुख ट्रेन नियंत्रक एम एम अंसारी के मुताबिक, नियंत्रण इकाई सभी गतिविधियों के केंद्र में होती है और वह किसी भी रेलवे मंडल के सभी विभागों के लिए बीच समन्वय करती है।

उन्होंने कहा, “किसी भी ट्रेन में कोई समस्या उत्पन्न होने और मामला प्रमुख ट्रेन नियंत्रक के संज्ञान में आने पर यह (नियंत्रण इकाई) संपर्क का पहला बिंदु है। नियंत्रण इकाई ही तय करती है कि किस ट्रेन को पहले रवाना करना है और किसे रोकना है। अगर किसी ट्रेन का चालक बीमार हो जाता है या किसी यात्री को चिकित्सकीय मदद की जरूरत होती है, तो भी नियंत्रण इकाई को सबसे पहले सूचित किया जाता है, जो अन्य विभागों से समन्वय कर समस्या का समाधान निकालती है।”

एक ट्रेन नियंत्रक ने नाम न जाहिर करने की शर्त पर भरदा की राय से इत्तफाक जताया और कहा कि नियंत्रण इकाई की सीसीटीवी निगरानी कर्मचारियों को सजग एवं सतर्क रखने के लिए जरूरी है।

ट्रेन नियंत्रक के अनुसार, “संकट या आपात स्थितियों में वरिष्ठ अधिकारी अक्सर नियंत्रकों पर दबााव बनाते हैं और अपने फैसले उन पर थोपते हैं, जो नियम-कायदों के खिलाफ है। मुझे उम्मीद है कि इलेक्ट्रॉनिक निगरानी से यह सब रुकेगा।”

अखिल भारतीय ट्रेन नियंत्रक संघ के महासचिव चंदन चतुर्वेदी ने कहा, “मैं यह नहीं कह सकता कि सीसीटीवी निगरानी से बालासोर में (रेल हादसे को टालने में) कोई मदद मिलती या नहीं। लेकिन, मैं यह जरूर मानता हूं कि रिले कक्षों और नियंत्रण इकाइयों में इस तरह की निगरानी आवश्यक है, क्योंकि इससे अधिकारी हर समय सजग एवं सतर्क रहेंगे तथा कर्तव्यों के निर्वहन में लापरवाही की आशंका घटेगी।”

नियंत्रकों के मुताबिक, एक निर्धारित मानक है कि रिले कक्ष को सिर्फ स्टेशन मास्टर की अनुमति से ही खोला जा सकता है, लेकिन शॉर्ट-कट उपायों के लिए इस मानदंड की अनदेखी किए जाने के कई उदाहरण हैं।

भरदा ने दावा किया, “इलेक्ट्रॉनिक निगरानी इस तरह की हरकतों को रोकेगी और सही मायनों में नियम-कायदों का अनुपालन सुनिश्चित करेगी।”

वहीं, चतुर्वेदी ने बताया कि रिले कक्ष ‘सिग्नल एंड टेलीकम्युनिकेशन (एस एंड टी) विभाग’ के अधीन आता है और इसमें सिग्नल, प्वाइंट, ट्रैक सर्किट, एक्सल काउंटर के लिए विभिन्न रिले के साथ-साथ सभी महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक उपकरण एवं कलपुर्जे रखे होते हैं।

उन्होंने कहा, “एस एंड टी विभाग के कर्मी स्टेशन मास्टर की अनुमति से रिले कक्ष को तभी खोलते हैं, जब कोई तकनीकी समस्या उभरती है।”

चतुर्वेदी के अनुसार, “चूंकि, सभी चीजें स्वचालित हैं, इसलिए सामान्य परिस्थितियों में रिले कक्ष को खोलने की जरूरत नहीं पड़ती। स्टेशन मास्टर कमान दे सकता है और सभी प्रणालियां उसी के हिसाब से काम करती हैं।”

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