देश की खबरें | नाबालिग को जमानत से तबतक इनकार नहीं, जब तक इससे न्याय का उद्देश्य विफल न हो: न्यायालय
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. उच्चतम न्यायालय ने कहा है कि किसी आपराधिक मामले में नाबालिग को जमानत देने से तब तक इनकार नहीं किया जा सकता, जब तक कि अदालत यह सुनिश्चित न कर ले कि नाबालिग का किसी ज्ञात अपराधी से संबंध होने की आशंका है या वह नैतिक, शारीरिक या मनोवैज्ञानिक खतरे में हो सकता है अथवा उसकी रिहाई से न्याय का उद्देश्य विफल हो जाएगा।
नयी दिल्ली, 16 अगस्त उच्चतम न्यायालय ने कहा है कि किसी आपराधिक मामले में नाबालिग को जमानत देने से तब तक इनकार नहीं किया जा सकता, जब तक कि अदालत यह सुनिश्चित न कर ले कि नाबालिग का किसी ज्ञात अपराधी से संबंध होने की आशंका है या वह नैतिक, शारीरिक या मनोवैज्ञानिक खतरे में हो सकता है अथवा उसकी रिहाई से न्याय का उद्देश्य विफल हो जाएगा।
न्यायमूर्ति अभय एस. ओका और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने राजस्थान उच्च न्यायालय और किशोर न्याय बोर्ड के उस आदेश को खारिज कर दिया, जिसमें एक नाबालिग को जमानत देने से इनकार कर दिया गया था। आरोपी पर एक नाबालिग के साथ यौन उत्पीड़न का मामला दर्ज किया गया था।
पीठ ने 14 अगस्त के अपने आदेश में कहा, “....आक्षेपित आदेश रद्द किए जाते हैं। तदनुसार अपील स्वीकार की जाती है।”
पीठ ने कहा कि अपराध का आरोप झेल रहा नाबालिग एक साल से अधिक समय से हिरासत में है और निर्देश दिया कि उसे बिना किसी जमानतदार के जमानत पर रिहा किया जाए।
न्यायालय ने कहा, “हालांकि, क्षेत्राधिकार वाला किशोर न्याय बोर्ड, क्षेत्राधिकार प्राप्त परिवीक्षा अधिकारी को नाबालिग को निगरानी में रखने और उसके आचरण के बारे में बोर्ड को समय-समय पर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए उचित निर्देश जारी करेगा।”
शीर्ष अदालत ने कहा कि लड़के को 15 अगस्त, 2023 को हिरासत में लिया गया और किशोर देखभाल गृह भेज दिया गया। मामले में आरोप पत्र 25 अगस्त, 2023 को दाखिल किया गया।
पीठ ने कहा कि हिरासत के बाद से उसने किशोर न्याय अधिनियम की धारा 12(1) के तहत दो बार जमानत याचिका दायर की, लेकिन उसकी अर्जी खारिज कर दी गई और यहां तक कि उच्च न्यायालय ने भी जमानत देने से इनकार करने के खिलाफ उसकी अपील खारिज कर दी।
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