देश की खबरें | बघेल ने 454 इस्पात पुलों के निर्माण के लिए 1100 करोड़ रूपए की स्वीकृति देने का तोमर से किया आग्रह
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रायपुर, 20 अगस्त छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने केन्द्रीय ग्रामीण विकास मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर को पत्र लिखकर 454 इस्पात पुलों के निर्माण के लिए 1100 करोड़ रूपए की स्वीकृति देने का आग्रह किया है।
राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि बघेल ने तोमर को पत्र में लिखा है कि छत्तीसगढ़ सरकार नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के चहुंमुखी विकास के लिए इन इलाकों में सड़कों के निर्माण के लिए दृढ़ संकल्पित है। छत्तीसगढ़ का 44 प्रतिशत भू-भाग वनों से अच्छादित है और 76 प्रतिशत जनसंख्या ग्रामीण है, जिनमें बड़ी संख्या में आदिवासी वर्ग के लोग हैं। छत्तीसगढ़ का बड़ा भू-भाग दुर्गम है। जमीन की उत्पादकता वृद्धि, सम्पत्ति के निर्माण, रोजगार सृजन, कृषि उपज के नुकसान को कम करने और लोगों का जीवन स्तर सुधारने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में सड़कों का निर्माण अतिआवश्यक है।
मुख्यमंत्री ने पत्र में लिखा है कि राज्य में 33 हजार 622 किलोमीटर लंबी, 7300 ग्रामीण सड़कों का 264 बड़े पुलों (एलएसबी) सहित निर्माण किया गया है, जिनमें नौ इस्पात पुल हैं। इसके अलावा 7737 किलोमीटर लंबी 1240 सड़कें 114 बड़े पुलों (एलएसबी) सहित निर्माणाधीन हैं।
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इन क्षेत्रों की दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के कारण वर्ष 2011 के पहले और उसके बाद भी बड़े पुलों का निर्माण नहीं कराया जा सका। राज्य सरकार द्वारा इन क्षेत्रों में अधोसंरचना विकास के कार्यों का गंभीरता से ध्यान दिया जा रहा है। राज्य सरकार ने लगभग 1100 करोड़ रूपए की लागत के 454 बड़े पुलों (एलएसबी) को निर्माण के लिए चिन्हित किया है, जिनमें 250 इस्पात पुल शामिल हैं।
बघेल ने पत्र में लिखा है कि बस्तर छत्तीसगढ़ का सुदूर दक्षिण में स्थित संभाग है और नक्सल प्रभावित क्षेत्र है। यह क्षेत्र दुर्गम भौगोलिक चुनौतियों और सघन वनों के साथ सीमावर्ती राज्यों से जुड़ा है। अब तक राज्य सरकार द्वारा बस्तर संभाग में 7228 किलोमीटर लंबी 1375 सड़कों का निर्माण किया गया है तथा 3009 किलोमीटर लंबी 692 सड़कें निर्माणाधीन हैं।
इन क्षेत्रों में नक्सल गतिविधियों और निर्माण में लगने वाले लंबे समय के कारण बड़े पुलों (एलएसबी) का निर्माण व्यवहारिक (संभव) नहीं है। ऐसे क्षेत्रों में इस्पात पुलों का बनाना ज्यादा आसान होगा, क्योंकि यह प्री फेब्रिकेटेड होते हैं और इनके निर्माण में समय भी कम लगता है। इसके अलावा ऐसे पुलों के रख-रखाव और उन्नयन में काफी कम समय लगता है। ऐसे पुलों को आवश्यकतानुसार सड़क सम्पर्क के लिए दूसरे स्थान पर स्थापित किया जा सकता है।
मुख्यमंत्री ने पत्र में लिखा है कि ऐसे पुलों के निर्माण से आदिवासी और ग्रामीण लोगों को न सिर्फ अच्छा सड़क संपर्क मिलेगा, बल्कि राज्य सरकार को इसके माध्यम से उन्हें विकास की मुख्यधारा से जोड़ने और बेहतर सड़क संपर्क के कारण उनकी बाजार, शिक्षा, स्वास्थ्य और उचित मूल्य दुकानों तक पहुंच आसान बनाने में सहायता मिलेगी। इससे ग्रामीण और कृषि आय में बढ़ोतरी होगी, उत्पादकता बढ़ेगी और रोजगार के नए अवसर मिलेंगे।
अधिकारियों ने बताया कि बघेल ने पत्र में इन परिस्थितियों को देखते हुए केन्द्रीय पंचायती राज और ग्रामीण विकास मंत्री से ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर सड़क संपर्क के लिए राशि स्वीकृत करने का अनुरोध किया है।
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