देश की खबरें | अयोध्या : गोधरा में मारे गए कार सेवकों के परिजनों ने उनके बलिदान को याद किया

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. गुजरात के गोधरा में वर्ष 2002 में साबरमती एक्सप्रेस के डिब्बे में लगी आग में मारे गए कई कारसेवकों के परिजनों के लिए बुधवार को अयोध्या में राम मंदिर का भूमि पूजन उनके दुखों के अंत की खबर लेकर आया जिसके लिए उनके परिजनों ने अपनी जान गंवाई थी।

एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

अहमदाबाद, पांच अगस्त गुजरात के गोधरा में वर्ष 2002 में साबरमती एक्सप्रेस के डिब्बे में लगी आग में मारे गए कई कारसेवकों के परिजनों के लिए बुधवार को अयोध्या में राम मंदिर का भूमि पूजन उनके दुखों के अंत की खबर लेकर आया जिसके लिए उनके परिजनों ने अपनी जान गंवाई थी।

गोधरा हादसे में अपने ससुर और साले को खोने वाले बिपिन ठक्कर ने कहा, ‘‘मैं यही कह सकता हूं कि उनका बलिदान व्यर्थ नहीं गया।’’

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अहमदाबाद में अपनी पत्नी के साथ रह रहे ठक्कर ने कहा कि अयोध्या में राम जन्मभूमि पर भगवान राम का मंदिर बनाने के लिए कई लोगों ने अपने जीवन का बलिदान दिया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दिन में मंदिर के लिए भूमि पूजन का संदर्भ देते हुए उन्होंने कहा, ‘‘यह बहुत खुशी की बात है कि अंतत: मंदिर बन रहा है।’’

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उल्लेखनीय है कि अयोध्या से कार सेवा कर लौट रहे 59 कारसेवकों की 27 फरवरी 2002 को गोधरा में ट्रेन में लगी आग में जलने से मौत हो गई थी जिसके बाद गुजरात के इतिहास के सबसे वीभत्स सांप्रदायिक दंगे हुए जिसमें करीब एक हजार लोगों की मौत हो गई। दंगे में मारे गए अधिकतर लोग अल्पसंख्यक समाज के थे। .

गोधरा रेल अग्निकांड में अपने पिता जेवर प्रजापति को खो चुके अशोक प्रजापति ने कहा, ‘‘ अयोध्या में राम लला का भव्य मंदिर बनाना सभी हिंदुओं का पवित्र वचन था जो अब पूर हो रहा है। भगवान राम सभी हिंदुओं के लिए आदर्श हैं।’’

रेलगाड़ी में कारसेवकों के साथ मौजूद महेश शाह उस दिन को याद करते हैं जिसमें वह किसी तरह बचने में कामयाब हुए थे। उन्होंने कहा कि आज भी वह दृश्य परेशान करता है।

शाह ने बताया, ‘‘अहमदाबाद के 90 कारसेवकों में 19 की मौत गोधरा कांड में हुई थी।’’

शाह विश्व हिंदू परिषद के पूर्व अध्यक्ष प्रवीण तोगड़िया द्वारा गठित अंतरराष्ट्रीय हिंदू परिषद के पदाधिकारी हैं। उन्होंने बताया कि जलते डिब्बे की खिड़की से कूदकर उन्होंने अपनी जान बचाई थी।

शाह ने कहा, ‘‘ हमने अयोध्या में राम मंदिर बनाने का वचन लिया था। यह खुशी की बात है कि वह सपना सच हो गया। यह दुख की बात है कि मामले का राजनीतिकरण हुआ लेकिन हम समाज के लिए काम करने को प्रतिबद्ध हैं।’’

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