देश की खबरें | अवनि लेखरा: पैरालंपिक में दो पदक जीतने वाली पहली भारतीय

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. अवनि लेखरा को 2012 में एक कार दुर्घटना में घायल होने के कारण व्हील चेयर का सहारा लेना पड़ा लेकिन पैरालंपिक खेलों में निशानेबाजी में स्वर्ण सहित दो पदक जीतकर उन्होंने यह साबित कर दिया कि बुलंद हौसले और कभी हार न मानने के जज्बे से कोई भी सफलता हासिल की जा सकती है।

नयी दिल्ली, पांच सितंबर अवनि लेखरा को 2012 में एक कार दुर्घटना में घायल होने के कारण व्हील चेयर का सहारा लेना पड़ा लेकिन पैरालंपिक खेलों में निशानेबाजी में स्वर्ण सहित दो पदक जीतकर उन्होंने यह साबित कर दिया कि बुलंद हौसले और कभी हार न मानने के जज्बे से कोई भी सफलता हासिल की जा सकती है।

अवनि ने तोक्यो पैरालंपिक में 10 मीटर एयर राइफल स्टैंडिंग एचएस1 वर्ग में स्वर्ण पदक जीतने के बाद 50 मीटर राइफल थ्री पोजीशन एसएच1 स्पर्धा का कांस्य पदक हासिल कर इतिहास रच दिया। वह दो पैरालंपिक पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला खिलाड़ी बन गयीं। वह भारत की उन चुनिंदा खिलाड़ियों में शामिल हो गयी है जिन्होंने एक से अधिक पैरालंपिक (या ओलंपिक) पदक जीते हैं।

कार दुर्घटना में अवनि की रीढ़ की हड्डी में गंभीर चोट लगी थी जिसके बाद उनकी कमर का निचला हिस्सा लकवाग्रस्त हो गया था। अवनि के पिता प्रवीण लेखरा 2015 में जब पहली बार उन्हें जयपुर के जगतपुरा खेल परिसर में निशानेबाजी में हाथ आजमाने के लिए ले गए तो उनका मकसद दुर्घटना के दिव्यांग हुई बेटी की जिंदगी से मायूसी और अवसाद कम करके उसका दिल बहलाना था ।

अवनि ने भी पिता के जोर देने पर निशानेबाजी करना शुरू किया और मायूसी कम करने के लिये की गयी पहल का परिणाम तोक्यो पैरालंपिक में ऐतिहासिक स्वर्ण और कांस्य पदक के रूप में सामने आया।

वह शुरुआत में ‘फुल-टाइम’ निशानेबाज नहीं बनना चाहती थीं लेकिन अभिनव बिंद्रा (भारत के पहले ओलंपिक व्यक्तिगत स्वर्ण पदक विजेता निशानेबाज) की आत्मकथा ‘ए शॉट एट ग्लोरी’ पढ़ने के बाद वह इतनी प्रेरित हुईं कि उन्होंने अपने पहले ही पैरालंपिक में इतिहास रच दिया।

उन्होंने दूसरा पदक जीतने के बाद ने कहा, ‘‘जब मैंने अभिनव बिंद्रा सर की आत्मकथा पढ़ी थी तो मुझे इससे प्रेरणा मिली थी क्योंकि उन्होंने अपना शत प्रतिशत देकर भारत के लिये पहला व्यक्तिगत स्वर्ण पदक जीता था। ’’ उन्होंने कहा, ‘‘मैं हमेशा उनकी (बिंद्रा की) तरह बनना चाहती थी और हमेशा अपने देश का नाम रोशन करना चाहती थी। ’’

लेखरा ने कहा, ‘‘मैं खुश हूं कि मैं देश के लिये एक और पदक जीत सकी और मैं अभी तक इस पर विश्वास नहीं कर पा रही। ’’

अवनि ने राइफल उठाने के बाद राज्य और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में काफी अच्छा प्रदर्शन किया और 2015 में राजस्थान में राज्य स्तर की प्रतियोगिता में पहले और फिर राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में तीसरे स्थान पर रहीं। राजस्थान में सहायक वन संरक्षक के पद पर कार्यरत 19 साल की अवनि पहली बार पैरालंपिक खेलों में भाग ले रही है। तोक्यो पैरालंपिक में 10 मीटर एयर राइफल स्टैंडिंग एचएस1 वर्ग में क्वालीफिकेशन और फाइनल्स दोनों में लगातार 10 से अधिक के स्कोर बनाये।

पूर्व ओलंपिक निशानेबाज सुमा शिरूर की देखरेख में ट्रेनिंग करने वाली अवनि ने बीते सोमवार को इस स्पर्धा के फाइनल में 249.6 अंक के कुल स्कोर के साथ पैरालंपिक का नया रिकॉर्ड बनाया और विश्व रिकॉर्ड की बराबरी भी की।

इस युवा निशानेबाज ने इसके बाद शुक्रवार को 50 मीटर राइफल थ्री पोजीशन एसएच1 स्पर्धा में दूसरे स्थान पर रहकर फाइनल के लिये क्वालीफाई किया था। फाइनल के करीबी मुकाबले में उन्होंने यूक्रेन की इरिना श्चेटनिक से आगे रहकर कांस्य पदक हासिल किया।

एसएच1 राइफल वर्ग में वे निशानेबाज शामिल होते हैं जो हाथों से बंदूक थाम सकते हैं लेकिन उनके पांवों में विकार होता है। इनमें से कुछ एथलीट व्हील चेयर पर बैठकर जबकि कुछ खड़े होकर प्रतिस्पर्धा में भाग लेते हैं। कानून की छात्रा अवनि ने संयुक्त अरब अमीरात में विश्व कप 2017 में भारत की तरफ से पदार्पण किया था। उसी साल भारत सरकार ने उन्हें लक्ष्य ओलंपिक पोडियम कार्यक्रम (टॉप्स) में शामिल किया था।

उन्होंने 2017 में ही बैंकॉक में डब्ल्यूएसपीएस (विश्व निशानेबाजी पैरा खेल) विश्व कप में कांस्य पदक जीता। इसके बाद उन्होंने क्रोएशिया में 2019 में और संयुक्त अरब अमीरात में हुए अगले दो विश्व कप में इस पदक का रंग बेहतर करते हुए रजत पदक अपने नाम किये।

कोविड-19 महामारी से उनकी तोक्यो पैरालंपिक की तैयारियों पर असर पड़ा जिसमें उनके लिये जरूरी फिजियोथेरेपी दिनचर्या सबसे ज्यादा प्रभावित हुई लेकिन उन्होंने इन रुकावटों से अपने जज्बे को प्रभावित नहीं होने दिया और पैरालंपिक में तिरंगा ऊंचा फहराने के साथ भारतीय राष्ट्र गान की धुनों को बजाने का मौका बनाकर सब का दिल जीत लिया।

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