विदेश की खबरें | पर्यावरण से सेहत पर असर के बारे में ऑस्ट्रेलिया की सबसे महत्वपूर्ण रिपोर्ट जारी, गंभीर निष्कर्ष

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on world at LatestLY हिन्दी. मेलबर्न, 19 जुलाई (द कन्वरसेशन) ऑस्ट्रेलिया के संपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र पर जलवायु परिवर्तन का अत्यधिक दबाव है और ऑस्ट्रेलिया में आज देशज से ज्यादा विदेशी प्रजातियों के पौधे हैं। आज जारी ‘स्टेट ऑफ द एनवॉयरनमेंट रिपोर्ट’ में यह बात कही गयी है।

मेलबर्न, 19 जुलाई (द कन्वरसेशन) ऑस्ट्रेलिया के संपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र पर जलवायु परिवर्तन का अत्यधिक दबाव है और ऑस्ट्रेलिया में आज देशज से ज्यादा विदेशी प्रजातियों के पौधे हैं। आज जारी ‘स्टेट ऑफ द एनवॉयरनमेंट रिपोर्ट’ में यह बात कही गयी है।

रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि सूचीबद्ध संकटग्रस्त प्रजातियों की संख्या वर्ष 2016 से आठ फीसदी बढ़ गयी है और आने वाले दशकों में और प्रजातियों के विलुप्त होने की आशंका है।

यह रिपोर्ट 30 से अधिक विशेषज्ञों द्वारा दो साल से अधिक समय तक हजारों घंटे के परिश्रम के बाद तैयार की गयी है।

ऑस्ट्रेलिया ने 1995 से हर पांच साल में पर्यावरण की राष्ट्रीय स्थिति पर रिपोर्ट जारी की है। इसमें ऑस्ट्रेलिया के पर्यावरण और धरोहरों के हर पहलू का आकलन है, नदियों, समुद्रों, वायु, हिम, भूमि और शहरी क्षेत्रों की भी बात है। पिछली रिपोर्ट 2017 में जारी की गयी थी।

इस बार की रिपोर्ट और अधिक विस्तृत है जिसमें बताया गया है कि हमारा पर्यावरण किस तरह ऑस्ट्रेलियाइयों की सेहत और कुशलक्षेम को प्रभावित कर रहा है। इसमें पहली बार स्वदेशी लेखकों को शामिल किया गया है।

रिपोर्ट के मुख्य लेखक के रूप में हम यहां इसके प्रमुख निष्कर्षों को प्रस्तुत कर रहे हैं।

1. ऑस्ट्रेलिया का पर्यावरण सामान्य तौर पर बिगड़ रहा है। हमारी प्राकृतिक पूंजी - मूल वनस्पतियों, मिट्टी, नम भूमि, शैल भित्तियों, नदियों और जैव-विविधता आदि की स्थिति और मात्रा में सतत क्षय हो रहा है। इस तरह के संसाधन खाद्य सामग्री, स्वच्छ जल, सांस्कृतिक संपर्क आदि प्रदान करके ऑस्ट्रेलिया वासियों को लाभान्वित करते हैं।

जून 2021 में संकटग्रस्त के रूप में सूचीबद्ध पौधों और पशुओं की प्रजातियों की संख्या 1,918 हो गई जो 2016 में 1,774 थी।

ऑस्ट्रेलिया का समुद्र तट भी खतरे में है। पानी की खराब गुणवत्ता आदि के कारण समुद्र तटीय क्षेत्र में शैल-भित्तियां बहुत खराब स्थिति में हैं। मुरे डार्लिंग बेसिन समेत अंतर्देशीय जलमार्ग प्रणालियां दबाव में हैं।

2. जलवायु परिवर्तन से हर पारिस्थितिकी तंत्र को खतरा है। जलवायु परिवर्तन भूमि की सफाई, आक्रामक प्रजातियों, प्रदूषण और शहरी विस्तार से हो रहे और पहले हो चुके नुकसान को और बढ़ा रहा है।

अत्यधिक गर्मी या सर्दी के मौसम संबंधी घटनाओं की तीव्रता और आवृत्ति बदल रही है। पिछले पांच वर्षों में, बाढ़, सूखा, जंगल की आग, तूफान और गर्मी के प्रकोप जैसी चरम घटनाओं ने ऑस्ट्रेलिया के हर हिस्से को प्रभावित किया है।

विशिष्ट मौसम में जंगल में आग की अवधि लंबी होती जा रही है। एनएसडब्ल्यू में, उदाहरण के लिए, झाड़ियों में आग का सीजन अब लगभग आठ महीने तक फैला हुआ है। चरम घटनाएं भी पारिस्थितिक तंत्र को उन तरीकों से प्रभावित कर रही हैं जिन्हें कभी दस्तावेजी स्वरूप नहीं दिया गया।

3. स्वदेशी ज्ञान और प्रबंधन जमीनी बदलाव लाने में मदद कर रहे हैं। इसमें पारंपरिक अग्नि प्रबंधन शामिल है, जिसे भूमि प्रबंधन संस्थानों और सरकारी विभागों द्वारा महत्वपूर्ण ज्ञान के रूप में मान्यता दी जा रही है।

उदाहरण के लिए स्वदेशी रेंजर राष्ट्रीय संरक्षित क्षेत्र की 44 प्रतिशत संपदा का प्रबंधन संभालते हैं और संघीय सरकार के स्वदेशी रेंजर कार्यक्रम के तहत 2,000 रेंजरों को वित्तपोषित किया गया है।

स्वदेशी समुदायों को सशक्त बनाने और पर्यावरण तथा सामाजिक परिणामों को बेहतर बनाने के लिहाज से स्वदेशी ज्ञान प्रणालियों को सक्षम बनाने के लिए अभी भी काम किया जाना चाहिए।

पर्यावरणीय क्षय और विनाश हमारे कुशलक्षेम को प्रभावित कर रहा है। इस रिपोर्ट में हम मानव स्वास्थ्य पर पर्यावरणीय क्षति के प्रत्यक्ष प्रभावों का दस्तावेजीकरण करते हैं। उदाहरण के लिए दावानल के धुएं से।

मानसिक स्वास्थ्य और कल्याण के लिए एक स्वस्थ वातावरण के परोक्ष लाभों की मात्रा निर्धारित करना कठिन है। लेकिन सामने आ रहे साक्ष्य बताते हैं कि जो लोग अपने मूल्यों और संस्कृति के अनुसार अपने पर्यावरण का प्रबंधन करते हैं, उनके रहन-सहन में सुधार हुआ है।

(द कन्वरसेशन)

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