देश की खबरें | ऑस्ट्रेलिया के उप-प्रधानमंत्री ने चीन को ‘सबसे बड़ी सुरक्षा चिंता’ बताया

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नयी दिल्ली, 23 जून ऑस्ट्रेलिया के उप-प्रधानमंत्री रिचर्ड मार्लेस ने बृहस्पतिवार को कहा कि ऑस्ट्रेलिया और भारत के लिए चीन ‘सबसे बड़ी सुरक्षा चिंता’ है तथा वास्तविक नियंत्रण रेखा और दक्षिण चीन सागर में बीजिंग के कदमों से उनकी बढ़ती आक्रामकता प्रदर्शित होती है।

मार्लेस चार दिवसीय यात्रा पर भारत में हैं। पिछले महीने प्रधानमंत्री एंथली अल्बनीज की लेबर पार्टी के सत्ता में आने के बाद यह आस्ट्रेलिया के किसी वरिष्ठ नेता की पहली भारत यात्रा है।

उन्होंने कहा कि चीन दुनिया को ऐसा आकार देने की कोशिश कर रहा है, जैसा कि पहले कभी नहीं देखा गया हो।

मार्लेस ने यह भी कहा कि भारत की भी समान सुरक्षा चिंताएं हैं और पूर्वी लद्दाख में चीन के साथ जारी सीमा विवाद को लेकर ऑस्ट्रेलिया नयी दिल्ली के साथ एकजुटता से खड़ा है।

अपनी यात्रा के चौथे एवं अंतिम दिन ऑस्ट्रेलिया के उप-प्रधानमंत्री ने पत्रकारों के साथ बातचीत के दौरान चीन और रूस के बीच बढ़ते रक्षा एवं सुरक्षा सहयोग पर चिंता जताई और कहा कि इसका क्षेत्र पर प्रभाव पड़ सकता है। गौरतलब है कि मार्लेस ऑस्ट्रेलिया के रक्षा मंत्री भी हैं।

उन्होंने कहा कि नयी दिल्ली और कैनबरा अपने रक्षा एवं सुरक्षा संबंधों का विस्तार करने के लिए प्रतिबद्ध हैं, क्योंकि उनका देश दुनिया को लेकर अपने दृष्टिकोण में भारत को पूरी तरह से ‘केंद्र’ में देखता है।

ऑस्ट्रेलिया के उप-प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘चीन सिर्फ ऑस्ट्रेलिया ही नहीं, बल्कि भारत के लिए भी उसका सबसे बड़ा कारोबारी सहयोगी है... वह सिर्फ हमारे लिए ही नहीं, बल्कि भारत के लिए भी सबसे बड़ी सुरक्षा चिंता है।’’

उन्होंने कहा कि इन दोनों चीजों का समाधान कैसे निकाला जाए, यह स्पष्ट नहीं है।

मार्लेस ने कहा कि भारत और ऑस्ट्रेलिया न केवल आर्थिक क्षेत्र, बल्कि रक्षा क्षेत्र में भी द्विपक्षीय संबंधों को लेकर करीबी स्तर पर काम कर रहे हैं, ताकि देशों देशों की रक्षा एवं सुरक्षा स्थिति को मजबूत बनाया जा सके।

दो साल पहले पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच हुए संघर्ष के संदर्भ में ऑस्ट्रेलिया के उप-प्रधानमंत्री ने कहा कि उस घटना को लेकर उनका देश भारत के साथ एकजुटता से खड़ा है।

उन्होंने कहा, ‘‘चीन हमारे आसपास ऐसी दुनिया बनाने की कोशिशों में जुटा है, जैसा कभी पहले नहीं देखा गया। पिछले कुछ वर्षों में हमने खासतौर पर इस संबंध में चीन के अधिक आक्रामक व्यवहार को महसूस किया है।’’

मार्लेस ने कहा, ‘‘यह वास्तव में जरूरी है कि हम ऐसी दुनिया में रहें, जहां कानून आधारित व्यवस्था हो, जहां देशों के बीच विवादों का निर्धारित नियमों के तहत शांतिपूर्ण ढंग से निपटारा हो।’’

इस परिप्रेक्ष में उन्होंने कहा कि आस्ट्रेलिया, भारत के अपने संबंधों को वैश्विक कानून आधरित व्यवस्था की सुरक्षा के लिये काफी महत्वपूर्ण मानता है।

उन्होंने कहा कि हमारी चिंता यह है कि जब हम चीन के व्यवहार को देखते हैं, चाहे वह वास्तविक नियंत्रण रेखा पर हो या दक्षिण चीन सागर में हो, यह आक्रामक व्यवहार है जो कानून आधारित स्थापित व्यवस्था को चुनौती देता है और इस क्षेत्र की समृद्धि के लिये काफी महत्वपूर्ण है।

उन्होंने कहा, ‘‘हमने वास्तविक नियंत्रण रेखा के संदर्भ में देखा है। कुछ वर्ष पहले घटी घटनाओं को देखा है जो भारतीय सैनिकों के प्रति व्यवहार से संबंधित है और हम इस घटना को लेकर भारत के साथ एकजुटता के साथ खड़े हैं ।

मार्लेस ने कहा कि वास्तविक नियंत्रण रेखा पर चीनी कार्रवाई इस बात को प्रदर्शित करता है कि एक देश विवादों का निपटारा स्थापित नियमों के तहत नहीं बल्कि ताकत एवं बल के जरिये करना चाहता है और यह चिंता की बात है।

चीन और रूस के बीच बढ़ते रक्षा एवं सुरक्षा सहयोग का जिक्र करते हुए उन्होंने इसके प्रभावों को लेकर अशांकाएं जताईं और कहा कि दुनिया में शांति बनाए रखना बेहद महत्वपूर्ण है।

यूक्रेन संकट को लेकर ऑस्ट्रेलिया के उप-प्रधानमंत्री ने कहा कि हम यूक्रेन के घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं और इसका वैश्विक खाद्य आपूर्ति पर प्रभाव पड़ रहा है, जो वास्तव में चिंता का विषय है।

भारत, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान की सदस्यता वाले ‘क्वाड’ समूह के बारे में उन्होंने कहा कि यह सुरक्षा गठजोड़ नहीं है, क्योंकि इसके रक्षा से जुड़े आयाम नहीं हैं।

वहीं, ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन और अमेरिका की सदस्यता वाले ‘ऑकस’ समूह के बारे में मार्लेस ने कहा कि यह सुरक्षा गठजोड़ नहीं है, क्योंकि इसका मुख्य उद्देश्य प्रौद्योगिकी क्षेत्र में साझेदारी को बढ़ावा देना है।

दीपक

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