जरुरी जानकारी | सोच-विचारकर दूसरे की पैकेजिंग की नकल का प्रयास करना ट्रेडमार्क का उल्लंघन नहीं: अदालत

नयी दिल्ली, पांच अप्रैल दिल्ली उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को कहा कि एक कंपनी द्वारा सतर्कता के साथ दूसरे के उत्पाद की पैकेजिंग की नकल का प्रयास करना अपने आप में ट्रेडमार्क का उल्लंघन नहीं है।

अदालत ने आगे कहा कि जब तक कोई उपभोक्ता भ्रमित अथवा धोखे में नहीं आता है, तब तक पैकेजिंग की नकल करने वाली कंपनी के इरादों के आधार पर ट्रेडमार्क के उल्लंघन का मामला नहीं बनता है।

अदालत ने आगे कहा कि इस तरह के मामलों की आगे जांच ग्राहकों की औसत समझदारी के आधार पर की जानी चाहिए।

न्यायमूर्ति सी हरि शंकर ने कहा, ‘‘जब तक इससे कोई उपभोक्ता भ्रमित अथवा धोखा नहीं खाता है तब तक प्रतिवादी के इरादे कितने भी संदिग्ध क्यों न हों, इसमें उल्लंघन का मामला नहीं बनता।’’

अदालत ने यह आदेश ब्रिटानिया इंडस्ट्रीज की याचिका पर दिया, जिसमें कंपनी ने आईटीसी पर ट्रेडमार्क के उल्लंघन का आरोप लगाया था। अदालत ने अंतरिम राहत के आग्रह वाली याचिका को खारिज कर दिया।

हालांकि ब्रिटानिया का कथित ट्रेडमार्क उल्लंघन और दूसरे के समान अपने उत्पाद को दिखाकर गलत तरीके से प्रस्तुत करने का मुख्य मामला (पॉसिंग ऑफ) अभी लंबित है।

ब्रिटानिया ने याचिका दायर कर आईटीसी लि. के ‘सनफेस्ट फार्मलाइट 5-सीड डाइजेस्टिव’ बिस्कुट की पैकिंग को लेकर आपत्ति जतायी थी। उसका कहना था कि आईटीसी लि. की पैकेजिंग उसके ‘न्यूट्रि चॉइस डाइजेस्टिव’ बिस्कुट के समान है।

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