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देश की खबरें | एस्ट्रोसैट रहस्यमयी ब्लैक होल की टिमटिमाहट को समझने में मददगार हो सकता: इसरो

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. भारतीय वैज्ञानिक ब्लैक होल प्रणाली जीआरएस 1915+105 द्वारा प्रदर्शित जटिल व्यवहार को समझने के लिए देश की पहली समर्पित बहु-तरंगदैर्ध्य अंतरिक्ष वेधशाला एस्ट्रोसैट का उपयोग कर रहे हैं। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने यह जानकारी दी।

देश की खबरें | एस्ट्रोसैट रहस्यमयी ब्लैक होल की टिमटिमाहट को समझने में मददगार हो सकता: इसरो

बेंगलुरु, 25 जुलाई भारतीय वैज्ञानिक ब्लैक होल प्रणाली जीआरएस 1915+105 द्वारा प्रदर्शित जटिल व्यवहार को समझने के लिए देश की पहली समर्पित बहु-तरंगदैर्ध्य अंतरिक्ष वेधशाला एस्ट्रोसैट का उपयोग कर रहे हैं। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने यह जानकारी दी।

इसरो, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी), गुवाहाटी और हाइफा विश्वविद्यालय (इजराइल) के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए अध्ययन से खुलासा हुआ है कि ब्लैक होल से निकलने वाली एक्स-रे चमक में तेजी से उतार-चढ़ाव होता है, जो कम चमक (डिप) और उच्च चमक (नॉन-डिप) चरणों के बीच बारी-बारी से होता है, और प्रत्येक चरण कुछ सौ सेकंड के होते हैं।

इसरो के मुताबिक इन उच्च चमक वाले चरणों के दौरान, टीम ने प्रति सेकंड लगभग 70 बार तीव्र एक्स-रे टिमटिमाहट देखी, जिसे अर्ध-आवधिक दोलन (क्यूपीओ) के रूप में जाना जाता है।

अनुसंधान दल ने पाया कि ये तीव्र क्यूपीओ, ब्लैक होल के चारों ओर स्थित ऊर्जावान प्लाज्मा के ‘अति-उष्ण’ बादल से घनिष्ठ रूप से जुड़े हुए हैं, जिसे कोरोना के नाम से जाना जाता है।

इसरो द्वारा जारी बयान में कहा गया कि चमकीले उच्च-ऊर्जा चरणों के दौरान, जब क्यूपीओ सबसे प्रबल होते हैं, कोरोना अधिक सघन और काफ़ी गर्म हो जाता है। इसके विपरीत, मंद ‘डिप’ चरणों में, कोरोना फैलता और ठंडा होता है, जिससे टिमटिमाहट गायब हो जाती है।

भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी के मुताबिक यह परिपाटी दर्शाती है कि सघन दोलनशील कोरोना ही इन तेज़ क्यूपीओ संकेतों का स्रोत हो सकता है।

इसरो के मुताबिक यह खोज एस्ट्रोसैट के लार्ज एरिया एक्स-रे प्रोपोरशनल काउंटर और सॉफ्ट एक्स-रे टेलीस्कोप का उपयोग करके की गई।

भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी के मुताबिक, ‘‘ये निष्कर्ष वैज्ञानिकों को यह समझने में मदद करते हैं कि ब्लैक होल के आसपास क्या होता है, जहां गुरुत्वाकर्षण अविश्वसनीय रूप से मजबूत होता है और परिस्थितियां चरम पर होती हैं।’’

जीआरएस 1915+105 ब्लैकहोल का द्रव्यमान सूर्य से लगभग 12 गुना अधिक है और यह हमारे सौरमंडल से करीब 28,000 प्रकाश वर्ष दूर स्थित है।

इस अनुसंधानपत्र को रॉयल एस्ट्रोनॉमिकल सोसायटी के मासिक नोटिस में प्रकाशित किया गया है। इसके सह-लेखक अनुज नंदी (इसरो), संतब्रत दास, शेषाद्री मजूमदार (आईआईटी गुवाहाटी), और श्रीहरि एच (हाइफा विश्वविद्यालय) हैं।

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(The above story first appeared on LatestLY on Jul 25, 2025 10:32 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).