UP Assembly Election 2022: अमेठी की लड़ाई में ‘‘उधार’’ के खिलाड़ियों पर निर्भर हैं भाजपा, कांग्रेस
पारंपरिक प्रतिद्वंद्वी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और कांग्रेस कभी गांधी परिवार के गढ़ रहे अमेठी की लड़ाई में ‘‘उधार’’ के खिलाड़ियों पर निर्भर हैं, जिसे भाजपा अब भेद चुकी है. अमेठी विधानसभा सीट पर भाजपा ने पूर्व कांग्रेस नेता संजय सिंह को मैदान में उतारा है, जो 2019 में कांग्रेस छोड़ भाजपा में आ गए थे.
अमेठी (उप्र), 12 फरवरी : पारंपरिक प्रतिद्वंद्वी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और कांग्रेस कभी गांधी परिवार के गढ़ रहे अमेठी की लड़ाई में ‘‘उधार’’ के खिलाड़ियों पर निर्भर हैं, जिसे भाजपा अब भेद चुकी है. अमेठी विधानसभा सीट पर भाजपा ने पूर्व कांग्रेस नेता संजय सिंह को मैदान में उतारा है, जो 2019 में कांग्रेस छोड़ भाजपा में आ गए थे. वहीं, कांग्रेस ने इस सीट से आशीष शुक्ला को प्रत्याशी बनाया है. इस सीट पर पांचवे चरण में 27 फरवरी को मतदान होना है. बहुजन समाज पार्टी (बसपा) से शुक्ला 2017 में भाजपा में आए थे और अब कांग्रेस में चले गए हैं. संजय सिंह की उम्मीदवारी की घोषणा के कुछ क्षण बाद शुक्ला को दिल्ली में कांग्रेस में शामिल किया गया और तुरंत उनको इस हाई प्रोफाइल सीट से टिकट दे दिया गया. यह सीट इंदिरा गांधी के जमाने से गांधी परिवार के लिए काफी महत्तवपूर्ण रही हैं. टिकट मिलने के बाद बिना समय गंवाए सिंह और शुक्ला दोनों अपनी-अपनी नयी पार्टी के प्रति वफादारी की शपथ ले रहे हैं और अपनी-अपनी पार्टी के घोषणा पत्र के साथ मतदाताओं तक पहुंच रहे हैं.
भाजपा और कांग्रेस की लड़ाई में समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख अखिलेश यादव ने आजीवन कारावास की सजा काट रहे गायत्री प्रजापति की पत्नी महाराजी प्रजापति को अमेठी विधानसभा सीट से मैदान में उतारा है. मायावती की बसपा ने दलित-ब्राह्मण फॉर्मूले के तहत रागिनी तिवारी को मैदान में उतारा है. अमेठी की लड़ाई 2014 में शुरू हुई जब केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने राहुल गांधी को चुनौती दी थी, वह 2014 में तो चुनाव हार गईं लेकिन 2019 में राहुल गांधी को हराकर उन्होंने अपनी पिछली हार का बदला लिया.
अमेठी लोकसभा क्षेत्र की पांच विधानसभा सीटों में से 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने चार सीटों पर जीत हासिल की थी. गौरीगंज सीट तब सपा के खाते में गई थी, जबकि कांग्रेस अपने ही गढ़ में खाली हाथ रही थी. अमेठी लोकसभा सीट में पांच विधानसभा क्षेत्र अमेठी, गौरीगंज, जगदीशपुर (सुरक्षित), तिलोई और सलोन (पड़ोसी रायबरेली जिले में स्थित) शामिल हैं. कांग्रेस प्रत्याशी शुक्ला, जो कभी अमेठी से लोकसभा चुनाव में राहुल गांधी के खिलाफ लड़े थे और एक लाख से अधिक वोट हासिल किये थे, अब प्रियंका गांधी के ‘‘लड़की हूं लड़ सकती हूं’’ के नारे के साथ मैदान में हैं. यह भी पढ़ें : Uttarakhand Elections 2022: समान नागरिक संहिता को लेकर सीएम पुष्कर सिंह धामी का बड़ा एलान
सपा सरकार में मंत्री रहे गायत्री नाबालिग लड़की से सामूहिक बलात्कार मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे हैं. अपनी मां का चुनाव प्रचार देख रहे गायत्री के बेटे अनिल प्रजापति ने कहा, ‘‘यह सब झूठ है ... मेरे पिता को साजिश के तहत मामले में फंसाया गया था.’’ प्रजापति की पुत्रियां- अंकिता प्रजापति और सुधा प्रजापती, जेल में बंद अपने पिता को न्याय दिलाने के लिए सोशल मीडिया का सहारा ले रही हैं. बसपा प्रत्याशी रागिनी तिवारी भारी संख्या में ब्राह्मण जाति के वोट और दलितों में मायावती के आधार वोट के साथ अपना प्रचार कर रही हैं. विभिन्न राजनीतिक पार्टियों में सूत्रों के अनुसार अमेठी विधानसभा क्षेत्र में 3.48 लाख से अधिक मतदाता हैं. इसमें से ब्राह्मणों की संख्या 80,000 है. ठाकुर 30,000 के आसपास, मुस्लिम 25,000, दलित 30,000 और अन्य पिछड़ा वर्ग के लगभग 1.25 लाख मतदाता हैं. सिंह जहां ठाकुर हैं, वहीं कांग्रेस प्रत्याशी शुक्ला और बसपा प्रत्याशी तिवारी ब्राह्मण हैं.
सपा की महाराजी प्रजापति अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) से हैं. प्रभावशाली स्थानीय भाजपा नेता राजेश आग्रही, जो स्मृति ईरानी के निर्वाचन क्षेत्र के प्रतिनिधि भी हैं, ने पीटीआई- को बताया, ‘‘न तो राहुल गांधी को यहां के लोग स्वीकारने वाले हैं और न ही कोई जाति कारक यहां काम करेगा.’’ चुनाव में टिकट के प्रबल दावेदार रहे आग्रही ने कहा, ‘‘हर गरीब के होठों पर केवल ‘मोदी-योगी’ मंत्र है. बिना किसी भेदभाव के डबल इंजन सरकार लोगों को मुफ्त राशन और स्वास्थ्य लाभ दे रही है.’’
(The above story first appeared on LatestLY on Feb 12, 2022 01:14 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

