देश की खबरें | असम के मुख्यमंत्री ने उल्फा (आई) प्रमुख को शांति वार्ता के लिए आमंत्रित किया

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गुवाहाटी, 15 अगस्त असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने उल्फा (यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम) (आई) के प्रमुख परेश बरुआ से वार्ता की मेज पर आने की रविवार को अपील की।

उन्होंने कोरोना वायरस वैश्विक महामारी के खिलाफ लगातार लड़ाई लड़ने के लिए कोविड-19 योद्धाओं को भी धन्यवाद दिया।

मुख्यमंत्री ने 75वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर आयोजित राज्य के समारोह में कहा कि दशकों में ऐसा पहली बार हो रहा है, जब असम में उल्फा समेत किसी उग्रवादी संगठन के आहूत बंद के बिना स्वतंत्रता दिवस मनाया जा रहा है।

उन्होंने कहा, ‘‘मैं असम के लोगों की ओर से परेश बरुआ से अपील करता हूं कि वह वार्ता के लिए आगे आएं। हमारे राज्य के किसी और युवा की इस कारण मौत नहीं होनी चाहिए।’’

स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस पर कई दशकों से असम बंद का आह्वान करते आ रहे उल्फा (आई) ने इस साल पहली बार ऐसा नहीं किया। संगठन ने वैश्विक महामारी की स्थिति को देखते हुए इस साल मई से एकतरफा संघर्ष विराम की भी घोषणा की है। मुख्यमंत्री ने इससे पहले इस साल मई में सत्ता संभालने के बाद भी बरुआ से शांति वार्ता के लिए आगे आने का आग्रह किया था।

सरमा ने महामारी से निपटने के लिए अथक परिश्रम करने वाले चिकित्सकों, नर्सों, प्रयोगशाला तकनीशियनों और एम्बुलेंस चालकों सहित सभी कोविड-19 योद्धाओं का भी आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि कोविड-19 टीकाकरण कार्यक्रम तेज गति से आगे बढ़ रहा है और अगले एक सप्ताह में 1.5 करोड़ खुराक दी जाएंगी।

उन्होंने मुक्केबाज लवलीना बोरगोहेन को ओलंपिक में कांस्य पदक जीतने के लिए बधाई दी और कहा कि उनकी सफलता सभी के लिए प्रेरणा है।

मुख्यमंत्री ने 26 जुलाई को मिजोरम के साथ अंतरराज्यीय सीमा पर हिंसा में मारे गए छह असम पुलिस कर्मियों को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि असम सरकार राज्य की संवैधानिक सीमा से समझौता किए बिना सीमा विवादों को हल करने के लिए प्रतिबद्ध है।

सरमा ने कहा कि विधानसभा में शुक्रवार को पारित असम मवेशी संरक्षण विधेयक, 2021 राज्य के सांस्कृतिक लोकाचार की रक्षा के लिए राज्य सरकार के संकल्प को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि सरकार जनसंख्या नियंत्रण के माध्यम से गरीबी उन्मूलन को लेकर प्रतिबद्ध है और नशीले पदार्थ, मानव तस्करी और अन्य सामाजिक समस्याओं के खिलाफ अपनी लड़ाई जारी रखेगी।

मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि राज्य सरकार द्वारा जारी स्वतंत्रता सेनानियों की पेंशन को केंद्र के बराबर बढ़ाकर 36,000 रुपये किया जाएगा।

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