देश की खबरें | अशोक विश्वविद्यालय विवाद: प्रोफेसरों ने सब्यसाची दास की बहाली की मांग की

नयी दिल्ली, 16 अगस्त अशोक विश्वविद्यालय के प्रोफेसर सब्यसाची दास द्वारा अपने शोध पत्र पर विवाद के बाद इस्तीफा दिये जाने के कुछ दिन बाद, उनके विभाग के संकाय सदस्यों ने शासी मंडल को पत्र लिखकर कहा है कि वे तब तक नहीं पढ़ाएंगे जब तक दास को बहाल नहीं किया जाता।

विश्वविद्यालय ने पहले शोध पत्र, ‘‘डेमोक्रेटिक बैकस्लाइडिंग इन द वर्ल्ड्स लार्जेस्ट डेमोक्रेसी’’ से दूरी बना ली थी। शोध पत्र में दास ने तर्क दिया था कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने 2019 के लोकसभा चुनावों में करीबी मुकाबले वाली संसदीय सीटों पर असंगत तरीके से मत हासिल किये थे, खासकर उन राज्यों में जहां वह उस समय सत्तारूढ़ पार्टी थी।

यह शोध पत्र 25 जुलाई को ‘सोशल साइंस रिसर्च नेटवर्क’ पर प्रकाशित किया गया था।

दास ने दावा किया था कि ऐसा प्रतीत होता है कि भाजपा द्वारा कथित चुनावी हेरफेर ने मुसलमानों के खिलाफ लक्षित चुनावी भेदभाव का रूप ले लिया है।

आर्थिक विभाग के संकाय सदस्यों ने अब एक खुला पत्र लिखा है, जिसमें चेतावनी दी गई है कि दास के शोध पत्र के गुण-दोषों की जांच की प्रक्रिया में शासी मंडल का हस्तक्षेप हुआ तो संकाय सदस्यों का विश्वविद्यालय छोड़ना शुरू हो जाएगा।

अंग्रेजी और रचनात्मक लेखन विभाग ने भी एक संयुक्त बयान में दास को बहाल करने की मांग की।

पत्र में कहा गया है, ‘‘हमारे सहयोगी प्रोफेसर सब्यसाची दास द्वारा इस्तीफे की पेशकश और विश्वविद्यालय द्वारा इसे जल्दबाजी में स्वीकार किए जाने से अर्थशास्त्र विभाग के संकाय में हमने, हमारे सहयोगियों, हमारे छात्रों और हर जगह अशोक विश्वविद्यालय के शुभचिंतकों ने विश्वविद्यालय के नेतृत्व में जो विश्वास जताया था, वह टूट गया है।’’

इसमें कहा गया है, ‘‘हम शासी निकाय से इस पर तुरंत ध्यान देने का आग्रह करते हैं।’’

पत्र में मांग की गई है कि शासी निकाय बिना शर्त सब्यसाची को उनका पद फिर से सौंप दे और यह भी पुष्टि करे कि यह संकाय शोध के मूल्यांकन में कोई भूमिका नहीं निभायेगा।

दास के शोध पत्र की आलोचना होने के बाद, विश्वविद्यालय ने खुद को इससे अलग कर लिया था और कहा था कि संकाय, छात्रों या कर्मचारियों द्वारा उनकी ‘‘व्यक्तिगत स्तर’’ पर कोई भी सोशल मीडिया गतिविधि या सार्वजनिक सक्रियता उसके रुख को प्रतिबिंबित नहीं करती है।

दास ने बाद में इस्तीफा दे दिया था और विश्वविद्यालय ने उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया था।

दास के शोध पत्र के अनुसार, पिछले चुनावों में भाजपा या कांग्रेस द्वारा ‘‘असंगत’’ जीत कभी नहीं देखी गई थी, और यह भी कहा था कि ऐसी जीत मुख्य रूप से उस समय भाजपा शासित राज्यों में देखी गई थी।

प्रोफेसरों के खुले पत्र में कहा गया है, ‘‘दास ने अकादमिक कार्य के किसी भी स्वीकृत मानदंड का उल्लंघन नहीं किया है। अकादमिक शोध का मूल्यांकन समीक्षा की प्रक्रिया के माध्यम से पेशेवर रूप से किया जाता है।’’

इसमें कहा गया है, ‘‘हम इसकी कड़े शब्दों में निंदा करते हैं और भविष्य में शासी निकाय द्वारा अर्थशास्त्र के अलग-अलग संकाय सदस्यों के शोध का मूल्यांकन करने के किसी भी प्रयास में सहयोग करने से सामूहिक रूप से इनकार करते हैं।’’

शासी मंडल में अशोक विश्वविद्यालय के कुलाधिपति रुद्रांग्शु मुखर्जी, कुलपति सोमक रायचौधरी, मधु चांडक, पुनीत डालमिया, आशीष धवन, प्रमथ राज सिन्हा, सिद्धार्थ योग, दीप कालरा और जिया लालका शामिल हैं।

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