मुंबई, 10 अक्टूबर मुंबई की एक अदालत ने मंगलवार को कलाकार चिंतन उपाध्याय को अपनी अलग रह रही पत्नी हेमा उपाध्याय की हत्या की साजिश रचने के आरोप में सश्रम आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
हेमा और उनके वकील हरेश भंभानी की 11 दिसंबर 2015 को हत्या कर दी गई थी और उनके शवों को गत्ते के डिब्बों में बंद कर मुंबई के कांदिवली इलाके में खाई में फेंक दिया गया था।
दिंडोशी अदालत के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश एस वाई भोसले ने पांच अक्टूबर को चिंतन को अपनी पत्नी की हत्या के अपराध में शामिल होने और साजिश रचने का दोषी ठहराया था।
इस मामले में तीन अन्य आरोपियों टेम्पो चालक विजय राजभर और प्रदीप राजभर तथा शिवकुमार राजभर को भी दोषी पाया गया। उन्हें भी सश्रम आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है।
ये तीनों फरार आरोपी विद्याधर राजभर के साथ काम करते थे।
अदालत में गत शनिवार को सजा के संबंध में हुई बहस के दौरान उपाध्याय ने कहा था, ''मेरी अंतरात्मा साफ है और मैंने कोई अपराध नहीं किया है। मैं निर्दोष हूं।''
उन्होंने कहा, ''हालांकि, अदालत ने मुझे दोषी पाया है तो कोई तरस नहीं खाया जाए। अदालत जो भी सजा तय करेगी वह मुझे मंजूर है।''
हत्या करने का आरोपी विद्याधर राजभर फरार है।
उच्चतम न्यायालय द्वारा सितंबर, 2021 में जमानत दिए जाने से पहले चिंतन लगभग छह साल तक जेल में था।
चिंतन ने अदालत के समक्ष अपने अंतिम बयान में दावा किया था कि पुलिस दोहरे हत्याकांड को सुलझाने में असमर्थ रही और इसलिए उसके और हेमा के वैवाहिक विवाद का फायदा उठाकर उसे झूठे मामले में फंसा दिया गया।
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