देश की खबरें | हरियाणा से चंडीगढ़ प्रदर्शन करने जा रहे करीब 100 किसान हिरासत में लिए गए
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अंबाला/संगरूर, 22 अगस्त बाढ़ से हुए नुकसान के लिए मुआवजे की मांग को लेकर हरियाणा से चंडीगढ़ प्रदर्शन करने जा रहे करीब 100 किसानों को मंगलवार को हिरासत में ले लिया गया। पुलिस ने यह जानकारी दी।
पंजाब के संगरूर जिले के लोंगोवाल में, किसानों ने सोमवार को पूर्व निर्धारित प्रदर्शन में चंडीगढ़ जा रहे कुछ किसान नेताओं को हिरासत में लेने के खिलाफ अपना 'धरना' जारी रखा। प्रदर्शनकारी किसानों ने जब जिले में एक राजमार्ग को अवरुद्ध करने की कोशिश की तो उनकी पुलिस के साथ झड़प हो गई।
केंद्र शासित प्रदेश में विरोध के मद्देनजर पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ की अंतरराज्यीय सीमाओं पर सुरक्षा कड़ी कर दी गई, जबकि संगरूर में, संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) के कुछ नेता मंगलवार को वहां आयोजित विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए।
संगरूर में हुई झड़प में ट्रैक्टर-ट्रॉली के नीचे आने से एक किसान की मौत हो गई थी, जबकि पांच पुलिसकर्मी घायल हो गए थे। पुलिस ने कई किसानों पर हत्या के प्रयास सहित भारतीय दंड संहिता की सुसंगत धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की है।
किसान मजदूर संघर्ष समिति, भारतीय किसान यूनियन (क्रांतिकारी), बीकेयू (एकता आजाद), आजाद किसान समिति, दोआबा, बीकेयू (बेहरामके) और भूमि बचाओ मुहिम सहित 16 किसान संगठनों ने यहां प्रदर्शन करने का आह्वान किया है।
पुलिस ने विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि लगभग 100 किसानों को हरियाणा के अंबाला में शंभू सीमा पर उस समय हिरासत में लिया गया जब वे चंडीगढ़ की ओर जा रहे थे। उसने कहा कि उन्हें बसों में पुलिस थानों में ले जाया गया। पुलिस के मुताबिक किसान जबरन केंद्र शासित प्रदेश की ओर बढ़ने की कोशिश कर रहे थे।
पुलिस ने बताया कि जब किसानों को चंडीगढ़ की ओर जाने की अनुमति नहीं दी गई तो उन्होंने अंबाला के पास हिसार-चंडीगढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग को भी अवरुद्ध कर दिया।
अंबाला-चंडीगढ़ मार्ग पर पुलिस ने जांच चौकी बनाई थी और वहां से गुजरने वाले वाहनों की भी तलाशी ली जा रही थी। अंबाला रेंज के पुलिस महानिरीक्षक सिबाश कबिराज ने भी अपने अधिकार क्षेत्र में स्थिति का जायजा लिया।
भारी पुलिस तैनाती और कई जगहों पर कड़ी जांच के कारण कई किसान शंभू बॉर्डर तक नहीं पहुंच सके।
चंडीगढ़ में, किसानों को केंद्र शासित प्रदेश में प्रवेश करने से रोकने के लिए प्रवेश और निकास बिंदुओं पर सुरक्षा कर्मियों को तैनात किया गया है।
सोमवार को हरियाणा के अंबाला से भाकियू (शहीद भगत सिंह) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमरजीत सिंह मोहरी समेत किसान नेताओं को पुलिस ने हिरासत में ले लिया, जबकि पंजाब में किसान मजदूर संघर्ष समिति (केएमएससी) के अध्यक्ष सरवन सिंह पंढेर, सत्कार सिंह कोटली को पुलिस ने हिरासत में लिया। हिरासत में लिए गए लोगों में केएमएससी, भाकियू-बेहरामके के बोहर सिंह भी शामिल थे।
आम आदमी पार्टी (आप) की पंजाब इकाई के मुख्य प्रवक्ता मलविंदर सिंह कांग ने एक बयान में कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना पंजाब सरकार की जिम्मेदारी है और वह अपनी जिम्मेदारी निभा रही है।
पंजाब में सत्तारूढ़ दल के नेता ने किसान संगठनों से शांति बनाए रखने और सरकार के साथ सहयोग करने की भी अपील की।
संगरूर के लोंगोवाल में किसानों के विरोध प्रदर्शन में क्रांतिकारी किसान यूनियन के नेता गुरमीत सिंह ने कहा कि उनकी मांग हिरासत में लिए गए नेताओं की रिहाई और बाढ़ प्रभावित किसानों के लिए मुआवजा है।
उन्होंने कहा कि बाढ़ से हुए नुकसान के मुआवजे के मुद्दे पर एसकेएम की बैठक दो सितंबर को चंडीगढ़ में होगी।
किसान नेता पंजाब समेत पूरे उत्तर क्षेत्र में बाढ़ से हुए नुकसान के लिए केंद्र से 50,000 करोड़ रुपये के पैकेज की मांग कर रहे हैं ।
वे फसल के नुकसान के लिए 50,000 रुपये प्रति एकड़ मुआवजा, क्षतिग्रस्त घर के लिए पांच-पांच लाख रुपये और बाढ़ में मारे गए व्यक्तियों के परिवार के लिए 10- 10 लाख रुपये मुआवजे की भी मांग कर रहे हैं।
किसानों ने दावा किया था कि उनके कई नेताओं को सोमवार को पंजाब के विभिन्न हिस्सों में हिरासत में लिया गया, जबकि कुछ किसानों को प्रदर्शन में शामिल होने से पहले ही हरियाणा के अंबाला और कुरुक्षेत्र में भी हिरासत में लिया गया।
उन्होंने अपने नेताओं की हिरासत के विरोध में पंजाब के अमृतसर, तरनतारन और होशियारपुर में कुछ टोल प्लाजा पर घेराबंदी भी की थी।
विरोध प्रदर्शन के दौरान किसानों ने टोल प्लाजा कर्मियों को वाहनों से शुल्क वसूलने नहीं दिया।
आप प्रवक्ता ने कहा, ‘‘मैं किसान संगठनों से अपील करता हूं कि उन्हें लोगों के लिए परेशानी का कारण बनने की बजाय सरकार के साथ मिलकर समस्या का समाधान करने पर ध्यान देना चाहिए।’’
कांग ने बयान में कहा, ‘‘पंजाब में बंद टोल प्लाजा और सड़कों से लोगों को परेशानी होगी। शांतिपूर्ण ढंग से विरोध करना हर किसी का लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन विरोध के दौरान शांति और व्यवस्था बनाए रखी जानी चाहिए।’’
उन्होंने किसानों को मुआवजे का आश्वासन दिया और कहा कि पंजाब के विभिन्न इलाकों में 'गिरदावरी' (नुकसान का आकलन करने के लिए सर्वेक्षण) की प्रक्रिया चल रही है।
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