क्या एलन मस्क अमेरिकी सरकार पर नियंत्रण हासिल कर रहे हैं? हमे क्यों चिंतित होना चाहिए

अमेरिका के कई लोग इस बात से भयभीत हैं कि दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति एलन मस्क को हाल के हफ्तों में अमेरिकी सरकार के विभिन्न कार्यालयों में ‘हस्तक्षेप’ की अनुमति दी गई है.

सिडनी, 12 फरवरी : अमेरिका के कई लोग इस बात से भयभीत हैं कि दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति एलन मस्क को हाल के हफ्तों में अमेरिकी सरकार के विभिन्न कार्यालयों में ‘हस्तक्षेप’ की अनुमति दी गई है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के समर्थन तथा भरोसेमंद लोगों की एक छोटी सी टीम के सहयोग से मस्क ने अमेरिका की विशाल संघीय नौकरशाही पर सफलतापूर्वक ‘‘नियंत्रण’’ हासिल कर लिया है. मंगलवार को ट्रंप ने एक शासकीय आदेश पर हस्ताक्षर किए, जिससे मस्क को और भी अधिक शक्ति मिल गई. इसके तहत संघीय एजेंसियों को अपने कर्मचारियों की संख्या में कटौती करने और नई नियुक्तियों को प्रतिबंधित करने में मस्क की अगुवाई वाले ‘सरकारी दक्षता विभाग’ (जिसे डीओजीई के नाम से जाना जाता है) के साथ सहयोग करना होगा.

ट्रंप प्रशासन में एक ‘‘विशेष’’ सरकारी कर्मचारी के रूप में शामिल होने के बाद मीडिया को दी गई अपनी पहली टिप्पणी में, मस्क ने इस आलोचना का भी जवाब दिया कि वह अमेरिकी सरकार पर ‘‘जबरन नियंत्रण’’ हासिल कर रहे हैं. लोगों ने प्रमुख सरकारी सुधार के लिए मतदान किया था और यही परिणाम उन्हें मिलने वाला है. क्या मस्क के कदम सरकार पर ‘‘कब्जा’’ या तख्तापलट जैसी हैं? मेरा तर्क है कि यह ‘‘देश पर कब्जा’’ करने का एक रूप है. आइये इसके मायने समझते हैं. यह तख्तापलट या स्व-तख्तापलट क्यों नहीं है, क्योंकि सरकारी दक्षता और उत्पादकता को अधिकतम करने के बहाने, डीओजीई ने काफी शक्ति अर्जित की है. इसने लगभग सभी सरकारी भुगतानों के लिए जिम्मेदार विशाल प्रणाली में ‘‘घुसपैठ’’ कर संवेदनशील डेटाबेस और निजी मेडिकल रिकॉर्ड के मामले का उल्लंघन किया है. इसने कई संघीय एजेंसियों की कंप्यूटर प्रणाली तक पहुंच प्राप्त कर ली है. यह भी पढ़ें : प्रधानमंत्री मोदी ने माजारग्वेज कब्रिस्तान का दौरा कर भारतीय सैनिकों को श्रद्धांजलि दी

वाशिंगटन में कई संघीय कानूनों का स्पष्ट उल्लंघन करते हुए मस्क के तूफानी अभियान ने न केवल भ्रम की स्थिति पैदा की है, बल्कि इसे समझाना भी मुश्किल है. कुछ इतिहासकारों और टिप्पणीकारों द्वारा समर्थित एक लोकप्रिय तर्क यह है कि मस्क की कार्रवाई तख्तापलट के बराबर है. उनका तर्क है कि यह सत्ता के भौतिक केंद्रों पर कब्जा करने के पारंपरिक अर्थ में तख्तापलट नहीं है. बल्कि, यह लोकतांत्रिक प्रथाओं को खत्म करने और मानवाधिकारों का उल्लंघन करने की कोशिश कर रहे एक अनिर्वाचित समूह द्वारा डिजिटल बुनियादी ढांचे पर कब्जा करना है. हालांकि, यह तकनीकी रूप से सही नहीं है क्योंकि तख्तापलट की सबसे व्यापक रूप से स्वीकृत परि है: देश के तंत्र के भीतर सेना या अन्य अभिजात वर्ग द्वारा असंवैधानिक साधनों का उपयोग करके देश के प्रमुख को पद से हटाने का एक खुला प्रयास.

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