जरुरी जानकारी | चीनी मिलों, डिस्टिलरी को एथनॉल क्षमता बढ़ाने के लिये 12,500 करोड़ रुपये के कर्ज की मंजूरी

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. खाद्य मंत्रालय ने शुक्रवार को कहा कि उसने 185 चीनी मिलों और डिस्टिलरी को सालाना करीब 468 करोड़ लीटर एथेनॉल क्षमता जोड़ने के लिये 12,500 करोड़ रुपये के कर्ज को लेकर सैद्धांतिक मंजूरी दी है। पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथनॉल मिलाने के लक्ष्य को हासिल करने के प्रयास के तहत यह कदम उठाया गया है।

नयी दिल्ली, 20 नवंबर खाद्य मंत्रालय ने शुक्रवार को कहा कि उसने 185 चीनी मिलों और डिस्टिलरी को सालाना करीब 468 करोड़ लीटर एथेनॉल क्षमता जोड़ने के लिये 12,500 करोड़ रुपये के कर्ज को लेकर सैद्धांतिक मंजूरी दी है। पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथनॉल मिलाने के लक्ष्य को हासिल करने के प्रयास के तहत यह कदम उठाया गया है।

पिछले दो साल में, 70 एथनॉल परियोजनाओं के लिये 3,600 करोड़ रुपये कर्ज की मंजूरी दी गयी थी।

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मंत्रालय गन्ने से एथनॉल उत्पादन के अलावा सार्वजनिक क्षेत्र के भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई)के पास उपलब्ध अधिशेष चावल का उपयोग कर एथनॉल बनाने का प्रयास कर रही है।

इस पहल का मकसद पेट्रोल में एथनॉल मिश्रण को बढ़ावा देना है। फिलहाल पेट्रोल में करीब 5 प्रतिशत एथनॉल मिलाया जा रहा है।

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खाद्य मंत्रालय ने एक बयान में कहा, ‘‘शीरा आधारित डिस्टि‍लरियों के लिए एथनॉल ब्‍याज सहायता योजना के अंतर्गत सरकार ने सितंबर 2020 में चीनी मिलों और डिस्टि‍लरियों से आवेदन आमंत्रित करने के लिए 30 दिन का समय दिया। डीएफपीडी (खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग) द्वारा इन आवेदनों की जांच की गई।’’

मंत्रालय के अनुसार लगभग 185 आवेदकों (85 चीनी मिलें तथा 100 शीरा आधारित एकल डिस्‍टि‍लरियों) को प्रतिवर्ष 468 करोड़ लीटर की क्षमता जोड़ने के लिए सैद्धांतिक रूप में 12,500 करोड़ रुपये के ऋण के लिए सैद्धांतिक मंजूरी दी गयी है।

बयान में कहा गया है कि ये परियोजनाएं 3-4 साल में पूरी हो जाएंगी और इससे मिश्रण का लक्ष्य हासिल किया जा सकेगा।

मंत्रालय ने कहा कि सामान्य चीनी सत्र में करीब 320 लाख टन चीनी का उत्पादन होताा है जबकि खपत 260 लाख टन है।

इस तरह 60 लाख टन चीनी बची रह जाती है और इसकी बिक्री नहीं हो पाती। इससे 19,000 करोड़ रुपये की राशि प्रत्‍येक वर्ष चीनी मिलों के लिए रूकी पड़ी रह जाती है। इससे चीनी मिलों की नकदी पर प्रभाव पड़ता है और किसानों के गन्‍ने की बकाया राशि बढ़ती जाती है।

जरूरत से अधिक चीनी भंडार से निपटने के लिए सरकार द्वारा चीनी मिलों को निर्यात के लिए प्रोत्‍साहित किया जा रहा है। इसके लिए सरकार वित्तीय सहायता दे रही है।

बयान के अनुसार लेकिन भारत विकासशील देश होने के नाते चीनी के निर्यात को लेकर विपणन और परिवहन के लिए डब्‍ल्‍यूटीओ (विश्व व्यापार संगठन) व्‍यवस्‍थाओं के अनुसार केवल 2023 तक ही वित्तीय सहायता दे सकता है।

सरकार चीनी की अधिकता से निपटने, चीनी उद्योगों की स्थिति में सुधार तथा गन्‍ना किसानों को समय पर बकाये का भुगतान करने के लिए दीर्घकालीन समाधान के रूप में जरूरत से अधिक गन्‍ना और चीनी एथनॉल क्षेत्र को देने के लिए प्रोत्‍साहित कर रही है ताकि पेट्रोल में मिलाने के लिए तेल विपणन कंपनियों को आपूर्ति की जा सके।

इससे न केवल कच्‍चे तेल की आयात पर निर्भरता कम होती है बल्कि इससे गन्‍ना किसानों की आय में भी वृद्धि होगी।

सरकार ने 2022 तक ईंधन स्तर के 10 प्रतिशत एथनॉल पेट्रोल में मिलाने का लक्ष्‍य तय किया था जबकि 2030 तक 20 प्रतिशत मिश्रण का लक्ष्य रखा गया था। लेकिन अब सरकार 20 प्रतिशत के मिश्रण लक्ष्‍य समय से पहले प्राप्‍त करने की योजना तैयार कर रही है।

इसके लिलये सरकार चीनी मिलों/डिस्‍टि‍लरियों को नई डिस्टि‍लरी स्‍थापित करने और वर्तमान डिस्‍टि‍लिंग क्षमता बढ़ाने के लिए प्रोत्‍साहित कर रही है।

सरकार चीनी मिलों और डिस्‍टि‍लरियों को बैंक से ऋण लेने के मामले में अधिकतम 6 प्रतिशत ब्याज दर पर पांच साल के लिए ऋण सहायता दे रही है ताकि चीनी मिलें और डिस्टि‍लरी अपनी परियोजनाएं स्‍थापित कर सकें।

पिछले दो वर्षों में 70 ऐसी एथनॉल परियोजनाओं (शीरा आधारित डिस्टि‍लरी) के लिए 3600 करोड़ रुपये के ऋण को मंजूरी दी गई है। इसका उद्देश्‍य क्षमता बढ़ाकर 195 करोड़ लीटर करना है। इन 70 परियोजनाओं में से 31 परियोजनाएं पूरी हो गई हैं और इससे अभी तक 102 करोड़ लीटर की क्षमता का इजाफा हुआ है।

शीरा आधारित डिस्टि‍लरियों की वर्तमान स्‍थापित क्षमता 426 करोड़ लीटर तक पहुंच गई है।

बयान के अनुसार गन्‍ना/चीनी को एथनॉल के लिए दिए जाने से ही मिश्रण लक्ष्‍य हासिल नहीं किया जा सकता, इसीलिए सरकार अनाज भंडारों से एथनॉल उत्‍पादन के लिए डिस्टि‍लरियों को प्रोत्‍साहित कर रही है।

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