देश की खबरें | चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति : परामर्श प्रणाली के पक्ष में पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त व राजद सांसद
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नयी दिल्ली, 23 फरवरी पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) टी एस कृष्णमूर्ति और राष्ट्रीय जनता दल के सांसद मनोज झा ने मुख्य चुनाव आयुक्त एवं चुनाव आयुक्तों (ईसी) की नियुक्ति के लिए परामर्श प्रणाली बनाने का बृहस्पतिवार को समर्थन किया ।
एक ऑनलाइन कार्यक्रम में हिस्सा लेते हुए कृष्णमूर्ति ने कहा कि नियुक्ति की कॉलेजियम प्रणाली से चुनाव आयोग की विश्वसनीयता बढ़ेगी। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि मुख्य चुनाव आयुक्त और दो चुनाव आयुक्तों के चयन के लिए पूर्व नौकरशाहों से इतर जाया जा सकता है।
सीईसी और ईसी के लिए कम से कम छह साल के कार्यकाल के प्रस्ताव पर उन्होंने कहा कि लंबा कार्यकाल मददगार है लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि छोटे कार्यकाल से आयोग की विश्वसनीयता घटेगी।
फरवरी, 2004 से मई, 2005 तक चुनाव आयोग की कमान संभाल चुके कृष्णमूर्ति ने मुख्य चुनाव आयुक्त तथा उच्चतम एवं उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों की तर्ज पर चुनाव आयुक्तों को भी संवैधानिक सुरक्षा प्रदान किये जाने की पैरवी की।
मुख्य चुनाव आयुक्त और संवैधानिक अदालतों के न्यायाधीशों को महाभियोग प्रक्रिया के मार्फत ही संसद द्वारा उनके पदों से हटाया जा सकता है लेकिन चुनाव आयुक्तों को मुख्य चुनाव आयुक्त की सिफारिश पर सरकार हटा सकती है।
झा ने कहा कि चुनाव आयोग भारत में संसदीय लोकतंत्र की धुरी है। उन्होंने एसोसिएशन फोर डेमोक्रेटिक रिफार्म्स द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में कहा कि यदि आयोग की विश्वसनीयता खत्म होती है तो संसदीय लोकतंत्र महज ‘कंकाल’ रह जाएगा।
उन्होंने कहा कि वैसे तो वह आश्वस्त नहीं है कि चुनाव आयुक्तों के चयन के लिए कॉलेजियम प्रणाली से विश्वसनीयता के मुद्दे का समाधान होगा या नहीं, लेकिन वह इस मूल सिद्धांत पर कृष्णमूर्ति की राय से सहमत हैं कि सामूहिक निर्णय बेहतर है ।
दोनों का कहना था कि राजनीतिक दल चुनाव सुधार के मुद्दे पर मौन हैं।
पिछले साल नवंबर में उच्चतम न्यायालय की एक पीठ ने चुनाव आयुक्तों और मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति पर ‘संविधान के मौन’ होने एवं कानून के अभाव को ‘चिंताजनक प्रवृति’ बताया था ।
न्यायमूर्ति के एम जोसेफ की अगुवाई वाली पीठ ने कहा था कि उसका प्रयास एक ऐसी व्यवस्था लाना है ताकि ‘सर्वश्रेष्ठ पात्र व्यक्ति’ मुख्य चुनाव आयुक्त बने।
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