(के जे एम वर्मा)
बीजिंग, 31 अगस्त चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने चेक गणराज्य के अधिकारी की ताइवान यात्रा को ‘भड़काने वाला और अदूरदर्शी कदम’ करार देते हुए सोमवार को चेतावनी दी कि जो कोई भी ‘एक चीन’ नीति को चुनौती देगा, उसे भारी कीमत चुकानी पड़ेगी।
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चीन सरकार अमेरिका के स्वास्थ्य मंत्री एलेक्स एजार की हाल की ताइपे यात्रा के बाद गहरे दबाव में है। एजार ताइवान की यात्रा करने वाले अमेरिका के पहले शीर्ष स्तरीय अधिकारी हैं। चीन ताइवान को अपना हिस्सा बताता है।
एजार ने इसी माह के दूसरे सप्ताह में ताइवान की यात्रा की थी और वहां की राष्ट्रपति साई इंग-वेन से भेंटवार्ता की थी। 1979 में अमेरिका द्वारा ताईपी को चीन का हिस्सा होने की राजनयिक मान्यता देने के बाद वह ताईवान की यात्रा करने वाले अमेरिका के पहले शीर्ष स्तरीय कैबिनेट सदस्य हैं। साई इंग-वेन चीन से ताइवान की आजादी की प्रबल पैरोकार हैं।
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एजार की ताइवान यात्रा को चीन के लिए एक बहुत बड़ा राजनयिक झटका समझा गया । चीन का कहना है कि उसकी ‘एक चीन नीति’ उसकी विदेश नीति का मूलतत्व है और उसे उन सभी देशों ने मान्यता दी है जिन्होंने उसके साथ राजनयिक संबंध स्थापित की है।
एजार के बाद चेक गणराज्य के सीनेट के अध्यक्ष मिलोस वीसट्रिसिल चीन की पूर्व चेतावनी को नजरअंदाज करते हुए रविवार को ताइवान पहुंचे और उन्होंने ताइवान के शीर्ष अधिकारियों के साथ भेंटवार्ता की।
चीन के सरकारी ग्लोबल टाइम्स ने कहा कि चेक राष्ट्रपति मिलो जेमान के विरोध के बावजूद वीसिट्रिसिल अपनी यात्रा पर गये।
यूरोपीय संघ के देशों की अपनी यात्रा के तहत सोमवार को जर्मनी पहुंचे वांग ने कहा कि चीन अपनी ‘एक चीन’ नीति का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं करेगा।
खबर के अनुसार वांग ने चेक के सीनेट के अध्यक्ष की ताइवान यात्रा का हवाला देते हुए कहा कि एक-चीन नीति को चुनौती देने वाले किसी को भी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी।
उन्होंने कहा कि ताइवान चीन क्षेत्र का अविभाज्य हिस्सा है तथा ताइवान मुद्दे पर एक चीन नीति को चुनौती देना यानी 1.4 अरब चीनियों को दुश्मन बनाना एवं अंतरराष्ट्रीय विश्वास एवं आचरण का उल्लंघन करना है।
चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजियान ने वांग के बयान पर सोमवार को कहा कि चेक गणराज्य में चीन विरोधी शक्तियां जानबूझकर चीन की संप्रभुता पर बाधा खड़ी करती हैं और चीन के अंदरूनी मामलों में दखल देती हैं।
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