देश की खबरें | मतदाता सूची में हेराफेरी के प्रयास को लेकर जम्मू-कश्मीर में चिंता की लहर: पीएजीडी

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श्रीनगर, 15 अक्टूबर गुपकर घोषणापत्र गठबंधन (पीएजीडी) ने मतदाता सूची में संशोधन के नाम पर हेरफेर का आरोप लगाते हुए शनिवार को कहा कि इसने पूरे जम्मू-कश्मीर में चिंता की लहर पैदा कर दी है और लोगों तथा राजनीतिक दलों को इसके खिलाफ आवाज उठानी चाहिए।

गठबंधन की बैठक के बाद यहां पत्रकारों से बातचीत में पीएजीडी के प्रवक्ता और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के नेता एम वाई तारिगामी ने केंद्रशासित प्रदेश के बाहर के नए मतदाताओं के पंजीकरण की सुविधा पर जम्मू प्रशासन के अब वापस लिए जा चुके आदेश का उल्लेख किया और पूछा, “क्या था जरूरत थी?"

उन्होंने कहा, ‘‘परिसीमन के नाम पर प्रक्रिया शुरू की गई थी, लेकिन मतदाता सूची में संशोधन के नाम पर हेरफेर की कोशिश ने जम्मू और कश्मीर के लोगों में चिंता की लहर पैदा कर दी है।’’

तारिगामी ने कहा कि सबसे पहले, जम्मू कश्मीर के मुख्य चुनाव अधिकारी ने कहा कि लगभग 25 लाख नए मतदाता जोड़े जाएंगे और यहां तक ​​कि गैर-स्थानीय लोग भी केंद्रशासित प्रदेश में मतदाता के रूप में अपना पंजीकरण करा सकते हैं, लेकिन कुछ दिन बाद सरकार ने स्पष्ट किया कि यह मीडिया द्वारा पैदा की गई एक गलत सूचना थी।

उन्होंने शीतकालीन राजधानी में एक वर्ष से अधिक समय से निवास करने वालों को निवास प्रमाण पत्र जारी करने के लिए तहसीलदारों को अधिकृत करने और उन्हें मतदाता सूची के चल रहे विशेष सारांश संशोधन में शामिल करने के आदेश का हवाला देते हुए कहा, "फिर, एक सर्वदलीय बैठक में, उपराज्यपाल ने कहा कि यह एक गलत धारणा है। अगर यह गलत धारणा थी, तो अब क्या है? जम्मू से एक उपायुक्त एक आदेश के साथ आता है।"

यह आदेश बाद में वापस ले लिया गया।

पीएजीडी के प्रवक्ता ने लोगों और निर्वाचन आयोग से आदेश को पढ़ने और इसके निहितार्थों को समझने की अपील की।

उन्होंने कहा, "हम नहीं जानते कि कौन चुनावी प्रक्रिया का उल्लंघन कर रहा है और कौन निर्वाचन आयोग के अधिकार को रौंद रहा है? हम नहीं जानते कि यह किसके निर्देश पर किया जा रहा है? हमें नहीं बताया जा रहा है कि ऐसा क्यों किया जा रहा है? लेकिन, अगले दिन, प्रेस को मौखिक रूप से बताया जाता है कि इसे रद्द कर दिया गया है..भाजपा को छोड़कर, सभी दलों ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों की हत्या करार दिया है।’’

तारिगामी ने कहा कि लोगों और राजनीतिक दल संविधान के दायरे में रहकर अपनी आवाज उठाएं।

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