देश की खबरें | आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में भाजपा सांसद के पिता की अग्रिम जमानत अर्जी खारिज

वेरावल, दो जून गुजरात के गिर सोमनाथ जिले की एक सत्र अदालत ने एक चिकित्सक को आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में शुक्रवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सांसद राजेश चूड़ासमा के पिता नारणभाई चूड़ासमा की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी।

वेरावल कस्बे में सत्र न्यायाधीश पी जी गोकणी की अदालत ने 62 वर्षीय नारणभाई की अग्रिम जमानत अर्जी खारिज करते हुए कहा कि मामले में पुलिस जांच अभी शुरू ही हुई है और इस समय किसी भी तरह की राहत देना उचित नहीं होगा, खासतौर पर उस वक्त जबकि अपराध गंभीर प्रकृति का है।

शहर के चिकित्सक डॉ अतुल चाग गत 12 फरवरी को अपने घर पर पंखे से लटके हुए मृत मिले थे। इस मामले में मई महीने में चूड़ासमा पिता-पुत्र के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गयी थी।

पुलिस ने जूनागढ़ लोकसभा के सदस्य और उनके पिता के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धाराओं 306 (आत्महत्या के लिए उकसाने) और 506-2 (आपराधिक धमकी) के तहत प्राथमिकी दर्ज की थी।

सांसद ने अभी तक कोई याचिका दायर नहीं की है, वहीं नारणभाई ने कुछ दिन पहले अनेक आधार पर अग्रिम जमानत के लिए आवेदन किया था।

चिकित्सक की मौत के तीन महीने बाद दर्ज प्राथमिकी के अनुसार चूड़ासमा परिवार के पिछले 20 साल से डॉक्टर से करीबी रिश्ते थे और उन्होंने 2008 से चिकित्सक से करीब 1.75 करोड़ रुपये उधार लिये थे। उन्होंने कथित रूप से डॉ चाग को कुछ चेक दिये थे।

हालांकि जब दोनों ने बार-बार संपर्क करने पर कोई जवाब नहीं दिया तो चाग ने 90 लाख रुपये का एक चेक बैंक में जमा कर दिया लेकिन यह ‘बाउंस’ हो गया।

प्राथमिकी में आरोप हैं कि डॉ चाग के खुदकुशी करने से कुछ दिन पहले दोनों ने उनके साथ बदसलूकी की थी और पैसे मांगने पर उनके बेटे हितार्थ को जान से मारने की धमकी दी थी। इसमें कहा गया है कि धमकियों और पैसा गंवाने के डर से बुरी तरह निराश डॉक्टर ने यह कदम उठाया।

नारणभाई ने अपनी याचिका में दावा किया है कि उनके खिलाफ अभी तक कोई ठोस सबूत नहीं मिला है, लेकिन पुलिस ने अचानक से उनके खिलाफ महज इसलिए प्राथमिकी दर्ज कर ली क्योंकि उनका बेटा सांसद है।

उन्होंने कहा कि पुलिस जांच में साफ हुआ है कि चेक ‘बाउंस’ होने और आत्महत्या की घटना में कोई सीधा संबंध नहीं है क्योंकि दोनों एक साल से अधिक समय के अंतराल से हुईं।

याचिकाकर्ता ने पुलिस की एक जांच का हवाला देते हुए दावा किया कि डॉ चाग ने दरअसल शेयर बाजार में करीब 2.97 करोड़ रुपये गंवा दिये थे और मुमकिन है कि उन्होंने इस सदमे के कारण अपनी जान ले ली।

सरकारी वकील सी एन कक्कड़ ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि अगर इस स्तर पर याचिकाकर्ता को कोई राहत दी गयी तो वह गवाहों को प्रभावित करके जांच में बाधा पैदा कर सकते हैं।

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