नयी दिल्ली, दो सितंबर चिकनगुनिया से लड़ने के लिए शरीर में बनी एंटीबॉडी गंभीर संक्रमण से उबरने के दौर में कहीं अधिक प्रभावी होती है। यह खुलासा लांसेट के दक्षिण पूर्व क्षेत्रीय स्वास्थ्य जर्नल में प्रकाशित अध्ययन पत्र में हुआ है।
भुवनेश्वर स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), कर्नाटक के मणिपाल विषाणु रोग विज्ञान संस्थान और नयी दिल्ली के ‘इंटरनेशनल सेंटर फॉर जेनेटिक इंजीनियरिंग एंड बायोटेक्नोलॉजी’ (आईसीजीईबी) सहित भारतीय संस्थानों के अध्ययन में कहा गया है कि किसी निश्चित समय में रोग की गतिशीलता को समझने में अध्ययन के ये नतीजे महत्वपूर्ण हैं।
इसमें कहा गया कि भले ही एंटीबॉडी वायरस से संक्रमण की वजह से उत्पन्न हुए लेकिन सीरोलॉजिकल विश्लेषण से संकेत मिलता है कि चिकनगुनिया के रोगियों के रक्त सीरम में मौजूद एंटीबॉडी की क्षमता संक्रमण के बजाय उससे उबरने के दौरान अधिक होती है।
चिकनगुनिया की बीमारी (सीएचआईकेडी), मच्छरों द्वारा प्रसारित चिकनगुनिया वायरस से होती है जिसमें बुखार और जोड़ों का दर्द होता है और यह एक वैश्विक जन स्वास्थ्य खतरा है। इस दौरान मरीजों को सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द, जोड़ों में सूजन या दाने की समस्या भी हो सकती है।
वर्तमान अध्ययन दो समूहों में किया गया जिसमें पूरे भारत के 13 आरोग्य केंद्र शामिल थे। इन आरोग्य केंदों में तमिलनाडु, कर्नाटक, त्रिपुरा, असम और अन्य राज्य की स्वास्थ्य सुविधाएं शामिल थीं।
अध्ययन के दौरान अनुसंधानकर्ताओं ने 2016 और 2021 के बीच प्रयोगशाला द्वारा पुष्टि किए गए 196 गंभीर रूप से संक्रमित चिकनगुनिया के मरीजों और 51 युग्मित सीरम नमूने (तीव्र और एक महीने के अनुवर्ती) एकत्र किए। ‘गंभीर मरीजों के नमूने’वे थे जो लक्षण शुरू होने और ‘स्वास्थ्य लाभ’ के बाद पहले दो सप्ताह में एकत्र किए गए थे जबकि ‘सामान्य नमूने’ वे थे जो संक्रमण के एक महीने बाद एकत्र किए गए थे।
रोग की गंभीरता और स्वास्थ्य सुधार का आकलन करने के लिए आयु, लिंग, तापमान, नैदानिक रोग गतिविधि सूचकांक (सीडीएआई) स्कोर के साथ-साथ लक्षण, सह-रुग्णता, पूर्ण रक्त गणना और यात्रा जैसे अन्य जानकारी भी प्रश्नावली के जरिये एकत्र की गई।
अनुसंधानकर्ताओं ने पाया कि संक्रमण के पहले दो सप्ताह के दौरान अक्सर देखे जाने वाले लक्षणों में जोड़ों का दर्द (91.84 प्रतिशत), मांसपेशियों में दर्द (90.82 प्रतिशत), सिरदर्द (92.35 प्रतिशत) और सुबह शरीर में अकड़न (56.47 प्रतिशत) शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि अन्य कम देखे जाने वाले लक्षण आंखों में संक्रमण और दर्द, मिचली, पेट में दर्द, चकत्ते, खांसी, फोटोफोबिया या प्रकाश का डर, दस्त, उल्टी आदि थे।
अनुसंधानकर्ताओं ने इन रोगियों के साक्षात्कार के बाद पाया कि पहले नमूने के संग्रह के समय गंभीर लक्षण वाले 74 प्रतिशत मरीजों ने गठिया या जोड़ों में दर्द की शिकायत की।
उन्होंने बताया हालांकि, शेष रोगियों में लक्षण ठीक होते दिखे।
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)













QuickLY