देश की खबरें | स्थानीय स्तर पर टिपरा मोथा के साथ समझ कायम हो सकती है: येचुरी
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) महासचिव सीताराम येचुरी ने शुक्रवार को कहा कि हालांकि टिपरा मोथा के साथ कोई चुनाव पूर्व गठबंधन नहीं है, लेकिन आदिवासी पार्टी के साथ स्थानीय स्तर पर कुछ समझ कायम हो सकती है, जो त्रिपुरा के मौजूदा चुनावों में तीसरे ध्रुव के रूप में उभरी है।
अगरतला, 10 फरवरी मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) महासचिव सीताराम येचुरी ने शुक्रवार को कहा कि हालांकि टिपरा मोथा के साथ कोई चुनाव पूर्व गठबंधन नहीं है, लेकिन आदिवासी पार्टी के साथ स्थानीय स्तर पर कुछ समझ कायम हो सकती है, जो त्रिपुरा के मौजूदा चुनावों में तीसरे ध्रुव के रूप में उभरी है।
येचुरी ने हालांकि, विश्वास जताया कि वाम-कांग्रेस गठबंधन 16 फरवरी को होने वाला चुनाव अपने दम पर जीतेगा और "त्रिशंकु विधानसभा" नहीं होगी।
येचुरी ने यहां एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘स्थानीय स्तर पर कुछ समझ बन सकती है, हालांकि टिपरा मोथा के साथ कोई चुनाव पूर्व गठबंधन नहीं है।’’
येचुरी ने इन अटकलों को खारिज कर दिया कि पूर्वोत्तर राज्य में त्रिशंकु विधानसभा हो सकती है। उन्होंने कहा कि लोग धर्मनिरपेक्ष-लोकतांत्रिक ताकतों के पक्ष में "निर्णायक जनादेश" देंगे।
उन्होंने दावा किया कि लोगों ने राज्य में सरकार में बदलाव का मन बना लिया है। येचुरी ने कहा, ‘‘लोकतंत्र पर हमला, आतंक, कुशासन और भ्रष्टाचार’’ त्रिपुरा के नागरिकों को परेशान कर रहा है।
उन्होंने कहा, ‘‘ऐसे में जब चुनाव के लिए कुछ दिन बचे हैं, सत्ताधारी दल धन और बाहुबल का उपयोग करने की सख्त कोशिश करेगा। डराना -धमकाया पहले ही शुरू हो चुका है।’’
येचुरी ने यह भी दावा किया कि अन्य राज्यों, जैसे असम और गुजरात (दोनों भाजपा शासित) से सशस्त्र पुलिस बलों को केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की कमी के बहाने तैनात किया गया है। उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘लोकतंत्र और कानून के शासन को बहाल करने के लिए सभी संभव उपाय करने के अनुरोध को लेकर एक टीम दिल्ली में निर्वाचन आयोग से मुलाकात करेगी। पिछले पांच वर्षों में, पूर्वोत्तर राज्य ने न केवल कुशासन देखा है, बल्कि आजीविका के अवसरों में भी भारी गिरावट देखी है।’’
60 सदस्यीय विधानसभा में, सत्तारूढ़ भाजपा अकेले 55 सीटों पर चुनाव लड़ रही है, जबकि उसके सहयोगी आईपीएफटी ने पांच सीटों पर उम्मीदवार उतारे हैं।
माकपा 43 सीटों पर लड़ रही है और फॉरवर्ड ब्लॉक, आरएसपी और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) एक-एक सीट पर चुनाव लड़ रहे हैं, जबकि कांग्रेस ने 13 विधानसभा क्षेत्रों में अपने उम्मीदवार उतारे हैं। वाम मोर्चा पश्चिम त्रिपुरा के रामनगर निर्वाचन क्षेत्र में एक निर्दलीय उम्मीदवार का समर्थन कर रहा है।
टिपरा मोथा ने 42 विधानसभा सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे हैं।
वाम-कांग्रेस के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के बारे में पूछे जाने पर येचुरी ने कहा कि निर्वाचित विधायक अपना नेता चुनेंगे।
माकपा के प्रदेश सचिव जितेंद्र चौधरी ने भाजपा पर निशाना साधते हुए यह भी दावा किया कि ‘‘लोग लोकतंत्र की बहाली चाहते हैं जो "भाजपा के कुशासन" के चलते प्रभावित हुआ है। उन्होंने कहा, ‘‘असम के मुख्यमंत्री त्रिपुरा के मुसाफिर बन गए हैं और देर रात आते हैं... इस बारे में रहस्य नहीं पता।’’
बहुत से लोगों को ऐसा लगता है कि गठबंधन के चुनाव जीतने पर चौधरी मुख्यमंत्री बन सकते हैं।
लंबे समय तक माकपा का आदिवासी चेहरा रहे चौधरी ने यह भी दावा किया कि ‘‘भारी मात्रा में नकदी का प्रवाह हो रहा है ... पिछले कुछ दिनों में 4 करोड़ रुपये जब्त किए गए हैं। सीईओ को इन बातों का ध्यान रखना चाहिए।’’
60 सदस्यीय त्रिपुरा विधानसभा के लिए चुनाव 16 फरवरी को होंगे, जब करीब 28 लाख लोगों द्वारा अपने मताधिकार का इस्तेमाल किए जाने की उम्मीद है।
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