देश की खबरें | ‘आम्रपाली समूह के मामले अनिश्चित काल तक नहीं चल सकते’: न्यायालय ने अनुपालन रिपोर्ट मांगी

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नयी दिल्ली, सात मार्च उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को कहा कि रियल एस्टेट क्षेत्र की प्रमुख कंपनी आम्रपाली समूह से संबंधित मामले अनिश्चित काल तक नहीं चल सकते। न्यायालय ने इस मामले में अपने निर्देशों के अनुपालन पर रिपोर्ट मांगी।

न्यायमूर्ति बेला एम. त्रिवेदी और न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने कहा कि अदालत 2017 से लंबित “कार्यवाही को समाप्त करने” की उम्मीद कर रही है क्योंकि “पर्याप्त” अनुपालन हुआ है।

पीठ ने न्यायालय रिसीवर द्वारा दाखिल स्थिति रिपोर्ट पर घर खरीदारों और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण का रुख जानना चाहा, जिसमें कहा गया है कि राष्ट्रीय भवन निर्माण निगम (एनबीसीसी) ने रियल्टी क्षेत्र की प्रमुख कंपनी की रुकी हुई आवासीय परियोजना में करीब 25,000 फ्लैटों का निर्माण पूरा कर लिया है।

शीर्ष अदालत ने समय-समय पर समूह की विभिन्न परियोजनाओं में 45,000 से अधिक फ्लैटों के परेशान घर खरीदारों की शिकायतों को दूर करने के लिए कई निर्देश और आदेश पारित किए हैं।

पीठ ने घर खरीदारों की ओर से पेश वकील एम.एल. लाहोटी से अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी और एनबीसीसी द्वारा दायर स्थिति रिपोर्ट पर एक सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करने को कहा। वेंकटरमणी को 2019 में शीर्ष अदालत ने कोर्ट रिसीवर नियुक्त किया था।

शीर्ष अदालत ने वेंकटरमणी और एनबीसीसी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ दवे को घर खरीदारों और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण, जहां आम्रपाली की अधिकांश परियोजनाएं स्थित हैं, के जवाब पर अपना जवाब दाखिल करने की अनुमति भी दी।

लाहोटी ने बताया कि शीर्ष अदालत ने पूर्ववर्ती आम्रपाली समूह के पदाधिकारियों, जिसमें इसके सीएमडी अनिल शर्मा और अन्य निदेशक शामिल हैं, के खिलाफ स्वत: संज्ञान लेते हुए अवमानना ​​की कार्यवाही शुरू की थी, क्योंकि इन पर घर खरीदारों के लगभग 3000-4000 करोड़ रुपये हड़पने का आरोप है और पैसा वापस करने के निर्देश का पालन नहीं किया गया।

उन्होंने कहा कि कोर्ट रिसीवर की स्थिति रिपोर्ट में धन वापसी के लिए अदालत के 2019 के निर्देश पर कोई टिप्पणी नहीं की गई।

वेंकटरमणी ने हालांकि कहा कि 2019 के फैसले में ध्यान घर खरीदारों को राहत देने के लिए रुकी हुई परियोजनाओं को पूरा करने पर था, जिसका बड़े पैमाने पर अनुपालन किया गया।

उन्होंने कहा, “आप यहां-वहां खामियां निकाल सकते हैं, लेकिन रुकी हुई परियोजना को पूरा करने के लिए न्यायालय के बड़े निर्देशों का अनुपालन किया गया है।”

वेंकटरमणी ने अन्य बातों के अलावा फ्लैटों के पंजीकरण के समय आने वाली बाधाओं का भी उल्लेख किया।

पीठ ने कहा कि वह 26 मार्च को सुनवाई तय करते हुए विस्तृत आदेश पारित करेगी।

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