देश की खबरें | अमित जेठवा हत्या मामला : गुजरात उच्च न्यायालय ने पूर्व भाजपा सांसद के भतीजे की उम्रकैद की सजा निलंबित की

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. गुजरात उच्च न्यायालय ने 2010 में सूचना का अधिकार (आरटीआई) कार्यकर्ता अमित जेठवा की हत्या के मामले में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पूर्व सांसद दीनू सोलंकी के भतीजे शिव सोलंकी की उम्रकैद की सजा निलंबित कर दी और अपील पर सुनवाई लंबित रहने तक जमानत दे दी।

अहमदाबाद, सात फरवरी गुजरात उच्च न्यायालय ने 2010 में सूचना का अधिकार (आरटीआई) कार्यकर्ता अमित जेठवा की हत्या के मामले में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पूर्व सांसद दीनू सोलंकी के भतीजे शिव सोलंकी की उम्रकैद की सजा निलंबित कर दी और अपील पर सुनवाई लंबित रहने तक जमानत दे दी।

न्यायमूर्ति एस एच वोरा और न्यायमूर्ति मौना भट्ट की पीठ ने शिव सोलंकी को जमानत प्रदान करते हुए उनकी दोषसिद्धि को प्रथम दृष्टया ‘‘त्रुटिपूर्ण’’ बताया।

केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की एक विशेष अदालत द्वारा आजीवन कारावास की सजा पाए सात अभियुक्तों में से एक शिव सोलंकी ने दोषसिद्धि के खिलाफ उच्च न्यायालय में अपील दायर की है। शिव के चाचा दीनू सोलंकी भी इस मामले में दोषी करार दिए जा चुके हैं और जमानत पर बाहर हैं। जेठवा की 20 जुलाई, 2010 को उच्च न्यायालय परिसर के बाहर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।

अदालत ने शिव सोलंकी को जमानत पर रिहा करने का आदेश देते हुए कहा कि वह अपील की सुनवाई के दौरान गुजरात नहीं छोड़ेंगे, अपना पासपोर्ट जमा करेंगे, हर महीने थाने में अपनी उपस्थिति दर्ज कराएंगे और अदालत में अपनी अपील की सुनवाई में शामिल होंगे।

अदालत ने अपने आदेश में कहा कि प्रथम दृष्टया सीबीआई अदालत द्वारा सोलंकी की दोषसिद्धि ‘‘त्रुटिपूर्ण है, क्योंकि परिस्थितिजन्य साक्ष्य और दोषसिद्धि की आवश्यकता के संबंध में उच्चतम न्यायालय द्वारा निर्धारित सभी सिद्धांतों का उल्लंघन हुआ है।’’

अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता के खिलाफ परिस्थितियों को मुकम्मल रूप से देखने पर ऐसी कोई कड़ी नजर नहीं आती, जिससे इस निष्कर्ष पर पहुंचा जाए कि अपराध याचिकाकर्ता ने किया था। अदालत ने कहा कि इससे इंकार नहीं किया जा सकता कि याचिकाकर्ता को ‘फंसाया’ गया।

उच्च न्यायालय ने सितंबर 2021 में मुख्य आरोपी दीनू सोलंकी की 7 जून, 2019 को सीबीआई अदालत द्वारा दोषसिद्धि के खिलाफ उनकी अपील लंबित रहने तक सजा को निलंबित कर दिया था। उच्चतम न्यायालय ने बाद में जमानत के आदेश की पुष्टि की थी।

जेठवा ने आरटीआई आवेदनों के माध्यम से दीनू सोलंकी से जुड़ी अवैध खनन गतिविधियों का पर्दाफाश करने की कोशिश की थी। अपराध जांच विभाग (सीआईडी) ने आरोप पत्र दाखिल किया। सितंबर 2012 में, उच्च न्यायालय ने सीबीआई को जांच सौंपी।

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