देश की खबरें | कोविड-19 के बढ़ते मामलों के बीच प.बंगाल सरकार ने इलाज के लिये नए नियम सुझाए

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कोलकाता, छह जुलाई पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य के सभी कोविड-19 अस्पतालों को, रोगी को पारंपरिक वेंटिलेटर मशीन पर पर रखने से पहले जब और जैसे संभव हो ''प्रोन अवेक वेंटिलेशन'' (पेट के बल सीधा लिटाकर ऑक्सीजन में सुधार) का विकल्प चुनने की सलाह दी है।

स्वास्थ्य विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि ऐसा करने से कोरोना वायरस से बढ़ते मामलों के दौरान वेंटिलेटर मशीन के इस्तेमाल को कम किया जा सकता है।

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विभाग की ओर से जारी परामर्श में कहा गया है कि ‘प्रोन अवेक वेंटिलेशन’ को ‘प्रोन पोजिशनिंग वेंटिलेशन’ भी कहा जाता है। इस तरकीब का इस्तेमाल आमतौर पर आईसीयू में सांस लेने में गंभीर समस्या का सामना कर रहे रोगियों के लिये किया जाता है। इसका इस्तेमाल कोविड-19 रोगियों पर भी किया जाना चाहिये।

अधिकारी ने कहा कि अगर यह काम नहीं करता है कि तो मरीज को पारंपरिक वेंटिलेटर पर रखा जाना चाहिये।

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अधिकारी ने कहा, ''हर दिन बढ़ते कोविड-19 मामलों के मद्देनजर हमारे पास हर समय मरीजों के लिए आईसीयू और वेंटिलेटर तैयार होने चाहिये। लेकिन राज्य में फिलहाल उपलब्ध वेंटिलेटर पर्याप्त नहीं हैं।''

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार पश्चिम बंगाल में उसके कोविड-19 अस्पतालों में फिलहाल 395 वेंटिलेटर और आईसीयू में 948 बिस्तर हैं।

विभाग ने यह भी कहा कि ''संबंधित मामलों में उचित सलाह के लिए सुपर-स्पेशलिटी टीम उपलब्ध होनी चाहिए।''

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