विदेश की खबरें | साइबर हमले के बाद सुरक्षा चाक चौबंद करने में जुटीं अमेरिकी एजेंसियां और कंपनियां

इससे हुई क्षति का आकलन किया जा रहा है। हालांकि संभावित खतरे को देखते हुए अमेरिका के आंतरिक सुरक्षा विभाग की साइबर सुरक्षा इकाई ने सोमवार को सभी संघीय एजेंसियों को इससे प्रभावित नेटवर्क प्रबंधन सॉफ्टवेयर को हटाने का निर्देश दिया। हजारों कंपनियां इस दिशा में काम करने वाली हैं।

जिस तरह से वित्त एवं वाणिज्य विभाग और संभवत: अन्य विभागों की साइबर सुरक्षा में सेंध लगाई गई और विभागों की गोपनीय फाइलों तक पहुंच बनाई गई, उससे साइबर घुसपैठ के जरिए गोपनीय सूचना चुराने की आशंका है।

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अमेरिका की पूर्व साइबर सुरक्षा अधिकारी रहीं और वर्तमान में सेंटर फॉर स्ट्रैटजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज में वरिष्ठ सलाहकार सुजैन स्पोल्डिंग ने कहा, ‘‘यह ध्यान रखने वाली बात है कि रक्षा करने से आसान हमला करना होता है। हमें अब भी काफी कुछ करना बाकी है।’’

साइबर घुसपैठ करने वालों का पता लगाया जा रहा है। एक अमेरिकी अधिकारी ने नाम नहीं जाहिर करने की शर्त पर बताया कि मामले में रूसी हैकरों का हाथ होने की आशंका है।

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‘वाशिंगटन पोस्ट’ ने अज्ञात सूत्रों के हवाले से कहा है कि हमला रूसी सरकार की खुफिया सेवा से जुड़े हैकरों ने किया है।

घुसपैठ का पता उस वक्त चला जब साइबर सुरक्षा से जुड़ी एक प्रमुख कंपनी फायर आई ने बताया कि उसकी साइबर सुरक्षा में सेंध लगाई गई है और कुछ दूसरे देशों एवं प्रमुख संगठनों की साइबर सुरक्षा में सेंध लगाए जाने की आशंका जताई। हालांकि कंपनी ने यह नहीं बताया कि उसे किस पर संदेह है लेकिन साइबर हमले के तरीकों को देखकर विशेषज्ञों की राय है कि इसमें रूस का हाथ है।

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