देश की खबरें | कृषि कानूनों के खिलाफ अमरिंदर का धरना, केंद्र पर ‘सौतेले’ व्यवहार का आरोप लगाया

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने केंद्रीय कृषि कानूनों के खिलाफ बुधवार को यहां धरना दिया और केंद्र सरकार पर उनके राज्य के साथ “सौतेला” व्यवहार करने का आरोप लगाया।

एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली, चार नवंबर पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने केंद्रीय कृषि कानूनों के खिलाफ बुधवार को यहां धरना दिया और केंद्र सरकार पर उनके राज्य के साथ “सौतेला” व्यवहार करने का आरोप लगाया।

मुख्यमंत्री ने दावा किया कि नए कृषि कानूनों के खिलाफ पंजाब में किसानों के आंदोलन का राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर प्रभाव पड़ सकता है और चीन एवं पाकिस्तान इस सीमावर्ती राज्य में शांति भंग करने का प्रयास कर रहे हैं।

यह भी पढ़े | पाकिस्तान और चीन की बढ़ेगी बेचैनी, भारत पहुंचा Rafale Aircraft का दूसरा बैच.

उन्होंने कहा कि वह अपने राज्य के किसानों को ‘बचाने’ का प्रयास कर रहे हैं क्योंकि केंद्र उनकी जीविका के खिलवाड़ कर रही है।

पहले यह धरना राजघाट पर प्रस्तावित था, लेकिन वहां धारा 144 लगने के कारण इसे जंतर-मंतर पर किया गया।

यह भी पढ़े | यूपी और हरियाणा के बाद MP की शिवराज सरकार भी ला रही है ‘लव जिहाद’ के खिलाफ सख्त कानून, सीएम बोले- हमने प्रक्रिया शुरू कर दी है.

धरने में पंजाब के मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘अपको एक व्यवस्था की जगह दूसरी व्यवस्था लाकर क्या मिला और यह दूसरी व्यवस्था पंजाब में नहीं चल सकती। किसानों से खरीद के लिए किसी को कोई रोक नहीं रहा है, लेकिन आप मौजूदा व्यवस्था को बाधित मत करिए।’’

उन्होंने यह भी कहा, ‘‘मेरे मंत्री किसान संगठनों से बातचीत कर रहे हैं और उन्हें मनाने का प्रयास कर रहे हैं। दो चीजों के साथ किसी शासक को छेड़छाड़ नहीं करनी चाहिए। पहला धर्म और दूसरी जीविका।’’

अमरिंदर सिंह के नेतृत्व में पंजाब से कांग्रेस के सभी विधायकों और सांसदों ने यहां जंतर मंतर पर धरना दिया। इस धरने में लोक इंसाफ पार्टी के विधायक सिमरनजीत सिंह बैंस, पंजाबी एकता पार्टी के विधायक सुखपाल खैरा और शिरोमणि अकाली दल (डेमोक्रेटिक) के विधायक परमिंदर सिंह ढींढसा शामिल हुए।

पंजाब के मुख्यमंत्री ने कहा कि आम आदमी पार्टी पर धरने में शामिल नहीं होने के लिए ‘दबाव बनाया’ गया क्योंकि दिल्ली में उनकी सरकार ने किसानों को बचाने के लिए संशोधन विधेयक पारित नहीं किये।

कांग्रेस सहित कई विपक्षी पार्टियों का आरोप है कि केंद्र द्वारा हाल ही में लाए गए कृषि कानून किसानों के हितों के विरोधी हैं और कार्पोरेट घरानों के हित में हैं।

हालांकि, केंद्र ने जोर दिया है कि नए कानून किसानों के हित में हैं।

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)

Share Now

\