नयी दिल्ली, एक सितंबर उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश नागेश्वर राव ने कहा है कि वाणिज्यिक उद्देश्यों के लिए उपग्रह संचार कंपनियों को नीलामी के बगैर स्पेक्ट्रम का आवंटन करने से इस तरीके की वैधता को लेकर चिंताएं पैदा होंगी।
देश की अग्रणी दूरसंचार कंपनी रिलायंस जियो ने इस मामले पर न्यायमूर्ति राव की राय मांगी थी।
रिलायंस जियो ने अपनी दलील के समर्थन में न्यायमूर्ति राव के इस मत से भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) को अवगत कराया है। जियो का कहना है कि उपग्रह संचार कंपनियों को संचार सेवाओं के लिए स्पेक्ट्रम आवंटन सिर्फ नीलामी के जरिये ही किया जाना चाहिए।
जियो समेत अन्य संचार कंपनियों ने उच्चतम न्यायालय के फैसले का हवाला देते हुए स्पेक्ट्रम आवंटन नीलामी से ही किए जाने की मांग की है।
न्यायमूर्ति राव का मत है, "उपग्रह स्पेक्ट्रम आवंटन से संबंधित वाणिज्यिक पहलुओं को ध्यान में रखते हुए नीलामी के अलावा किसी अन्य तरीके का समर्थन करने वाला कोई भी कानून या नियम इसकी वैधता पर चिंताएं बढ़ाते हुए संविधान के अनुच्छेद 14 के तहत संवैधानिक रूप से अनुचित पाया जा सकता है।“
अनुच्छेद 14 कानून के समक्ष नागरिक की समानता को संरक्षण देने का प्रावधान करता है।
यह दूसरी विशेषज्ञ राय है जिसे रिलायंस जियो ने अपने मत के समर्थन में पेश किया है। इसके पहले जियो ने उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश के एस पी राधाकृष्णन की राय भी सौंपी थी। न्यायमूर्ति राधाकृष्णन ने भी अंतरिक्ष-आधारित वाणिज्यिक संचार सेवाओं के लिए स्पेक्ट्रम आवंटन की नीलामी को एकमात्र स्वीकार्य तरीका बताया था।
हालांकि उद्योग निकाय इंडियन स्पेस एसोसिएशन (आईएसपीए) ने ट्राई को सौंपे अपने प्रतिवेदन में कहा है कि वैश्विक स्तर पर उपग्रह स्पेक्ट्रम के लिए कोई नीलामी मॉडल नहीं है। उसने कहा कि स्थापित मानकों के तहत स्पेक्ट्रम को प्रशासनिक व्यवस्था के तहत आवंटित करना है।
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