देश की खबरें | रायपुर में 12 मामलों में वांछित कथित महिला नक्सली गिरफ्तार, पीयूसीएल ने उसे अपना कार्यकर्ता बताया
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित बीजापुर जिले की पुलिस ने हत्या समेत नक्सली घटना से जुड़े 12 मामलों में कथित तौर पर वांछित एक महिला को राजधानी रायपुर से सोमवार को गिरफ्तार करने का दावा किया है।
रायपुर, तीन जून छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित बीजापुर जिले की पुलिस ने हत्या समेत नक्सली घटना से जुड़े 12 मामलों में कथित तौर पर वांछित एक महिला को राजधानी रायपुर से सोमवार को गिरफ्तार करने का दावा किया है।
पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज (पीयूसीएल) की छत्तीसगढ़ इकाई ने कहा है पुलिस ने जिस महिला गिरफ्तार किया है वह एक आदिवासी कार्यकर्ता है, जो बीजापुर जिले में पुलिस के अत्याचारों के खिलाफ आवाज उठाती रही है।
पुलिस अधिकारियों ने सोमवार को बताया कि 12 मामलों में वांछित सुनीता पोटाम (25) को पुलिस ने रायपुर से गिरफ्तार कर लिया है।
उन्होंने बताया कि पोटाम के खिलाफ बीजापुर जिले के विभिन्न थानों में हत्या, हत्या का प्रयास, आगजनी, लूट, भड़काऊ भाषण, जनता को भड़काने और शासकीय सम्पत्ति को नुकसान पहुंचाने के मामले में 12 स्थाई वांरट लंबित है।
पुलिस अधिकारियों ने बताया पोटाम माओवादियों के शहरी नेटवर्क की महत्वपूर्ण कड़ी थी तथा वह पहचान छुपाकर रायपुर में रह रही थी।
उन्होंने बताया कि पोटाम के खिलाफ बीजापुर के गंगालूर थाने में सात, मिरतुर में चार और बीजापुर में एक स्थाई वारंट लंबित है।
अधिकारियों ने बताया कि रायपुर में उसके ठिकाने के बारे में एक गुप्त सूचना के आधार पर बीजापुर पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया और बीजापुर ले गई। उसे एक स्थानीय अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।
पीयूसीएल छत्तीसगढ़ ने एक बयान में पोटाम की गिरफ्तारी की निंदा की है और उसकी रिहाई की मांग की।
पीयूसीएल ने कहा है कि आदिवासी कार्यकर्ता और मानवाधिकार रक्षक पोटाम पीयूसीएल छत्तीसगढ़ और राष्ट्रीय महिला संगठन की सक्रिय सदस्य हैं। पीयूसीएल ने कहा कि पोटाम ओपन स्कूल से 10वीं की पढ़ाई पूरी करने के लिए रायपुर गई थीं।
संस्था ने अपने बयान में कहा कि यह गिरफ्तारी सर्वोच्च न्यायालय द्वारा निर्धारित दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करके की गई है। मानवाधिकार रक्षक के रूप में सुनीता पोटाम बीजापुर में पुलिस द्वारा किए गए अत्याचारों के खिलाफ अपनी आवाज उठाती रही हैं।
पीयूसीएल ने कहा कि 2016 में सुनीता ने छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के समक्ष बीजापुर जिले के गांवों में छह व्यक्तियों की हत्याओं के खिलाफ याचिका दायर की थी। इसके अलावा वह स्थानीय स्तर पर विरोध प्रदर्शनों का नेतृत्व करती रही हैं।
संजीव
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