देश की खबरें | अग्निपथ योजना से संबंधित सभी जनहित याचिकाएं दिल्ली उच्च न्यायालय को स्थानांतरित की जाएं : न्यायालय

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नयी दिल्ली, 19 जुलाई उच्चतम न्यायालय ने अपने समक्ष लंबित उन सभी जनहित याचिकाओं को मंगलवार को दिल्ली उच्च न्यायालय को स्थानांतरित कर दिया, जिनमें सशस्त्र बलों में भर्ती से जुड़ी केंद्र सरकार की ‘अग्निपथ’ योजना को चुनौती दी गयी थी।

सुनवाई के दौरान, याचिकाकर्ताओं में से एक ने कहा कि उनकी याचिका का अखिल-भारतीय असर होगा, जिसपर तीन सदस्यीय पीठ ने कहा कि ‘अखिल-भारतीय’ का मतलब यह नहीं कि वह हर मामले की सुनवाई करेगी। पीठ ने आगे कहा कि इस मामले में अच्छा होगा कि दिल्ली उच्च न्यायालय इस पर कोई सुविचारित मत दे।

न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति ए एस बोपन्ना की पीठ ने केरल, पंजाब एवं हरियाणा, पटना और उत्तराखंड उच्च न्यायालय से भी इस योजना के खिलाफ उनके यहां दायर सभी जनहित याचिकाओं को या तो दिल्ली उच्च न्यायालय में स्थानांतरित करने या फिर उन पर तब तक फैसला निलंबित रखने को कहा, जब तक दिल्ली उच्च न्यायालय अपना निर्णय नहीं कर लेता।

पीठ ने कहा, “हमारा विचार है कि जिन तीन रिट याचिकाओं को इस अदालत के समक्ष दायर किया गया है, उन्हें दिल्ली उच्च न्यायालय में स्थानांतरित कर दिया जाना चाहिए और संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत उनकी संख्या बदल दी जानी चाहिए। आमतौर पर हम याचिकाकर्ताओं को दिल्ली उच्च न्यायालय में नए सिरे से जाने की आजादी देकर इन याचिकाओं का निपटारा कर देते हैं, लेकिन हम याचिकाओं को वापस लेने और इन्हें नए सिरे से दायर करने की प्रक्रिया में होने वाली देरी से बचने के लिए यह कदम उठाने से परहेज कर रहे हैं।”

पीठ ने कहा, ‘‘हम संबंधित पक्षों को सुनकर रिट याचिकाओं के त्वरित निपटारे का दिल्ली उच्च न्यायालय ने आग्रह करते हैं।’’

पीठ ने निर्देश दिया कि शीर्ष अदालत के न्यायिक रजिस्ट्रार भारतीय संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दायर तीनों रिट याचिकाओं के रिकॉर्ड दिल्ली उच्च न्यायालय के न्यायिक रजिस्ट्रार को स्थानांतरित करेंगे, ताकि याचिकाओं की संख्या बदली जा सके और संबंधित उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीशों के निर्देश के तहत इन्हें उचित पीठ के सामने सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जा सके।

शीर्ष अदालत ने कहा कि उसे इस तथ्य से अवगत कराया जा रहा है कि केरल, पटना, पंजाब एवं हरियाणा और उत्तराखंड उच्च न्यायालय के समक्ष भी कई याचिकाएं दायर की गई हैं।

न्यायालय ने कहा, “ऐसे में यह निर्देश देना उचित होगा कि संबंधित मामले में भारत सरकार की ओर से पेश होने वाले वकील द्वारा प्रत्येक उच्च न्यायालय की कार्यवाही में वर्तमान आदेश की प्रति रिकॉर्ड पर रखी जाए।”

पीठ ने कहा कि उच्च न्यायालय अनुच्छेद 226 के तहत याचिका दायर करने वाले इन याचिकाकर्ताओं को या तो मौजूदा निर्देशों के तहत अपनी याचिका को दिल्ली उच्च न्यायालय के समक्ष स्थानांतरित करने का विकल्प देंगे या फिर वे दिल्ली उच्च न्यायालय के समक्ष लंबित कार्यवाही में हस्तक्षेप कर अपनी दलीलें देने के लिए स्वतंत्र होंगे।

शीर्ष अदालत ने कहा, “याचिकाकर्ता द्वारा पहला विकल्प चुने जाने की सूरत में संबंधित उच्च न्यायालय में लंबित याचिका को दिल्ली उच्च न्यायालय के समक्ष उन याचिकाओं के साथ सुनवाई के लिए भेज दिया जाएगा, जो वहां विचाराधीन हैं या फिर मौजूदा आदेश के तहत स्थानांतरित की गई हैं।”

पीठ ने स्पष्ट किया कि अगर याचिकाकर्ता दूसरा रुख अपनाता है तो उच्च न्यायालय संबंधित याचिका को लंबित रखेंगे और उस अवधि में याचिकाकर्ता दिल्ली उच्च न्यायालय के समक्ष हस्तक्षेप करने के लिए स्वतंत्र होंगे, ताकि उन्हें वहां लंबित कार्यवाही के संबंध में अपनी दलीलें रखने का पूरा अवसर मिल सके।

शीर्ष अदालत ने कहा कि मामले में इसके बाद दायर की जाने वाली याचिकाओं के संबंध में भी उच्च न्यायालयों द्वारा समान प्रक्रिया का पालन किया जाएगा।

पीठ ने कहा कि आदेश की प्रति रिकॉर्ड में उपलब्ध कराई जाए और सभी याचिकाकर्ता अपनी याचिकाओं को दिल्ली उच्च न्यायालय के समक्ष स्थानांतरित करने के लिए स्वतंत्र होंगे।

शीर्ष अदालत ने दिल्ली उच्च न्यायालय से संबंधित पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सभी स्थानांतरित याचिकाओं के साथ-साथ उसके समक्ष लंबित याचिकाओं के जल्द निपटारे का आग्रह भी किया।

सुनवाई के प्रारंभ में याचिकाकर्ताओं में से एक हर्ष अजय सिंह की ओर से पेश अधिवक्ता कुमुद लता सिंह ने कहा कि उन्होंने सशस्त्र बलों में भर्ती से संबंधित अग्निपथ योजना के केंद्र सरकार के फैसले को चुनौती दी है।

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