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देश की खबरें | वायु गुणवत्ता समिति ने दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण से निपटने की योजना में संशोधन किया

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देश की खबरें | वायु गुणवत्ता समिति ने दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण से निपटने की योजना में संशोधन किया

नयी दिल्ली, 13 जुलाई वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने स्थिति की गंभीरता के अनुरूप प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए लागू वर्गीकृत प्रतिक्रिया कार्य योजना में संशोधन किया है।

पर्यावरण एवं वन मंत्रालय ने वर्ष 2017 में वर्गीकृत प्रतिक्रिया कार्ययोजना (जीआरएपी) को अधिसूचित किया था और यह उसी साल अक्टूबर के मध्य में तब प्रभावी हुआ जब वायु प्रदूषण की स्थिति खराब होनी शुरू हुई।

सीएक्यूएम ने यह कार्ययोजना दिल्ली- एनसीआर (राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र) में प्रदूषण के प्रभाव को कम करने के उद्देश्य से बनाई थी।

राष्ट्रीय राजधानी के लिए जीआरएपी को अब खराब वायु गुणवत्ता के आधार पर चार स्तरों में परिभाषित किया गया है। पहला स्तर ‘खराब’ (वायु गुणवत्ता सूचंकाक-एक्यूआई201- 300 होने पर), दूसरा स्तर ‘बहुत खराब’ (एक्यूआई-301 से 400 के बीच), तीसरा स्तर ‘गंभीर’ (एक्यूआई 401 से 450) और चौथा स्तर ‘आपात’ (एक्यूआई 450 से अधिक) है।

संशोधित जीआरएपी में पहले स्तर पर ही प्रदूषण होने पर कोयला, लकड़ी जलाने पर रोक लगाने का प्रावधान किया गया, जिनमें तंदूर होटल, खुले में चल रहे ढाबे, डीजल जेनरेटर शामिल हैं। इस श्रेणी में केवल आवश्यक और आपात सेवाओं को इन दों ईंधनों के इस्तेमाल पर छूट मिलेगी।

अगर स्थिति ‘गंभीर’ (तीसरे स्तर) तक पहुंचती है तो अधिकारी दिल्ली-एनसीआर में आवश्यक परियोजनाओं जैसे रेलवे, मेट्रो, हवाई अड्डे, अंतरराज्यीय बस अड्डा (आईएसबीटी, राष्ट्रीय सुरक्षा/रक्षा से जुड़ी राष्ट्रीय महत्व की परियोजनाओं) को छोड़कर निर्माण और ध्वस्तीकरण के कार्य पर रोक लगा देंगे। इस स्तर के प्रदूषण में गैर प्रदूषणकारी कार्य जैसे नल आदि, लकड़ी, आतंरिक सज्जा और बिजली के काम पर भी रोक होगी।

दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण तीसरे स्तर पर पहुंचने पर स्वच्छ ईंधन से चलने वाले ईंट भट्टे, हॉट मिक्स संयंत्र और पत्थर तोड़ने वाले संयंत्र और खनन गतिविधियां भी प्रतिबंधित रहेंगी।

नीतिगत दस्तावेज में कहा गया, ‘‘ दिल्ली-एनसीआर की राज्य सरकारें प्रदूषण के तीसरे स्तर पर बीएस-III और बीएस-IV मानक के हल्के डीजल मोटर वाहन पर भी रोक लगा सकती हैं।’’

दस्तावेज के मुताबिक चौथे चरण या ‘‘आपात’’ स्थिति से निपटने की योजना के तहत दिल्ली में ट्रकों के प्रवेश पर रोक और दिल्ली में पंजीकृत मध्यम और भारी माल ढोने वाले वाहनों पर भी रोक रहेगी,लेकिन आवश्यक सेवाओं में लगे ऐसे वाहनों के परिचालन को प्रतिबंध से ढील दी जाएगी।

इस स्तर के प्रदूषण में बीएस-VI मानक के वाहनों और आवश्यक सेवाओं में संलग्न वाहनों को छोड़ सभी चार पहिया डीजल वाहनों पर भी दिल्ली-एनसीआर में रोक होगी।

चौथे स्तर के प्रदूषण की स्थिति में प्रदूषण करने वाले ईंधन से चलने वाले उद्योगों और राजमार्ग, सड़क, फ्लाईओवर, ओवर ब्रिज, बिजली पारेषण और पाइपलाइन के निर्माण और ध्वस्तीकरण की गतिविधियां भी प्रतबंधित रहेंगी।

दस्तावेज के मुताबिक, ‘‘राज्य सरकारें सरकारी और निजी कार्यालयों के 50 प्रतिशत करर्मचारियों को घर से ही काम करने देने की अनुमति देने पर विचार कर सकती हैं। इसके अलावा शैक्षणिक संस्थानों को बंद करने और वाहनों के परिचालन के लिए सम-विषम व्यवस्थाओं को लागू करने पर विचार कर सकती हैं।’’

स्तर दो, तीन और चार के तहत कार्ययोजना को लागू करने के लिए कम से कम गत तीन दिनों के एक्यूआई पर विचार किया जाएगा।

इससे पहले अधिकारी पीएम-2.5 या पीएम.10 के स्तर के आधार पर प्रदूषण प्रतिक्रिया कार्य योजना लागू करते थे।

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(The above story first appeared on LatestLY on Jul 13, 2022 07:44 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).