देश की खबरें | एम्स कोविड-19 रोगियों पर विकिरण चिकित्सा के प्रभाव का आकलन करने के लिए प्रायोगिक शोध कर रहा है

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नयी दिल्ली, 17 जून अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) कोरोना वायरस से संक्रमित रोगियों में निमोनिया के लक्षणों को कम करने के लिए कम मात्रा वाली विकिरण चिकित्सा (रेडिएशन थेरेपी) के प्रभाव का आकलन करने के लिए एक प्रायोगिक अध्ध्यन कर रहा है।

एम्स में रेडिएशन ऑन्कोलॉजी विभाग के प्रमुख एवं अनुसंधान परियोजना के प्रमुख अन्वेषक डॉ डी एन शर्मा ने कहा कि ऑक्सीजन सपोर्ट पर रखे गए दो कोविड​​-19 रोगियों को पिछले शनिवार को थेरेपी दी गई थी और तब से उनकी स्थिति में सुधार हुआ है।

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डॉ शर्मा ने कहा, ‘‘एम्स के झज्जर केंद्र में स्थित राष्ट्रीय कैंसर संस्थान में भर्ती 50 वर्ष से अधिक आयु के दोनों मरीज का अब ऑक्सीजन सपोर्ट हटा लिया गया है।’’

उन्होंने विस्तार से बताया, ‘‘विकिरण चिकित्सा आमतौर पर कैंसर के इलाज के लिए उच्च मात्रा में दी जाती है, लेकिन इस मामले में हम रोगी को एक बार में 70 सेंटीग्रे विकिरण की सुरक्षित मात्रा दे रहे हैं।

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पूरे उपचार में लगभग 15 से 20 मिनट लगते हैं और इसका कोई दुष्प्रभाव नहीं है।

शर्मा के अनुसार, एंटीबायोटिक्स न होने पर निमोनिया के इलाज के लिए इस उपचार पद्धति का उपयोग 1940 के दशक तक किया गया था।

उन्होंने बताया कि इस पायलट प्रोजेक्ट के तहत, आठ और मरीजों को यह थेरेपी दी जाएगी। इसके बाद इनके परिणामों के आंकड़ों का विश्लेषण किया जाएगा। यदि यह थेरेपी गंभीर मामलों में कोविड​​-19 उपचार में प्रभावी पाया जाता है, तो इस अनुसंधान परियोजना को और विस्तारित किया जाएगा।

शर्मा ने कहा, ‘‘इसी तरह के अध्ययन अमेरिका, स्पेन और इटली में भी किए जा रहे हैं।’’

देश में बुधवार को कोविड-19 के कारण मरने वालों की संख्या बढ़कर 11,903 हो गई, जबकि संक्रमितों की संख्या 3,54,065 हो गई।

सरकार ने शनिवार को कोरोना वायरस संक्रमण के उपचार के लिए एक संशोधित दिशा-निर्देश जारी किया, जिसमें संक्रमण के हल्के मामलों में रोगियों को एंटीवायरल ड्रग रेमडेसिविर और रोग के शुरुआती दौर में हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन देने की अनुमति दी गई है।

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